दस महीने बाद भी सामाजिक कार्यकर्ताओ के पुतले जलाने वालो को नहीं खोज पाये कलेक्टर ; कमिश्नर को भेजी रिपोर्ट .

दस महीने बाद भी सामाजिक कार्यकर्ताओ के पुतले जलाने वालो को नहीं खोज पाये कलेक्टर ; कमिश्नर को भेजी रिपोर्ट .

10 अगस्त 2017

दस महीने पहले जगदलपुर में सुरक्षा बलों से पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओ के पुतले जलाये थे और नारेबाजी की थी ,निश्चित ही यह सर्विस कंडेक्ट रुल के खिलाफ तो तो था ही लेकिन समाज में कम करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ताओ और पत्रकारों के जीवन को खातरे में डालने का भी प्रयास था ,यह मुद्दा सभी पत्र पत्रिकाओ और न्यूज़ चैनल में छाया रहा , जिनकी जिमेदारी लोगो के जीवन सुरक्षा की होती है वो लोग कैसे इस तरह के आन्दोलन कर सकते हैं .
इस पुतला दहन में जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक प्रोफ़ेसर नंदिनी सुन्दर ,पत्रकार मालिनी .दंतेवाडा में लम्बे समय तक काम करनेवाले मानव अधिकार कार्यकर्त्ता हिमांशु कुमार ,दंतेवाडा की आदिवासी नेता सोनी सोरी के पुतले जलाये गए और इनके खिलाफ नारे भीं लगाये गए ,
इस प्रकरण की जाँच के लिए कमिश्नर बस्तर को जाँच सोम्पी गई .जिसमे यह नहीं बताया गया की कोन कोन सैनिक इस प्रदर्शन में शामिल था, यह नहीं मालूम पड़ा है , लेकिन यह मन गया ही की प्रदर्शन और पुतला दहन जरुर किया गया था .
कलेक्टरों ने यह उल्लेख किया है की उन्होंने घटना स्थल का मुआयना किया और लोगो ने बयां भी लिया हैं .
पत्रिका लिखता है कि पिछले वर्ष अक्टूम्बर में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत करके 2011 में पुलिस द्वारा ताडमेटला और आसपास के गाँव में 250 घरो को जला देने की बात मानी थी .इसके बाद बस्तर के सभी जिलो में सहायक आरक्षको में सामाजिक कार्यकर्ताओ और पत्रकारों के खिलाफ प्रदर्शन किया और उन्हें माओवादी समर्थक बताया गया और उनका पुतला जलाया गया .इसके बाद ही एसपी आरएन दास और आईजी एसआरपी कल्लूरी निशाने पर आ गए थे .
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