प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों का कर्जा और बिजली बिल माफ़ करें : छग किसान मजदूर महासंघ

प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों का कर्जा और बिजली बिल माफ़ करें : छग किसान मजदूर महासंघ

13.9.17

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ ने राज्य सरकार द्वारा 21 जिलों की चुनिन्दा 96 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की बजाये समूचे प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है ।  राज्य सरकार द्वारा यह घोषणा किसानों को राहत देने के लिये पर्याप्त नहीं है ।

सूखा के हालात और किसानो  की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर आज किसान महासंघ की आरंग में बैठक हुई । इस बैठक में  आरंग एवम नया रायपुर क्षेत्र के किसानों के अलावा संचालक मंडल सदस्य द्वारिका साहू, पप्पू कोसरे, श्रवण चंद्राकर, पारसनाथ साहू, गोविन्द चन्द्राकर, लक्ष्मी नारायण चन्द्राकर और  डॉ संकेत ठाकुर के अतिरिक्त राष्ट्रिय किसान समन्वय समिति के संयोजक विवेकानन्द जी अमरावती से विशेष रूप से उपस्थित थे ।

 भयावह अकाल के परिप्रेक्ष्य में किसानों ने कहा कि लगातार तीन साल से सूखा या इसकी आशंका और वाजिब समर्थन मूल्य के अभाव में किसानों का कर्ज बढ़ गया है । दूसरी ओर सूखा की वजह से किसानों को खरीफ के मौसम में सिंचाई हेतु लगातार पम्प चलाना पड़ रहा है । इस वजह से बिजली की अनावश्यक खपत बढ़ गई है । अतः किसान महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि किसानों का कर्ज़ा और बिजली बिल तत्काल माफ़ किया जाये । 

उल्लेखनीय है कि कर्ज की वजह से तीन विगत तीन माह में दो दर्जन से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली है । जबकि अत्यधिक राशि का बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने के कारण सराईपाली एवम बसना क्षेत्र के किसानों को जेल में बन्द कर या मनमाना जुर्माना कर प्रताड़ित किया जा रहा है । बिजली बिल को माफ़ करने की मांग को लेकर किसान आंदोलनरत है । आज 8 किसानों के अनशन का सातवां दिन था ।

सूखा के परिप्रेक्ष्य में किसानों ने मांग की है कि प्रदेश में अब फिजूलखर्ची पर रोक लगाते हुए समस्त शासकीय आयोजन,राज्योत्सव, उद्घाटन, शिलान्यास, किसान मेला, आदि पर प्रतिबन्ध वर्ष 2017-18 में  लगा दिया जाये ।

किसान महासंघ ने राजनांदगाव में बोनस की अधूरी घोषणा के नाम पर मुख्यमंत्री के सम्मान समारोह में ग्राम पंचायतों  की राशि  का दुरूपयोग करने पर कड़ी आपति दर्ज की है . सिर्फ एक साल का धान बोनस बाँटकर किसानों की नाराजगी दूर नही हो सकती. महासंघ ने मांग की है कि किसानों के चार वर्ष के धान का बोनस के रु 300 प्रति क्विंटल को 15 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से रु 4500 प्रति एकड़ तय करते हुए इस वर्ष किसानों को रु 18000 प्रति एकड़ बोनस राशि को उपलब्ध कराई जाये, तभी किसानों को कोई राहत मिल पायेगी. 

भाजपा ने किसानों से किया एक भी संकल्प पूरा नही किया है. पिछले तीन महीनों से प्रदेश भर के किसान भारतीय जनता पार्टी के संकल्पों 300 रु बोनस, मुफ्त बिजली, शून्य प्रतिशत ब्याज पर लोन, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुरूप लागत पर डेढ़ गुना समर्थन मूल्य की घोषणा, 2100 रु समर्थन मूल्य, एक एक दाना धान की खरीदी आदि संकल्पों की याद भाजपा के विधायकों और मंत्रियों को करा रहे हैं ।

प्रदेश भर में हुये किसान आंदोलन से सरकार ने घबराकर बोनस का ऐलान जरूर किया लेकिन अपने संकल्पों को भाजपा ने पूरा नहीं किया । इसीलिए अब दिनांक 21 सितम्बर को प्रदेशभर के किसान मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे. इस हेतु गाँव गाँव में बैठकों का दौर चल रहा है ।

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

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