लड़ाई सिर्फ हिंदू और मुसलमान की नहीं है.-संजीव खुदशाह

लड़ाई सिर्फ हिंदू और मुसलमान की नहीं है.-संजीव खुदशाह

7 सितम्बर 17

अगर उन्हें हिंदूओं की फिक्र होती तो हिंदू किसान आत्महत्या न करते

यदि उन्हें हिंदू बच्चों की फिक्र होती तो सैकड़ों बच्चे सरकारी अस्पतालों में मारे न जाते

क्यों उनका मुकद्दम कहता कि बच्चे पालना सरकार का काम नहीं ?

यकीन मानिए यह लड़ाई सिर्फ हिंदू और मुसलमान की नहीं है ।

 

यदि उन्हें दलित पिछड़े हिंदुओं की फिक्र होती तो वे आरक्षण का विरोध न करते

मारना दो थप्पड़, जो कहे उनके संगठन को हिंदूवादी

नहीं तो उस पर किसी एक जाति का एकाधिकार न होता,

यकीन मानिए यह लड़ाई सिर्फ हिंदू और मुसलमान की नहीं है ।

 

यदि उन्हे गाय की फिक्र होती, तो

वजीर की गौशाला में गौओं की मौत पर उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाता,

गौमाता से बलात्कार करने वाले, पंडित जी को सूली पर टांगा दिया जाता,

यकीन मानिए यह लड़ाई सिर्फ हिंदू और मुसलमान की नहीं है ।

 

यदि ऐसा होता तो एक एक हिंदू इसी हिंदूवाद के खिलाफ खड़ा ना होता

ना मारे जाते कलबुर्गी, पंसारे, दाभोलकर और गौरी लंकेश ,

यकीन मानिए यह लड़ाई सिर्फ हिंदू और  मुसलमान की नहीं है।

 

यह लड़ाई है आधुनिकता की रूढ़िवाद से

यह लड़ाई है विज्ञान की अंधविश्वास से

यह लड़ाई है समानता की भेदभाव से

यह लड़ाई है सच की झूठ से

यह लड़ाई है डेमोक्रेसी की तानाशाही से
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8 सितंबर 2017

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