आत्महत्या किये किसानों के परिजनों ने कर्ज से आत्महत्या को विस्तार से सबूतों के साथ बताया, कृषि मंत्री को अपनी व्यथा बताई

आज छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ द्वारा प्रदेश में कर्ज की वजह से आत्महत्या किये किसानों के परिजनों की रायपुर में पत्रकार वार्ता हुई । पत्रकार वार्ता में मोखा के मन्थीर सिंह ध्रुव की पत्नी और पुत्र मोहन, ग्राम जामगांव बागबाहरा के हीराधर निषाद की पत्नी मवंती निषाद बेटा फुलेश्वर निषाद और धमतरी जिला के ग्राम बगदेही के चंद्रहास साहू की पत्नी लक्ष्मी साहू एवं उनकी 6 पुत्रियां उपस्थित थी । 

आज पत्रकारों के समक्ष इन तीनों परिवार के परिजनों ने अपने मुखिया द्वारा बढ़ते कर्ज और आर्थिक तंगी की वजह से आत्महत्या की घटना को विस्तार से बताया । इस दौरान माहौल बेहद गमगीन हो गया था जब स्वर्गीय चंद्रहास साहू की पत्नी लक्ष्मी ने अपने पति की याद करते हुए खर्च का विवरण दिया ।  उन्होंने बताया कि पति के ऊपर लगभग रु 4.81लाख का कर्ज बैंक सहित साहूकारों के माध्यम से हो चुका था ।  लेकिन उन्होंने खेती में ही सारा ध्यान लगाकर रखा था ताकि खेती के माध्यम से वह कर्ज का भुगतान कर सके लेकिन लगातार बर्बाद होती फसल और बढ़ते घाटे की वजह से इस वर्ष उनके लिए बैंक का कर्जा चुका पाना संभव नहीं हो सका । आखिरी कुछ दिनों में उन्होंने अपने रिश्तेदारों से ₹30000 का कर्ज लेकर केसीसी प्रारंभ करने का प्रयास किया लेकिन वह पैसा भी उन्हें कोई दे ना सका ।  जिससे अंततः हताश होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली । 17 साल की बेटी फुलेश्वरी ने बताया कि वह नर्सिंग कालेज प्रथम वर्ष में पढ़ती है लेकिन फ़ीस के लिये रु 1.20 लाख का कर्ज अब कहाँ से चुकेगा और शेष वर्षों के लिये फ़ीस की व्यवस्था कैसे होगी ?  उसके पिता अपनी बेटियों की शादी को लेकर भी चिंतित रहा करते थे । उनकी छोटी बेटी खिलेश्वरी ने बताया कि वह अपनी शिक्षा पूरी करना चाहती है लेकिन अब आर्थिक संकट गंभीर होता नजर आ रहा है ।

मंथीर सिंह ध्रुव के बेटे मोहन सिंह ने बताया कि पिता कर्ज को लेकर बेहद परेशान थे और आखरी कुछ दिनों से गुमसुम थे   उन्होंने इस गर्मी में 7.50 एकड़ में धान की फसल लगाई थी । अपने एकलौते बोर में पानी खत्म होने पर उन्होंने फसल को बचाने के लिए दूसरा बोर करवाया, लेकिन वह भी असफल हो गया । अंततः उनकी पूरी फसल चौपट हो गई इससे आगामी खरीफ फसल के लिए पानी की व्यवस्था  कैसे हो, उसको लेकर बहुत चिंतित है क्योंकि पंजाब नेशनल बैंक से ही उनके ऊपर रु. 2.80 लाख का कर्ज चढ़ा हुआ था और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर कुल कर्ज 4 लाख के ऊपर जा चुका था । फसल की बर्बादी और कर्ज  ना चुका पाने के कारण उन्होंने सुबह स 22जून फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली ।

हिराधर निषाद के पुत्र फुलेश्वर ने बताया कि पिता के उपर करीब तीस हजार का कर्ज था । सिर्फ 1.50 भूमि से खेती करनेवाले हीराधर ने बोर करवा रखा था । लेकिन अस्थायी बिजली कनेक्शन का रु 3100 का बिल ना पटा सकने और बैल बेचने के बाद पैसा नही मिलने पर आत्महत्या कर ली ।

पत्रवार्ता के पश्चात छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के द्वारिका साहू, रूपन चन्द्राकर, पप्पू कोसरे, दुर्गा झा संकेत ठाकुर, श्रवणचन्द्राकर, संजय यादव, पुरषोत्तम चन्द्राकर, शकील खान, तेजराम विद्रोही, घनश्याम ,  संतोष चन्द्राकर, लक्ष्मी नारायण आदि के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों को कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के निवास ले जाया गया ।  जहां लगभग डेढ़ घण्टा इंतजार करवाने के बाद कृषि मंत्री से मुलाकात हो पाई । 
कृषि मंत्री को ने तीनों परिवारों ने कर्ज की वजह से उनके मुखिया द्वारा आत्महत्या होने की बात को विस्तार से बताया ।  किसान नेताओं ने कृषि मंत्री से छत्तीसगढ़ के समस्त किसानो के कर्जा माफी,   धन पर रु 300 बोनस सहित तमाम वादों को पूरा करने की मांग  की ।  कृषि मंत्री ने अपनी बोनस, कर्जा माफ़ी की मांग को मुख्यमंत्री तक एवम मंत्रिपरिषद की बैठक में चर्चा करने का आश्वासन दिया । 

आत्महत्या किये किसानों की पीड़ा को समझते हुए स्वेच्छा अनुदान से  रु 25000 तीनो आत्महत्या पीड़ित किसान परिवार को देने,  बच्चों के शिक्षण की जवाबदारी लेने की और पीड़ित परिवारों को खेती हेतु बीज, खाद दवा निशुल्क उपलब्ध करवाने की घोषणा की । स्वेच्छानुदान की राशि का तीनो परिवारों को जिसे घोषणा के आधे घण्टे के बाद वितरित कर दिया गया । 

छत्तीसगढ़ किसान महासंघ ने कृषि मंत्री के सामने अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई कि भाजपा के नेतागण, मुख्यमंत्री, किसान मोर्चा अध्यक्ष आदि कर्ज से आत्महत्या का नकारते रहे हैं । आज इन किसान परिवारों से मिलने के बाद अब तो उन्हें सच्चाई को स्वीकार करना चाहिये और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दें ।

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छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ

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