*मेरे ख़ुदा !* यह क्या वशीभूत कर लेता है हमें प्यार में ? क्या घटता है हमारे भीतर बहुत गहरे ? और टूट जाती है भीतर कौन सी चीज भला ? कैसे वापस पहुँच जाते हैं हम बचपन में जब करते होते हैं प्यार ? एक बूँद केवल कैसे बन जाती है समंदर और
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🌅 *सुबह सवेरे   1.    कोई गारंटी नही —————————— मिल ही जाएगी दिहाड़ी , कोई गारंटी नहीं क्या अगाड़ी ,क्या पिछाड़ी ; कोई गारंटी नहीं।   तिनके-तिनके जुटा करके बाँधी है एक झोंपड़ी नहीं जाएगी उजाड़ी , कोई गारंटी नहीँ ।   ना ठिकाना खाने का,पीने का, जीने-मरने का खिंचेगी कैसे ये गाड़ी ,
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1 OCTOBER 2013 Anjali Noronha Born in 1950, Vinod Raina breathed his last in Delhi on the 12th of September 2013. He had been diagnosed with cancer a few years ago, but did not let it be known to even his close friends and associates. He worked and travelled relentlessly till a little before he was
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⭕ मित्रो, आज समूह पर प्रस्तुत हैं समूह की साथी *प्रतिभा गोटीवाले* की कविताएँ. कविताएँ पढ़ें और इन पर बात ज़रूर करें.. दस्तक में आज प्रस्तुत अनिल करमेले *|| अग्नि परीक्षा ||* तुम ने कहा प्रेम और मैंने मान लिया तुमने कहा समर्पण मैंने वो भी मान लिया पर जब मैंने दोहराया प्रेम तुमने कहा
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हां मुझे भी चरित्रहीन औरतें पसंद हैं… बेहद… बेहद.. खूबसूरत होतीं है वो.. बेबाक, बेपर्दा, स्वतंत्र और उन्मुक्त… कि उनका कोई चरित्र नहीं होता। केवल चरित्रहीन औरतें ही खूबसूरत होती हैं। पिंजरे में कैद चिड़िया कितनी भी रंगीन हो, सुन्दर नहीं लगतीं… चाहे कोई कितनी भी कविताएं लिख ले उनपर.. क्या होता है चरित्र…? चरित्र
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12.11.2017 स्वामी विवेकानंद को उनके जिस शिकागो भाषण के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है, उसका पुनर्पाठ होना चाहिए। मैंने 1977 में उस भाषण को पढ़ा था, जिसे श्रीरामकृष्ण आश्रम, नागपुर ने “शिकागो वक्तृता ” शीर्षक से छापा था। आज मैंने उस भाषण को फिर से पढ़ा। सच कहूँ, मुझे वह झूट का पुलिंदा
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दस्तक के लिए प्रस्तुत अनिल करमेले *|| बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ ||* बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ! नींद थी मेरी अचल निस्पन्द कण कण में, प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पन्दन में, प्रलय में मेरा पता पदचिन्‍ह जीवन में, शाप हूँ जो बन गया वरदान बंधन में
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11 सितम्बर 2017 एक बार फिर बच्चों पर चर्चा हो रही है। बात करते समय सबकी आंखें नम् है । देश के हर घर में माता-पिता चिंतित है । हमारे बच्चे अब स्कूलों में भी सुरक्षित नहीं है । कैसा समाज रच रहे हैं हम ? देश की राजधानी से लगे एक बहुत बड़े स्कूल
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भाई Prem Prakash की वाल से कारे और जीपे तो हजार देखी होगी आपने पर ये जीप नही देखी होगी। कभी नही देखी होगी। लेकिन ठीक है, नही देखी तो नही देखी, ऐसा क्या खास है इस जीप मे ! खास है साहब, बहुत खास है। आज हमारे जिले मे तो इस जीप को देखने
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दोस्तों राधामोहन गोकुल जी का एक आलेख ईश्वर का बहिष्कार साझा करने की जुर्रत कर रहा हूँ। निबंध लंबा है। इसके चार हिस्से हैं जिन्हें हम इस शनिवार से चार हिस्सों में साझा करेंगे। ये महत्वपूर्ण वक्तव्य है जिसे पढ़ें और बात करें। यह पहला हिस्सा है। हर हिस्सा अपने आप में पूर्ण है। तो
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