मोदी युग का मिनिमम गव्हर्मेंट –जेके कर

मोदी युग का मिनिमम गव्हर्मेंट –जेके कर

13,09,2017
प्रधानमंत्री मोदी जी ने वह कर दिखाया है जो मार्गरेट थैचर तथा जार्ज बुश जूनियर नहीं कर सके थे. प्रचंड बहुमत से सत्तारूढ़ होने वाले प्रधानमंत्री ने वाकई वह कर दिखाया है जो ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर तथा अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्लयू बुश नहीं कर सके थे. यहां तक कि मनमोहन सरकार पर लगने वाले आरोप ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ को उन्होंने ‘विपक्ष की पैरालिसिस’ में बदल कर रख दिया है. आज विपक्ष बिखरा हुआ तथा इतने कमजोर हालत में है कि ऐसा आभास हो रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी मोदी-शाह का करिश्मा काम कर जायेगा. जी हां, मोदी युग के साथ भारत ने 2014 में आर्थिक सुधार के तीसरे दौर में प्रवेश किया है. लेकिन जिस तेजी से सरकारी तथा सार्वजनिक संपत्ति का निजीकरण किया जा रहा है वह मार्गरेट थैचर तथा जार्ज बुश भी अपने दौर में नहीं कर सके थे. 1980 के दशक को थैचर-रीगन के क्रांति के रूप में जाना जाता है. थैचर ने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन का नारा दिया था. ठीक उसी तरह से बकौल ‘नरेन्द्रमोदीडॉटइन’ के अनुसार, मेरा मानना है कि सरकार को व्यापार नहीं करना चाहिये. फोकस ‘मिनिमम गव्हर्मेंट एंड मैक्सिमम गवर्नेंस’ पर होना चाहिये. जाहिर है कि प्रधानमंत्री मोदी भी थैचर तथा बुश के कर कदमों पर ही चल रहें हैं.

थैचर ने सरकार की भूमिका को घटाया, ट्रेड यूनियनों की ताकत को बेअसर किया और उन्मुक्त पूंजीवाद का खुला समर्थन किया. उन्होंने उद्यम और बाजार को विचारधारा के शिकंजों से आजाद कर उन्हें फूलने-फलने का मौका दिया. जिससे दुनिया में ऐसी अर्थव्यवस्था बनी जिसमें वित्तीय पूंजी का वर्चस्व कायम हुआ, जिसके परिणास्वरूप आर्थिक विषमता बढ़ी. न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन विचार की जड़ में यह बात है कि बाजार को नियंत्रण मुक्त कर दिया जाना चाहिये लेकिन समाज को सुरक्षित (व्यवहार में असंतोष को नियंत्रित) करने के लिये अधिकतम शासन की जरूरत है. इसलिये पुलिस और सेना की ताकत बढ़ाने की आवश्यकता है. मार्गरेट थैचर 1979-1990 तक ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रहीं. जबकि जॉर्ज वॉकर बुश ने 20 जनवरी 2001 को पदभार ग्रहण किया तथा 19 जनवरी 2001 तक पद पर रहें. अपने शासन काल में उन्होंने अमीरों के टैक्स में भारी कटौतियां की. साल 2001 में बुश ने उऩ लोगों को जिनकी आय 1 मिलियर डॉलर की थी उन्हें 18 हजार डॉलर की छूट दी. साल 2003 में अमीरों को टैक्स में और छूट दी गई. परिणाम स्वरूप अमरीका में नीचे के 20 फीसदी लोगों को औसतन टैक्स में मात्र 45 डॉलर की छूट मिली जबकि जिनकी आय 1 मिलियन याने 10 लाख डॉलर से ज्यादा थी उन्हें औसतन टैक्स में 1,62,000 डॉलर की छूट मिली.
ठीक उसी तरह से मोदी जी की सरकार ने पिछले सुधारों को गति प्रदान करते हुये नोटबंदी तथा जीएसटी को लागू किया गया. मोदी सरकार ने अपने पहले पूर्ण बजट 2015-16 में कॉर्पोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी का कर दिया. इससे पहले यूपीए की सरकार ने 2013-14 के बजट में कॉर्पोरेट घरानों पर दयानतदारी दिखाते हुये उन्हें 5.32 लाख करोड़ रुपये की छूट दे दी. यदि गहराई से देखा जाये तो साल 2005-06 से लेकर 2014 तक कॉर्पोरेट घरानों को 36.5 लाख करोड़ रुपये की माफी दी गई थी. दूसरी तरफ जीएसटी के माध्यम से आम जनता पर अप्रत्यक्ष करों का बोझ बढ़ाया जा रहा है. इससे पहले नोटबंदी के जरिये मोदी सरकार ने आयकर देने वालों की संख्या में इज़ाफा होने का दावा किया है. जब से केंद्र की कमान मोदी जी ने संभाली है तब ही से देश निजीकरण की ओर लम्बी-लम्बी छलांग लगा रहा है. मोदी सरकार कई सरकारी विभागों को निजीकरण एक साथ करने की तैयारी रही है. इसमें रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य, एयर इंडिया आदि शामिल हैं.

इसी साल के अगस्त माह की 28 तारीख को उद्योग तथा वाणिज्य मंत्रालय ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के बारें में ताबड़तोड़ घोषणा की है. जिसके सूची को देखकर यह अहसास होता है कि कभी एक ईस्ट इंडिया कंपनी के पैरों तले कुचले गये भारत में सैकड़ों ईस्ट इंडिया कंपनियों की शीघ्र ही आने वाली है. मिसाल के तौर पर खनिज एवं धातु और गैर-धातु अयस्कों की खोज, जिसमें हीरा, सोना, चांदी और कीमती अयस्क शामिल हैं, लेकिन टाइटेनियम के खनिजों और अयस्कों को छोड़कर; पावर प्रोजेक्ट, स्टील उद्योग तथा सीमेंट उद्योग के बिजली परियोजना के लिये कोयला तथा लिग्नाईट खनन के क्षेत्र में; चाय, काफी, रबर उत्पादन, इलाइची, पाम के पेड़ के वृक्षारोपण तथा जैतून के वृक्षारोपण में; फूलों की खेती, बागवानी, और सब्जियों तथा मशरूम की खेती, बीज एवं रोपण सामग्री के विकास तथा उत्पादन में, पशुपालन-मत्स्यपालन तथा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में; फूलों की खेती, बागवानी, और सब्जियों तथा मशरूम की खेती, बीज एवं रोपण सामग्री के विकास तथा उत्पादन में, पशुपालन-मत्स्यपालन तथा कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के उत्पादन तथा विपणन में; मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बिना सरकारी अनुमति के निवेश किया जा सकेगा.

इनके अलावा रक्षा उद्योग में 100 फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति है. लेकिन 49 फीसदी निवेश तक सरकारी अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी उससे ज्यादा के लिये सरकारी अनुमति आवश्यक है. सेवा क्षेत्र के प्रसारण के क्षेत्र में टेलीपोर्ट, डीटीएच, केबल नेटवर्क, मोबाईल टीवी के क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति. एफएम रेडियो तथा ‘समाचार और वर्तमान मामलों’ में टीवी चैनलों को जोड़ने के क्षेत्र में सरकारी अनुमति से 49 फीसदी लेकिन गैर-समाचार वाले टीवी चैनलों के लिये बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति की बात कही गई है. प्रिंट मीडिया तथा मैगजीन के क्षेत्र में सरकारी अनुमति से 26 फीसदी तथा विदेशी मैगजीन के लिये भी 26 फीसदी एफडीआई की सरकारी अनुमति से, विज्ञान तथा तकनीकी पत्रिका के क्षेत्र में सरकारी अनुमति से 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति की भी घोषणा की गई है.

एयरपोर्ट में ग्रीनफील्ड तथा मौजूदा परियोजनाओं के क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी, शेड्यूल घरेलू तथा क्षेत्रीय विमान सेवा के क्षेत्र में 100 फीसदी विदेशी निवेश जिसमें से 49 फीसदी तक के लिये सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी उससे ज्यादा के लिये सरकारी अनुमति की जरूरत है. लेकिन अप्रवासी भारतीयों के लिये 100 फीसदी बिना सरकारी अनुमति के नान शेड्यूल हवाई तथा हैलीकाप्टर सेवा के क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति से 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति. टाउनशिप, आवासीय / वाणिज्यिक परिसर का निर्माण, सड़कों या पुलों, होटल, रिसॉर्ट, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, मनोरंजन सुविधायें, शहर और क्षेत्रीय स्तर की बुनियादी ढांचे, टाउनशिप के निर्माण-विकास परियोजनाओँ में बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश. नये तथा मौजूदा इंडस्ट्रियल पार्क के क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति.

उपग्रह के स्थापना तथा संचालन के क्षेत्र में 100 फीसदी सरकारी अनुमति से. टेलीकाम सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति जिसमें से 49 फीसदी तक के लिये सरकारी अनुमति जरूरी नहीं. कैश एंड कैरी होलसेल ट्रेडिंग के क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी. ई-कॉमर्स के क्षेत्र में 100 फीसदी बिना सरकारी अनुमति के. मल्टीब्रांड रिटेल के क्षेत्र में सरकारी अनुमति से 51 फीसदी.
रेल्वे इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बिना सरकारी अनुमति के 100 फीसदी एफडीआई.

निजी बैंक के क्षेत्र में 74 फीसदी एफडीआई की अनुमति रहेगी जिसमें से 49 फीसदी तक के लिये सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं रहेगी. बैंकिंग, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तथा इसके सहयोगी बैंकों में सरकारी अनुमति से 20 फीसदी एफडीआई की अनुमति. इसके अलावा प्रतिभूति बाजार में इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में बिना सरकारी अनुमति के 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति. पेंशन सेक्टर में बिना सरकारी अनुमति के 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति. वाइट लेबल एटीएम ऑपरेशऩ जिसमें किसी बैंक का लोगो नहीं होगा उसमें 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति बिना सरकारी अनुमति के. दवा उद्योग के क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति जारी रहेगी.

इस तरह से मार्गरेट थैचर ने जिस निजीकरण की शुरुआत की थी तथा बुश ने जिस तरह से अमीरों को छूट देकर आम जनता पर टैक्स का बोझ लाद दिया था, मोदी युग में उसे भारत में बड़ी तेजी से अपनाया जा रहा है. अब अर्थव्यवस्था का बहुत की कम क्षेत्र बचा है जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है. इस तरह से भारत के द्वार विदेशी कंपनियों के लिये पूरी तरह से खोल दिये गये हैं. मुख्यतः सरकारों द्वारा देशी उद्योग-धंधों को बचाने के लिये महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देशी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तथा निजी कंपनियों को संरक्षण दिया जाता है. लेकिन,
अब स्थिति उलट गई है. ऐसी-ऐसी विदेशी कंपनियां हमारें देश में आयेंगी जिनका सालाना व्यापार तक हमारें देश के आम बजट से ज्यादा है. जाहिर है कि मामला बड़ी मछली द्वारा छोटी मछलियों को निगलने के बजाये मगरमच्छ द्वारा पानी में राज करने जैसी हो जायेगी.
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