Poems for You

7 सितम्बर 17 अगर उन्हें हिंदूओं की फिक्र होती तो हिंदू किसान आत्महत्या न करते यदि उन्हें हिंदू बच्चों की फिक्र होती तो सैकड़ों बच्चे सरकारी अस्पतालों में मारे न जाते क्यों उनका मुकद्दम कहता कि बच्चे पालना सरकार का काम नहीं ? यकीन मानिए यह लड़ाई सिर्फ हिंदू और मुसलमान की नहीं है ।  
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** लड़की और सड़क लड़की खड़ी है सड़क पर भांप रही है, समझ रही है सड़क को ग़र इस पर वह चले तो जाने कहां ले जाएगी सड़क? हो सकता वहां, जहां उसे जाना न हो. क्यों न वह अपनी सड़क ख़ुद बनाए? जो उसे वहां ले जाए,जहां वह जाना चाहती है. वह सोचती है
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⭕ आज हम कवियों के *कवियों के कवि शमशेर* की ग़ज़लें पढ़ेंगे. उम्मीद है कि चाकचौबंद होकर मौके पर मोर्चा सँभालने वाले मेरे प्रिय प्रिय मित्र भी पढ़ेंगे भी. *वक़्त सबसे हिसाब माँगेगा, अभी जो जैसा चाहे गा बजा ले* *हम तो ईमान लेके चलते हैं, जो जब जैसा चाहे आजमा ले.* वक़्त वो आ
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इस वर्ष का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार अच्युतानंद मिश्र को! निर्णायक थीं कवि अनामिका। पुरस्कृत कविता का शीर्षक है – बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे (अमेरिकी युद्धों में मारे गये, यतीम और जिहादी बना दिए गये उन असंख्य बच्चों के नाम) * अनिल जनविजय की फेसबूक पोस् ** सच के छूने
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इस वर्ष का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार अच्युतानंद मिश्र को! निर्णायक थीं कवि अनामिका। पुरस्कृत कविता का शीर्षक है – बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे (अमेरिकी युद्धों में मारे गये, यतीम और जिहादी बना दिए गये उन असंख्य बच्चों के नाम) ** सच के छूने से पहले झूठ ने निगल लिया
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दस्तक में आज प्रस्तुत ** 1 अगस्त 17 आज प्रस्तुत हैं *वंदना गोपाल शर्मा “शैली”* की तीन कविताएँ । वंदना का एक कहानी संग्रह “अहसास प्रेम का ” शीर्षक से और एक कविता संग्रह *”आने की आहट “* प्रकाशित हो चुका है । वंदना की रुचि आलेख व कहानियाँ मे ज्यादा है ! अकादमिक शिक्षा
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** बिलासपुर ;31 जुलाई प्रगतिशील लेखक संगठन और प्रेस क्लब बिलासपुर ने आज कहानी सम्राट मुन्शी प्रेमचन्द की जयंती प्रेसक्लब ईदगाह चौक में हर साल की तरह मनाई . मुख्य वक्ता के तौर पर शहर की जानी मानी साहित्यकार डा. कल्याणी वर्मा और श्रीमती मंगला देवरस , और रफ़ीक खान ने विस्तार से अपनी बात
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यह हमारे मित्र *विभाष उपाध्याय* हैं । विभाष प्रख्यात रंगकर्मी रंग निर्देशक हैं । बालरंग संस्था का वर्षों से संचालन कर रहे हैं । इंडियन पपेट थियेटर के अंतर्गत कठपुतली कला के प्रदर्शन के लिए भी प्रख्यात है । विभाष भाई के साथ उनकी पत्नी *अनिता उपाध्याय* और बेटियां *सिग्मा , त्रिज्या औऱ परिधि* भी
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🌅 *सुबह सवेरे* 🌅 मजदूर बिगुल से आभार सहित 1⃣ *एस.ए.^ सैनिक का गीत* भूख से बेहाल मैं सो गया लिये पेट में दर्द। कि तभी सुनाई पड़ी आवाज़ें उठ, जर्मनी जाग! फिर दिखी लोगों की भीड़ मार्च करते हुएः थर्ड राइख़^^ की ओर, उन्हें कहते सुना मैंने। मैंने सोचा मेरे पास जीने को कुछ
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विद्या गुप्ता आज दस्तक में   जन्म 1953 उज्जैन म.प्र. कृति दो काव्य संग्रह 1. और कितनी दूर 2. पारदर्शी होते हुए 3. दो संकलित संग्रह संपर्क श्री सदन 160., आर्य नगर, दुर्ग छ.ग. फोन 0788-5011534 ** मृत्यु हे मृत्यु ! हाथ में तक्षक लेकर हमेशा डराती रही मुझे डरता रहा मैं पराजित होता रहा
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