नर्मदा संस्कृति संवाद, अक्टूबर 7 – 8, – एक आमंत्रण*

*#नर्मदा_संस्कृति #NarmadaSanskriti*

*

साथियों,

ज़िंदाबाद !

नर्मदा एक नदी, एक जीवन, एक सभ्यता, एक संस्कृति, एक आस्था का नाम है । करोड़ों की भावनाएँ जुड़ी है । मानव जीवन का इतिहास छुपा है यहाँ – अतीत और वर्तमान दोनों । इंदिरा सागर बाँध की डूब में सिर्फ़ हरसूद शहर नहीं डूबा था, उसके साथ एक पूरी संस्कृति डूबी थी । आज सरदार सरोवर के 214 किमी के जलाशय के डूब क्षेत्र में 192 गाँव, एक शहर के अलावे हज़ारों मंदिर, मस्जिद, जैन धर्म स्थल, आदिवासियों के देव स्थल और आम लोगों की आस्थाओं से जुड़े, ऐतिहासिक महत्व की कई वस्तुएँ हैं । पुरातत्व विभाग के अनुसार प्राचीन और पाषाण युग के कई अवशेष, मौर्य और परमार काल के और साथ ही पूरे ऐशिया महादेश में पहले मानव के होने की बात भी साबित हुई है । आज भी खुदाई जारी है और अनुसंधान भी ।

हर साल नर्मदा यात्रा, अमरकण्टक से लेकर भरूच तक, में लाखों शामिल होते हैं और उसकी आस्था से जुड़ी होने के साथ साथ कई कहानियाँ, संस्मरण, कविताएँ आदि अनेकों भाषाओं में लिखित है । आज भी कई कलाकारों, लेखकों, कवियों, चित्रकारों और फ़िल्मकारों की प्रेरणा स्रोत है ।

नर्मदा बचाओ आंदोलन का संघर्ष, कई मायनों में जीविका और जीवन बचाने के साथ साथ इन सभी को बचाने का भी है । नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर बने क़रीब बीसियों बड़े बाँध, कुछ सौ मध्यम और लगभग हज़ार छोटे बाँध, विकास नहीं, विनास ही करेंगे । एक के बाद एक गाँव, शहर, मंदिर, मस्जिद, खेत, खलिहान, सड़कें, स्कूल, अस्पताल, घाट, खेल कूद के मैदान, दुकानें और अन्य डूब रहे हैं । कुछ हम रोक पाए, कुछ नहीं । संघर्ष ज़ारी है !

नर्मदा घाटी के संघर्ष के कई दौर आपने पिछले दिनों – महीनो में देखे है | आप ने कई प्रकार से समर्थन भी दिया है जो अमूल्य है । आज भी सरदार सरोवर में 130/131 मीटर तक पानी भरा है, जिससे कई गाँवों के निचले घर, दुकान दुबे है, रास्ते डूबने से बड़े पैमाने पर खेत टापू बनकर रहे हीयन, किसानो का संपर्क टुटा है, कई गरीब मुहल्ले भी कट गए है, और मंदिर भी । इनमे से बहुतांश परिवारों को पुनर्वास के लाभ आधे अधूरे मिले है नये पैकेजेस के भुकतान में धांधली हो रही है, अधिकारियों दलालों के गठजोड़ से ।

इसलिए पुरे 214 कि.मी. के जलाशय के डूब क्षेत्र में आजतक, कुछ सौ परिवार ने बसाहटो में डूब क्षेत्र में घर बांधना शुरू किया है । तो भी हजारो परिवारों का जीवन, जीविका मूल गाँवों में ही है । इस स्थिति में, उपरी बांधो का पानी न छोड़े और सरदार सरोवर बांध के गेट्स खोले जाए यह जरुरी है । इस मांग को आप हम सब उठाते रहे, तभी यह विनाश रुक पाएगा ।

हम आमंत्रित करते हैं की आप, घाटी में आकर इस स्थिति को देखे, समझे और हर प्रकार से समर्थन का कार्य आगे बढाये । हम निमंत्रित कर रहे है आपको ताकि लेखों, चित्रों, गीत, नाट्य, आदि अन्य माध्यमों से आप नर्मदा की हकीकत को हर जगह प्रचारित करें और यहाँ की हक़ीक़त लोगों को बताएँ ।

आज हमें ज़रूरत है की हर प्रचार और प्रसार के माध्यमों के द्वारा नर्मदा की कहानी पूरे देश में जाए, ताकी एक सभ्यता संस्कृति को बचाया जा सके । हम आग्रह करते हैं, की आप आएँ और अन्य को भी ले कर आएँ ।

_नर्मदा घाटी पहुँचने के लिए आपको मालूम है इंदौर, खंडवा, बड़ोदा, धुले या मुंबई हर जगह से रास्ते हैं। आप 6 अक्टूबर की शाम तक बड़वानी पहुँचे और अगले दो दिनों तक हमारे साथ घाटी में चलें और अपने आँखों से हक़ीक़त देखें और समझें । बड़वानी तीन घंटे इंदौर से बस के द्वारा, 2 घंटे जुलवानिया से (मुंबई – इंदौर हाइवे पर), और 5 – 6 घंटे खंडवा और बड़ोदा से है । इंदौर, बड़ोदा और मुंबई रेल और हवाई मार्ग दोनों से जुड़ा है, खंडवा मुंबई कोलकाता रेल मार्ग पर है ।_

आपकी अपेक्षा में

*बालाराम यादव, कमला यादव, रोहित, देवराम कनेरा, कमेंद्र, दयाराम यादव, मयाराम भीलाला, राहुल यादव, मेधा पाटकर*

_संपर्क : राहुल, बड़वानी – 9179617513; हिमशी, दिल्ली – 9867348307; सुनीति सु र, पुणे – 9423571784; बिलाल खान, मुंबई – 9958660556 | nba.badwani@gmail.com_

CG Basket

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

| सीलमपुर की लड़कियां | दस्तक में आज प्रस्तुत

Wed Oct 4 , 2017
Share on Facebook Tweet it Share on Google Pin it Share it Email ✍?  आर चेतन क्रांति दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले   सीलमपुर की लड़कियां `विटी´ हो गईं लेकिन इससे पहले वे बूढ़ी हुई थीं जन्म से लेकर पंद्रह साल की उम्र तक उन्होंने सारा परिश्रम बूढ़ा […]

You May Like

Breaking News