जिन्दगी हसीन है …,बहुत ..-ज़हीन सिंह *अभिव्यक्ति  3

जिन्दगी हसीन है …,बहुत ..-ज़हीन सिंह *अभिव्यक्ति 3

 

# ज़हीन सिंह
अभिव्यक्ति -3

जिन्दगी हसीन है …,बहुत ..
*
ठप ठप वारिश की बूँदें ,जमीन पर गिरकर फैल जाती है .
वो अपने आप को ज़मीन की मिट्टी में घुलकर ,.सुगंध एक बन जाती हैं.
सरसराती हवा जब कानों में यह कह जाती है ,
उठो ,बढो ,गिरो ,दोडो पर रुको नहीं जिन्दगी में ,
तब लगता है, ज़िन्दगी हसीन है .
कभी घर की चार दीवारों से बाहर निकल कर
तो देखो .
कभी व्यस्त भरी दैनिक कार्योँ को छोडकर तो देखो .॥यह प्रकृति हमें कितना कुछ सिखाती हैं.
चिडियों की चहचहाहट ,चीटियों की एकाग्रता .
हमें नये पाठ पढाती है .
ज़िंदगी कितनी हसीन है ,प्रकृति हमें बताती है .
मत थको दुनियाँ के हमलो से .
मत बैर करो अपने भाई बन्धु ,पडोसियों से.
मत हारो खुद से दुनियाँ की मजबूरी से.
कोशिश का एक कदम बढाओ ,बंकि के कदम
बढते देर नहीं लगेगी .
अपने आप को पहचानो ,अपने हुऩर को तराशो,
उठ खड़े हो ,
यह ह़सीन दुनियाँ तुम्हारा इंतज़ार कर रही हैं.
अपने गौरव का इंतजार कर रही है .
सोचो जब इन्सान चाँद पर जा पहुँचा ,
क्या तुम्हारे सपने नहीं पहुच सकते .
देर न कर ,उठ खड़े हो,
मन में खुद के प्रति विश्वास ही ,दिलायेगा मंजिल आपकी .
लेकिन तब भी भूलना नहीं , जिंदगी बड़ी हसीन हैं .

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2 .7.17 चिरमिरी 

 

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