** 24.8.17 देश में, पिछले कुछ महीनों में, नफ़रत भरी भीड़ द्वारा की गयी हिंसक वारदातों ने शांतिप्रिय नागरिकों को (चाहे वह किसी भी विचारधारा के समर्थक हों) को विचलित किया है। प्रधानमंत्री ने भी इस विषय पर लाल किले के प्राचीर से चिन्ता व्यक्त की है। शायद उचित होगा कि आम नागरिक, जहाँ भी
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STATEMENT OF WOMEN’S GROUPS & CONCERNED INDIVIDUALS ON THE JUDGEMENT OF THE HON’BLE SUPREME COURT ON TRIPLE TALAQ 22 AUGUST 2017 We wholeheartedly welcome the judgment of the Hon’ble Supreme Court in the matter of Triple Talaq brought before it by a number of Muslim women and Muslim women’s rights groups. In arguing that the
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22 AUGUST 2017 We wholeheartedly welcome the judgment of the Hon’ble Supreme Court in the matter of Triple Talaq brought before it by a number of Muslim women and Muslim women’s rights groups. In arguing that the practice of Triple Talaq is both, un-Quranic and Un-Constitutional, it is an important departure from earlier judgments on
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शम्सुल इस्लाम **** RSS/BJP ने फ़िलहाल अपने अव्वल नंबर के देशभक्त ‘वीर’ सावरकर की स्तुति काफ़ी हद तक कम कर दी है। इस की सब से बड़ी वजह यह है कि इस ‘वीर’ की असली कहानी दुनिया के सामने आ गई है। हिंदुत्व के इस ‘वीर’ ने अंग्रेज़ हुक्मरानों से एक बार नहीं बल्कि पांच
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  नथमल शर्मा ईवनिंग टाइम्स में प्रकाशित आज शाम की बात   18.8.17 अब *सवाल* खड़े करता *उत्तर* प्रदेश सबसे बड़ी प्रयोगशाला में तब्दील हो रहा है । गुजरात की अपार सफलता के बाद उत्तर प्रदेश की विराट सफलता से हौसले बुलंद हैं । बिना इलाज के बच्चे मरते हैं । रूदन ज्यादा दिनों तक
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  Pars Today http://tz.ucweb.com/8_1gsqS * 2014 में भारतीय जनता पार्टी द्वारा केन्द्र में सरकार के गठन के बाद से देश में जहां मुसलमानों और दलितों पर हिंदुत्ववादी शक्तियों के हमलों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने में आ रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने देश की स्वतंत्रता में मुसलमानों की भूमिका पर बल दिया
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मजदूर बिगुल से आभार सहित ऑनलाइन लिंक – http://thewirehindi.com/6712/history-shows-how-patriotic-the-rss-really-is/ ________________________ *भारत छोड़ो आंदोलन के डेढ़ साल बाद ब्रिटिश राज की बॉम्बे सरकार ने एक मेमो में खुशी व्यक्त करते हुए लिखा था कि संघ ने पूरी ईमानदारी से ख़ुद को क़ानून के दायरे में रखा, ख़ासतौर पर अगस्त, 1942 में भड़की अशांति में वो शामिल
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  सचिन कुमार जैन Tuesday 01 August 2017 भारत में “भीड़ के द्वारा हिंसा” कोई नया घटनाक्रम नहीं है, लेकिन भीड़ हिंसा को कट्टरपंथी राजनीति और साम्प्रदायिकता में श्रृद्धा रखने वाली सरकारों का संरक्षण होना इसमें नया जोड़ है। महाराष्ट्र में वर्ष 2015 में गौमांस पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इसके बाद से देश में मांसाहार
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मजदूर बिगुल से आभार सहित ***   29.7.17 सामाजिक न्याय के “ध्वजवाहकों” यानि नौटंकीबाजों लालू, मुलायम, नीतिश आदि का असली चेहरा दिखाता एक विचारोत्‍तेजक लेख, जरूर पढ़ें और शेयर करें। ✍लेखिका – कविता कृष्‍णपल्‍लवी ( https://www.facebook.com/kavita.krishnapallavi ) ** _________________________ *इन दिनों कुछ भलेमानस बुद्धिजीवी बहुत दुखी हैं कि “सामाजिक न्याय की शक्तियाँ” लगातार आपसी कलह
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** हिमांशु कुमार # असल में देश में राष्ट्रवाद की बहुत कमी है, देखिये मज़दूर मज़दूरी मांगता रहता है, छात्र सस्ती शिक्षा के लिये आन्दोलन करते रहते हैं, औरतें समान अधिकारों का रोना रोती रहती हैं, दलित जाति पांति का विरोध करते रहते हैं, अल्पसंख्यक भी बहुसंख्यकों जैसा व्यवहार चाहते हैं, लेकिन अगर यह सभी
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