सरकार के राम और राम की सरकार -नथमल शर्मा ,,ईवनिंग टाईम्स

सरकार के राम और राम की सरकार -नथमल शर्मा ,,ईवनिंग टाईम्स

नथमल शर्मा
(ईवनिंग टाइम्स में प्रकाशित आज शाम की बात )

26.8.17

बेटियों को मार देने वाले प्रदेश और बेटियों को बचाने वाली सरकारी योजनाओं वाले देश में दो बेटियाँ लड़ रही थी पंद्रह बरस से। लड़ाई एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ थी जो खुद को भगवान कहता । बहुत शक्तिशाली । सरकारें जिसके चरणों में झुकी पड़ी थी/है। हमारी मेहनत की कमाई के लाखों रूपये सरकार उस पर कुर्बान कर रही थी । ऐसे ताकतवर गुरमीत सिंह राम रहीम के खिलाफ़ लड़ने के लिए हौसला चाहिए । दो साध्वी बेटियाँ लड़ी और आज वह भगवान जेल में है । बलात्कार का दोषी पाया गया है ।
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया गया है । सीबीआई कोर्ट के स्पेशल जज जगदीप सिंह ने कल दोपहर ये आदेश दिए । हरियाणा में है डेरा सच्चा सौदा । बलात्कार का आरोप तय होते ही । सजा सुनाए जाने के कुछ मिनटों में ही पंचकुला में हिंसा भड़क उठी। इस हिंसा में 32 लोग मारे गए । कहें कि इन निर्दोष लोगों की हत्या कर दी उन्मादियों ने । इतना ही नहीं मीडिया पर भी हमला करते रहे उपद्रवी। सरकारी इमारतों को जलाते रहे। गाड़ियों में आग लगाते रहे । पुलिस पर पत्थर बरसाते रहे । कुछ घंटों के लिए वहां सरकार नाम की कोई चीज नहीं थी। कोई सुरक्षित नहीं था। पुलिस वाले अपनी जान बचाते भाग रहे थे । जांबाच पत्रकार अपनी जान जोखिम में डाल कर इसे दिखा रहे थे । पूरे देश ने देखा । न्यायालय ने भी संज्ञान लिया और दो घंटे बाद ही आदेश दिया कि डेरे की संपत्ति जब्त कर ली जाए। जिनका भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई इसी से की जाए। हरियाणा के मुख्यमंत्री की अपील का भी कोई असर नहीं हुआ । हरियाणा,पंजाब,राजस्थान और दिल्ली राज्य के कुछ शहर जलते रहे । बहुत कुछ जल जाने के बाद हालात काबू में हुए । तब तक 32 लोग मारे जा चुके थे । करोड़ों की संपत्ति जल चुकी थी। बलात्कारी बाबा को जेल (आरामदेह ) भेजा चुका था । पीने के लिए बिसलेरी भी उपलब्ध कराई जा चुकी थी। अंधी आस्था अपना काम कर चुकी थी। सरकारें ये सब होते देखती रहीं । राजनीतिक दलों को शब्द नहीं मिल रहे थे कि क्या कहें । ज्यादातर दल बाबा की चरण-रज प्राप्त कर चुके थे। एक सांसद साक्षी महाराज को
*सिर्फ एक* महिला की शिकायत पर न्यायालय का फैसला ठीक नहीं लगा । महाराज ने कहा करोड़ों समर्थक हैं बाबा के। महाराज ने तो कोर्ट के फैसले को भारतीय संस्कृति को बदनाम करने वाला भी कह दिया ।महाराज संसद के सदस्य हैं । जो लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है। जहां से कानून भी बनते हैं । यह देश कानून से ही चलता है । संविधान की इसी ताकत के बल पर सीबीआई स्पेशल जज ने करोड़ों अनुयायियों वाले बाबा को सजा सुनाई । हरियाणा और बाकी राज्यों में हिंसा होती रही । देश के गृहमंत्री भी हालात पर “नज़र ” रखे हुए थे । बहुत जल्दी ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री का ट्वीट बहुत देर बाद आया । एक मुख्यमंत्री के इस्तीफे पर सिर्फ पांच मिनट में ट्वीट आया था । राजनीति में प्राथमिकताएं बदलते रहती हैं ।
रात तक सब कुछ काबू में था । मारे गए लोगों के घरों में मातम था। कभी पार्षद तक नहीं रहे व्यक्ति (स्वयंसेवक ) को हरियाणा के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी । जिम्मेदारी मिलते ही वह अपनी पूरी सरकार के साथ बाबा राम रहीम के चरणों में लोट आया था । हमारी मेहनत की कमाई के इंक्यावन लाख रुपये *भेंट* चढाकर बहुत बहुत विनम्र आभार व्यक्त कर आया था । उस मुख्यमंत्री के राज में उसी बाबा को बलात्कार का दोषी पाया गया । सजा हो गई । और भीड़ ने निर्दोष 32 लोगों को मार दिया । राज्य चलाने के लिए विधायक,सांसद होना जरूरी नहीं । स्वयंसेवक में सारे गुण होते हैं । पूरा देश कल ये गुण और उसके परिणाम देख रहा था । सरकार को दिन,स्थान और समय पता था । वहां धारा 144 लागू होने के बावजूद लाखों लोग इकट्ठा हो रहे थे । सब कुछ सरकार की नज़र और जानकारी में था । फिर भी हिंसा होती रही,तो इसे होने दी गई ही कहा जाएगा । इसके पहले एक और बाबा रामपाल को गिरफ्तार करने में पचास करोड़ खर्च हो गया था सरकार का।
अब इस मामले की जांच होगी । मृतकों के परिजनों को और घायलों को मुआवजा दिया जाएगा । एक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने 15 बरस पहले ये मामला उजागर कर दिया था । दोनों साध्वी बहनों के पत्र को भी अपने अख़बार में छापा था । उसकी इस *गुस्ताखी* की सजा मिली और अक्टूबर 2002 में रामचंद्र की हत्या कर दी गई । उस समय तक राम रहीम को डेरा प्रमुख की गद्दी सम्हाले बारह बरस हो चुके थे । राम की कृपा से संसद में जय श्रीराम गूंज उठा था । अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री थे। दोनों बहनों ने उन्हें चिट्ठी लिखी । इसकी प्रति न्यायालय को भेजी और पत्रकार रामचंद्र को भी । रामचंद्र ने खबर छापी। न्यायालय ने मामला संज्ञान में लिया । सीबीआई को जांच का आदेश दिया । प्रधानमंत्री कार्यालय से दोनों बहनों को उनके पत्र का जवाब भी नहीं मिला । बहुत देर से फैसला आया पर न्याय मिला।
यह न्याय अंधी आस्था रखने वालों को पसंद नहीं आना था । इसलिए भड़क गए । जिसे हम भगवान मानते हैं उसे बलात्कारी ! घोर अन्याय । संविधान से चलने वाले हमारे देश में बरसों से ही आस्था का खेल भी चल रहा है । एक मंदिर के लिए आस्था संविधान से परे है । पूरा देश आस्था के ठेकेदारों के छोटे छोटे द्वीप में बंट गया है । कहीं डेरे के प्रति आस्था तो कहीं आसाराम के प्रति । कहीं पिच को खोद देने वालों और पाकिस्तानी खिलाड़ियों,गायकों को आने से रोकने वालों के प्रति आस्था । कहीं गाय के प्रति तो कहीं आश्रम के प्रति आस्था । हमारी आस्था जितनी मजबूत होती गई हम उतने ही संवेदनहीन होते गए। हर शहर में करोड़ों की लागत से मंदिर चमचमाते गए और बिलकुल पास की बहुत जर्जर स्कूल में बच्चे जिंदगी का सबक पढ़ते रहे । सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य की एकदम बुनियादी जिम्मेदारी से खुद को दूर कर लिया । सब निजी क्षेत्र के आस्थावानों को सौंप दिया । ये आस्थावान ही मंदिरों,डेरों में चढावे चढ़ाते रहे । स्कूलों में फीस बढ़ती रही । इलाज बहुत महंगा होते रहा । हम अपने सपनों को मरते देखते रहे और आस्था मज़बूत करते रहे । कर रहे हैं । ऐसे में कोई दो बहनें आगे आती है । लड़ती है । एक पत्रकार साथ देता है ।मारा जाता है । हम उनके हौसले को सलाम करते हैं । मज़बूत होती आस्था और बढ़ती संवेदनहीनता पर चिंता भी। चिंता राजनीति भी। कर रही लेकिन अगली बार सरकार फिर कैसे बने या ये सरकार कैसे जाए और हम फिर आएं। राजनीति इसके लिए नए डेरों,नए बाबाओं और मजबूत कार्पोरेट की चरण-रज की तलाश भी कर लेगी। हम फिर अपनी आस्था को अपने विवेक पर हावी होने देंगे और ईवीएम की किसी बटन को दबा आएंगे । उंगलियों में अमिट स्याही लगवा कर लौटते हुए फिर पांच बरस के लिए मंदिरों,डेरों में भजन गाते रहेंगे । अगली बार फिर किसी बेटी के आगे आने और किसी पत्रकार के मारे जाने तक। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के संवाहक हैं । हम आस्थावान हैं । हम राजनीति को पसंद नहीं करते । हम बहुत शांतिप्रिय लोग हैं । राजनीति को हमारी इस समझ पर सुकून है और हमारी इसी समझ से उनकी कुर्सियां सलामत रहती है । डेरे मज़बूत होते हैं ।

नथमल शर्मा
(ईवनिंग टाइम्स में प्रकाशित आज शाम की बात )

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