दस्तक में आज प्रस्तुत

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1 अगस्त 17

आज प्रस्तुत हैं *वंदना गोपाल शर्मा “शैली”* की तीन कविताएँ । वंदना का एक कहानी संग्रह “अहसास प्रेम का ” शीर्षक से और
एक कविता संग्रह *”आने की आहट “* प्रकाशित हो चुका है ।
वंदना की रुचि आलेख व कहानियाँ मे ज्यादा है ! अकादमिक शिक्षा प्राप्ति जे अन्तर्गत्त वे
मनोविज्ञान और हिन्दी साहित्य मे परास्नातक हैं । उनका मायका– संस्कारधानी राजनांदगाँव में है और
ससुराल–भाटापारा में है । वैसे उनका जन्म स्थान औऱ-ननिहाल नागपुर में है । वंदना की कविताओं का नियमित प्रसारण आकाशवाणी से होता है । वर्तमान में वे भाटापारा मे निवासरत हैं ।

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1⃣ *आस्था*
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मेरे जीवन मे
क्षण-प्रतिक्षण
विश्राम काल आता है
उन दिनों संघर्ष
चलता है
शायद
भगवान भी रूठ जाता है
क्योंकि
भगवान को भी छूना
वर्जित होता है !
यह विश्राम काल
प्रतिमाह आ जाता है
यह लंबे अंतराल मे
क्यूँ नही आता …?
हर नारी प्रतीक्षा करती है ,
ईश्वर प्रदत्त फल की
अंतराल चाहता है
फल की चाह!
‘माँ ‘ का दर्जा मिलता है
लेकिन
मेरे जीवन मे प्रतिमाह
विश्राम काल क्यूँ
आता है …?
चार दिन का संघर्ष
अवसर खो देता है
फल प्राप्ति का
व्याकुल मन खटखटाता है,
मंदिर का द्वार…
आस्था की चादर ओढे
सुनी गोद मे फल की
चाह लिए! !

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2⃣ *शिशु की भूख*
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“कितने ही प्राणी
सोते है प्लेटफार्म पर
मैने देखा है …
रेलवे स्टेशन पर!
रात के घुप्प अंधेरे मे
एक नन्हा शिशु …
रो रहा था
वह भूखा था
ढून्ढ रहा था
माँ का स्तन …
मैने देखा है
रेलवे स्टेशन पर ,
दूर ही पड़ी ठंड से ठिठूरती माँ
ना जाने कब लंबी नींद मे सो गयी …
बच्चे के लिए मुश्किल था ,
ढून्ढ पाना माँ को …
पौ फटते ही वह
सरपट भागता घूटनो के बल
जा पहुँचा माँ के समीप
और
माँ के स्तन से चिपक जाता है,
नही समझ पाता कि …माँ
ठिठूरती ठंड मे उससे
बहुत दूर जा चुकी है ।

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3⃣ *हम क्यूँ भूल जाते हैं*

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हम क्यों भूल जाते है …
गंगा की बहन यमुना को
हम क्यों भूल जाते है …?
सीता की बहन उर्मिला को ,
हम गंगा की पवित्रता याद रखते है …
और भूल जाते है यमुना को
जिसका सबसे अधिक दोहन होता है ,
और जल साँवरे से ,काला
दिखने लगता है …
हम सीता को सदा याद रखते है ,
और
भूल जाते है उर्मिला को …
जिसने अपने पति लक्ष्मण को
खुशी -खुशी विदा किया था ,
राम के साथ वनवास के लिए …
और संयम की प्रतिमूर्ति बनीं थी !!”

 

*वंदना गोपाल शर्मा “शैली “*
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