आदिवासी छात्राओं के साथ संगठित बर्बरता-लिंगा राम  कोडपी

आदिवासी छात्राओं के साथ संगठित बर्बरता-लिंगा राम कोडपी

दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के पालनार की घटना

** कोयतुर पत्रकार लिंगा कोड़ोपी
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8अगस्त 17

चलिये मैं आप लोगों को एक कहानी सुनाता हूं, एक देश हैं जहां 8 प्रतिशत आदीवासी लोग रहते हैं । इस देश में आदीवासीयों की सुनने वाला कोई नही ।

जी हां मैं भारत देश के छत्तीसगंढ़ राज्य के दंन्तेवाड़ा जिला की बात कर रहा हूं , इस जिले में एक गाँव है, इस गांव का नाम पालनार हैं । इस गाँव में एक कन्या छात्रावास हैं, यहा 500 आदीवासी छात्राएं पढ़ती हैं । इस छात्रावास में पहली से नौ वी तक की पढ़ाई होती हैं । इस छात्रावास में छः साल से लेकर सत्रह साल की कन्याएं पढ़ाई करती हैं ।

इस छात्रावास में कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ । इस कार्यक्रम का नाम था सुरक्षा बलों के साथ बस्तर की महिलाओं का अनोखा रिश्ता , अर्ताथ रंक्षाबंधन ।

यह कार्यक्रम 31 जुलाई दिन सोमवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक करवाया गया । इस कार्यक्रम में क्या हुआ आप जानकर हैरान होगें ।यह कार्यक्रम सुरंक्षा बलों की १११ वी बटालियन के साथ था ।यह कार्यक्रम जिस छात्रावास में हुआ उस छात्रावास का नाम है गुरूकुल कन्या आवासीय विध्यालय पालनार ( पोटाकेबिन ) इस छात्रावास की अधिक्षीका का नाम है, द्रोपदी सिन्हा यह रहने वाली पालनार की हैं । उस कार्यक्रम मे बच्चों के साथ जो हुआं उस बात को दंन्तेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार और पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप जानते है कि घटना क्या हैं ।

इस घटना में 16 बच्चों के साथ छेड़छाड़ हुआ है । इस कार्यक्रम को 7 जुलाई को आई. बी. सी. 24 में सुबह 8 बजे प्रकाशित किया गया हैं । आप सब ने देखा होगा कि कार्यक्रम क्या था ।सवाल तो आई.बी.सी 24 समाचार चैनल पर भी उठता है, कि कन्या छात्रावास में यह कार्यक्रम रंक्षाबंधन से पहले क्यों करवाया गया ? कार्यक्रम करवाना था, तो खुले में करवा सकते थे हास्टल के अंदर करवाने का क्या अर्थ था ? किस कानून के तहत बच्चों को कार्यक्रम के दौरान डान्स करवाया गया ? बच्चों का डान्स देखने वाले दर्शक कौन थे , 111 बटालियन के अधिकारी और जवान

सुरंक्षा बलों को बस्तर में क्यों तैनात किया गया स्कूली बच्चों का डान्स देखने के लिए या नक्सल समस्या के निवारण के लिए । उस छात्रावास में पढ़ने वाली हर बच्ची इस देश की बेटी है, बहन हैं । इस घटना को परिवार के सदस्यों , पंत्रकोरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को बोलने से सक्त मना किया गया हैं । बच्चों को यह भी धमकी दिया गया है कि इस घटना के बारे में जानकारी दिया गया तो उन बच्चों का दाखिला किसी भी स्कूल या छात्रावास में नहीं होगा .

सुरंक्षा बलों ने किस कानून के तहत उस कन्या छात्रावास में कार्यक्रम किया ? आखिर कार्यक्रम करने का आदेश किसने दिया ? घटना की जानकारी मिलने के बाद जिले के एसपी और कलेक्टर ने क्या किया ? पुलिस अधीक्षक से किसी पंत्रकार ने पुछा इस घटना के विषय में तो अधीक्षक महोदय का कहना था कि अंजान लोगों पर प्रथम सुचना रिपोर्ट दर्ज किया गया हैं । यह जानकारी कहां तक सही हैं पता नही , लेकिन अगर प्रथम सुचना रिपोर्ट दर्ज हुई है तो सुरक्षा बल के 111 बटालियन के उपर होना था, क्यों की यह पुरी घटना 111 बटालियन के मौजूदगी में हुई हैं ।

मेरी जानकारी में एक – एक बच्चे का जूते उतरवाये गये, पैर से लेकर सर तक तलाशी के नाम पर स्पर्श ( शरीर को दबाया गया ) ।बच्चे द्वारा इस घटना का विरोध करने पर गोली मारने की बात कही गयी ।

ये है हमारी बस्तर में रंक्षा के लिए आये हुए सुरंक्षा बल । मेरे लिये तो सारे बच्चें बहन हैं और बस्तर का भविष्य भी । हम इनके न्याय के लिए लड़ेगें जो अपराधी हैं उसे दंड़ित करे बगैर शान्ती से नहीं बैठा जायेगा । जिले के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर भी दोषी पाये गये तो उन पर कार्यवाही होगी ।

हिमाशु कुमार ने जो रिफोर्ट फेसबुक में लिखा है वह सत्य तथ्यों पर आधारित हैं, वे कोई सुरंक्षा बलों को बदनाम या बस्तर में शान्ती भंग करने के लियें नही लिख रहे हैं, बल्की इसलिए लिखा जा रहा है ताकि बस्तर मे कानून का पालन हो और आदीवासीयों के सविधानीक अधीकारों को प्रशासन मान्यता दे । कल भूतपूर्व विधायक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मनीष कुजाम गुरूकुल कन्या आवासीय विध्यालय का भ्रमण करने गये थे, उनसे यह सवाल किया गया की वे किनके आदेश पर आये है । चाहे सोनी सोढ़ी हो या मनीष कुजांम ये बस्तर के स्थानीय प्रतीनिधी है ।

बस्तर में किसी घटना की जांच करनी हो तो जिलाधीश कलेक्टर महोदय की अनूमती लेनी होगी । कलेक्टर कौन है ? आदीवासीयों और आमनागरिकों का सेवक या मालिक? यह घटना गुरूकुल कन्या आवासीय विध्यालय के बच्चों के साथ नही बल्की कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की बेटी बहन के साथ होना था ताकि य़े महसूस करते की बहन बेटी के साथ जब सुरंक्षा बल इस प्रकार का कृत्य करते है तो क्या महसूस होता हैं।

मैं जो लिख रहा हूं होश में रह कर लिख रहा हूं सुरक्षा बलो से डरता नही हुं और न ही कभी डरूगा । पुलिस या प्रशासन का गुलाम नही हूं बगैर सबूत का कोई बात लिखता हुं और न ही बोलता हूं। सत्य परेशान हो सकता हैं” पराजित नही । आदीवासीयों को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं ।
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कोयतुर पत्रकार लिंगा कोड़ोपी के कलम से

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