थानों में कान्हा और सड़कों पर नमाज़—नथमल शर्मा (ईवनिंग टाइम्स

थानों में कान्हा और सड़कों पर नमाज़—नथमल शर्मा (ईवनिंग टाइम्स

 

नथमल शर्मा

ईवनिंग टाइम्स में प्रकाशित आज शाम की बात

 

18.8.17

अब *सवाल* खड़े करता *उत्तर* प्रदेश सबसे बड़ी प्रयोगशाला में तब्दील हो रहा है । गुजरात की अपार सफलता के बाद उत्तर प्रदेश की विराट सफलता से हौसले बुलंद हैं । बिना इलाज के बच्चे मरते हैं । रूदन ज्यादा दिनों तक चलना ठीक नहीं । अच्छे दिन (वो वाले नहीं,वो तो जुमला था ) आने चाहिए । ऐसे में भजन भाव भी जरूरी है । आखिर प्रार्थना में ही तो बड़ी ताकत होती है । कांवड़ यात्रा में डीजे बजाए जाने पर आपत्ति लेने वालों को सोचना चाहिए । नाचते-गाते चलने से और अच्छे से मन लगा रहता है ।

बात दरअसल यह हुई कि कुछ लोगों ने शिकायत कर दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से । यह कि कांवड़ यात्रा में डीजे ना बजाया जाए। योगी को यह बात पसंद नहीं आई। इंकार कर दिया । यह भी कहा कि जब सड़कों पर नमाज़ हो सकती है ,थानों में जन्माष्टमी मनाई जा सकती है तो कांवड़ यात्रा धूमधाम से निकाले जाने में क्यों आपत्ति होनी चाहिए ।

एकबारगी यह बात ठीक ही लग रही है । लेकिन एक लोकतांत्रिक गणराज्य का मुख्यमंत्री जब यह कहे तो निश्चित रूप से सोचने और चिंता करने की ही बात है । हम किसी मंदिर ,मस्जिद, गुरूद्वारा या चर्च से संचालित नहीं होते। यह देश संविधान की धाराओं से चलता है । और संविधान के अनुसार राज्य का कोई धर्म नहीं होगा । धर्मनिरपेक्षता को स्वीकार करते हुए प्रत्येक नागरिक को अपना धर्म चुनने की आजादी दी है संविधान ने। जाहिर है सभी थाने किसी की निजी मिल्कियत नहीं है । सरकार के है । थाने ही नहीं कलेक्टर कार्यालयों सहित सभी शासकीय कार्यालय,सभी सरकारी स्कूल,कालेज,कारखाने,वैज्ञानिक संस्थान । ये सभी किसी के निजी मालिकाना हक में नहीं है .

इसमें प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री से लेकर सभी मंत्रियों,सांसदों,
विधायकों के शासकीय आवास भी शामिल हैं । जाहिर है अगर इन पदों पर हैं तो संविधान की मर्यादा में ही रहना होगा । हालांकि संविधान की मर्यादा में प्रत्येक नागरिक को रहना है । लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से और ज्यादा जिम्मेदारी तथा संवेदनशीलता की अपेक्षा की ही जाती है । इसलिए जब एक प्रदेश का मुख्यमंत्री एक धार्मिक मांग को स्वीकार करते हुए दूसरे धार्मिक मामले का उदाहरण दे तो यह बहुत भयावह संकेत है । भारत विविधताओं का देश है और यही इसकी खूबसूरती और शक्ति भी है । यह बात भी दीवार पर लिखी इबारत की तरह साफ़ है कि आज के राजनीतिक सरमाएदारों का झुकाव देश के बहुसंख्यक वर्ग के पक्ष में है ।

बिहार के चुनाव में ऐसा साफ़ कहा भी गया कि हम जीत गए तो तुम पाकिस्तान चले जाना । हालांकि वे जीते नहीं । पर आज वे ही वहां राज कर रहे हैं । उत्तर प्रदेश और बिहार में राज भाजपा का ही है पर बिहार में चेहरा दूसरा है।

बहरहाल यह तो साफ है कि अल्पसंख्यकों के लिए जगह सिमटते जा रही है । अल्पसंख्यकों में भी पहला निशाना मुस्लिम ही है । (कांग्रेस पर आरोप लगता है कि उसने मुस्लिम तुस्टीकरण की राजनीति की। जो कि एक हद तक सही भी है । ) आज देश की राजनीति के केंद्र में खेत – खलिहान, किसान, मजदूर , युवा,महिलाएं, विज्ञान,शिक्षा,स्वास्थ्य,
भ्रष्टाचार जैसे जरूरी मुद्दे नहीं है । आज तो गाय, गोबर पर देश में केंद्रीय बहस है। अजान की आवाज़ और कांवड़ यात्रा में डीजे बजाना है या नहीं जरूरी सवाल की तरह हो गया है । एक मुख्यमंत्री का सवाल के जवाब में सवाल उछाला जाना कि थानों में जन्माष्टमी और सड़कों पर नमाज़ । यह आने वाले उनके अच्छे दिनों और बाकी के भयावह खतरे का ही तो संकेत है ।

संविधान की धाराएं तो गंगा – जमुना की धाराओं से ही निकली है । जिन धाराओं में यह देश बह रहा है । सारी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भाईचारे और सद्भाव के सुकून के साथ । इसलिए कि केसरिया,हरे या किसी भी रंग के खतरे को ये धाराएं धो देती है । यही भरोसा तो भारत को भारत बनाए रखता है और आज इसी भरोसे पर चोट करने की कोशिश की जा रही है ।

राजनीति बहुत निर्मम होती है । यह बार- बार झूठ बोलती और गढ़ती है । जाहिर है इसमें सभी दल बराबरी के भागीदार है । कोई दलित तो कोई मुस्लिम और कोई हिंदू के पसीने से अपनी कुर्सी की पालिश चमका रहा है । भारतीय की बात कोई दल नहीं करता हालांकि अपने नाम में सबने भारतीय जोड़ रखा है । दलों के दलदल में आम आदमी लगातार धंसते ही जा रहा है । उसके खेत सूखे या बाढ़ मे डूबे हैं । बिना इलाज के उसके बच्चे मर रहे हैं । पढ़ने के लिए जर्जर स्कूल हैं जिनमें शिक्षक नहीं । उसके पढ़े लिखे बच्चे बेरोजगार हैं । उसके फैसले न्यायालयों में बरसों से लंबित है । उसके शहर में गंदगी पसरी पड़ी है । ऐसे हालात में उसे सिखाया जा रहा है कांवर यात्रा निकालो धूमधाम से । सब ठीक हो जाएगा । तुम्हारे सवालों से नहीं भजनों से हमारी कुर्सियां मजबूत होती है । तुम्हारी जिंदगी को संवारने के लिए हम लड़ रहे हैं । तुम भजन करो। नमाज़ भी। सवाल करोगे तो जवाब नहीं तीखे सवाल उछाले जाएंगे ।
निदा फाजली की बात याद आती है-

गिरजा में मंदिरों में अजानों में बंट गया
होते ही सुबह आदमी
खानों में बंट गया ।। ‘

-नथमल शर्मा
(ईवनिंग टाइम्स में प्रकाशित आज शाम की बात )

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