बजरंगीयो की दल्लीराजहरा में सांम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश ,जनसंगठनों ने कलेक्टर से हस्तक्षेप करना की अपील .
** नहीं मिले बार बार समय देकर भी कलेक्टर बालौद ,
डेलीगेशन ने एडीएम को दिया ज्ञापन .
जबकि कलेक्टर बालोद ने खुद मैसेज भेजकर मिलने का समय तय किया था.

** आरएसएस,बजरंग दल,नमो सेना के गुंडों ने साम्प्रदायिकता भड़कायी,साथ ही पास्टर सहित उनकी पत्नी,बच्चे,और साथियो के साथ भी मारपीट की,महिलाओ के कपड़े तक उतार के बाहर घसीटा गया।

** आज दिनाँक तक गुंडों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गयी।उलटा पास्टर व उनके परिवार को जगह छोड़ के जाओ वरना मार देंगे जान से,ऐसी धमकिया मिल रही है। पास्टर को दबाव में पुलिस ने ये तक लिखवा लिया कि यहाँ आपको अपनी कोई प्रार्थना या पूजा नही करनी है.
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दल्लीराजहरा में हाल ही में हुयी चर्च वाली घटना के सम्बन्ध में आज बालोद जिला के कलेक्टर से एक सयुक्त डेलीगेशन मिलने पहुचा। चूँकि मिलने का दिन कलेक्टर साहब ने खुद तय करके मेसेज के माध्यम से बताया था,परंतु फिर भी हमारे पहुचते ही साहब जी जा चुके थे कही और लगातार हमारे द्वारा फोन व मेसेज किये जाने के बावजूद न हमारा फ़ोन उठाया और न ही हमे समय से मेसेज का जवाब दिया।

ऐसे में काफी देर इन्तजार करने के बाद अपर कलेक्टर से मिलना तय किया। मिलने के लिए अंदर मात्र 2 या 3 लोग जा सकते है ऐसा जवाब मिला पर काफी बहस के बाद जब हम कुछ साथी अंदर गए तो उनको रिक्वेस्ट किया कि सारे लोग अलग अलग संगठन से और दूर दूर से आये है और मामला मात्र 2 या 3 का नही है अब,बल्कि सबका हो चुका है तब अपर कलेक्टर जी एस नाग द्वारा हामी भर दी गयी और सभी साथी अंदर जाकर बात कर सके।

सारी बाते सभी ने काफी अच्छे से रक्खी,बदले में उन्होंने आश्वासन दिया कि हम आज ही आपकी बात को कलेक्टर साहब से चर्चा करेंगे। चर्च पर हमले के मुद्दे के साथ ही महामाया खदान का बन्द हो जाने का मुद्दा भी रक्खा गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सब ठीक होगा।

जब वहा से हम निकल गए तब एक मेसेज 5 बजे के आस पास और अन्य दूसरा मेसज रात 8 बजे के आस पास आया। जिसमे उन्होंने कहा कि आप adm से मिल सकते है मैंने बोल दिया है। इससे साफ़ पता चलता है कि कलेक्टर महोदय को हमारे आने से लेकर जाने तक की पूरी खबर थी तभी जैसे ही हम वहा से निकलते है उसके आधे घण्टे बाद मेसेज का जवाब आता है।
पूरा मामला यह है :-

दल्लीराजहरा में हाल ही में हुयी चर्च पर हमला वाली घटना जिसमे आरएसएस,बजरंग दल,नमो सेना के गुंडों ने साम्प्रदायिकता भड़कायी,साथ ही पास्टर सहित उनकी पत्नी,बच्चे,और साथियो के साथ भी मारपीट की,महिलाओ के कपड़े तक उतार के बाहर घसीटा गया।

घटना 29 जनवरी 2017 की है, जिसमे आज दिनाँक तक गुंडों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गयी।उलटा पास्टर व उनके परिवार को जगह छोड़ के जाओ वरना मार देंगे जान से,ऐसी धमकिया मिल रही है। पास्टर को दबाव में पुलिस ने ये तक लिखवा लिया कि यहाँ आपको अपनी कोई प्रार्थना या पूजा नही करनी है।
 इसी के सम्बन्ध में आज दिनाँक 22/02/17 को बालोद जिला के कलेक्टर से एक सयुक्त डेलीगेशन मिलने पहुचा। चूँकि मिलने का दिन कलेक्टर साहब ने खुद तय करके मेसेज के माध्यम से बताया था,परंतु फिर भी हमारे पहुचते ही साहब जी जा चुके थे कही और लगातार हमारे द्वारा फोन व मेसेज किये जाने के बावजूद न हमारा फ़ोन उठाया और न ही हमे समय से मेसेज का जवाब दिया। ऐसे में काफी देर इन्तजार करने के बाद अपर कलेक्टर से मिलना तय किया।

 मिलने के लिए अंदर मात्र 2 या 3 लोग जा सकते है ऐसा जवाब मिला पर काफी बहस के बाद जब हम कुछ साथी अंदर गए तो उनको रिक्वेस्ट किया कि सारे लोग अलग अलग संगठन से और दूर दूर से आये है और मामला मात्र 2 या 3 का नही है अब,बल्कि सबका हो चुका है तब अपर कलेक्टर जी एस नाग द्वारा हामी भर दी गयी और सभी साथी अंदर जाकर बात कर सके।

सारी बाते सभी ने काफी अच्छे से रक्खी,बदले में उन्होंने आश्वासन दिया कि हम आज ही आपकी बात को कलेक्टर साहब से चर्चा करेंगे। चर्च पर हमले के मुद्दे के साथ ही महामाया खदान का बन्द हो जाने का मुद्दा भी रक्खा गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सब ठीक होगा।जब वहा से हम निकल गए तब एक मेसेज 5 बजे के आस पास और अन्य दूसरा मेसज रात 8 बजे के आस पास आया। जिसमे उन्होंने कहा कि आप adm से मिल सकते है मैंने बोल दिया है।

इससे साफ़ पता चलता है कि कलेक्टर महोदय को हमारे आने से लेकर जाने तक की पूरी खबर थी तभी जैसे ही हम वहा से निकलते है उसके आधे घण्टे बाद मेसेज का जवाब आता है।

 साफ़ तौर पर टालने जैसा व्यवहार किया गया। आज के डेलीगेशन में संजय पराते जी,प्रसाद राव जी,गणेश राम चौधरी जी व उनके साथ एक अन्य साथी ,ईश्वर निर्मलकर जी,बसन्त जी व उनके साथ 4 अन्य साथी,रेड्डी जी व उनके साथ अन्य 3 साथी,दीपांशु कश्यप,विजय शंकर पात्रे,पास्टर जैकब,उनकी वाइफ व उनके साथ अन्य लगभग 8 साथी,प्रियंका शुक्ला आदि उपस्थित रहे। डेलीगेशन ने विरोध दर्ज कराते हुए,मांगो के साथ कलेक्टर बालोद को संबोधित करता ज्ञापन भी सौपा।
**
ज्ञापन निम्नलिखित है

प्रति
श्रीमान जिलाधीश एवं खनन अधिकारी
जिला बालोद.

विषय: 1. दल्ली राजहरा शहर में हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों और गुंडा तत्वों द्वारा अल्प्संख्यकों को प्रताड़ित किये जाने की निरंतर जानकारी के बावजूद, पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई अपराधिक/ प्रतिबंधात्मक कारवाही न करने एवं नागरिक समाज की अवहेलना करने बाबत.

2. दल्ली राजहरा के महामाया खदानों में उत्पन्न संकट के न्यायपूर्ण निराकरण के लिए प्रयास करने बाबत.

महोदय,

जैसा आप अवगत है, दल्ली राजहरा नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 2, बस्ती 256 चौक में, 29 जनवरी 2017 को, पास्टर जैकब जोसफ के निवास स्थान पर हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों द्वारा उकसाए गए और प्रायोजित मारपीट, तोड़फोड़ और महिलाओं के साथ बदसलूकी की गंभीर घटना घटित हुई है.

इसके बारे में तथ्य अन्वेषण करने हेतु “छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन” – 25 सामाजिक संगठनों का मंच – की ओर से एक जांच दल (जिसमे श्री संजय पराते (राज्य सचिव माकपा), सुश्री सुधा भारद्वाज (महासचिव छत्तीसगढ़ लोक स्वातंत्र्य संगठन), श्री प्रसाद राव (छत्तीसगढ़ क्रिस्चियन फ़ेलोशिप) एवं सुश्री प्रियंका शुक्ल (प्रदेश प्रभारी छत्तीसगढ़ युवा संघर्ष समिति) शामिल थे)
 दिनांक 18 फरवरी को दल्ली राजहरा में पीड़ितों, विभिन्न संगठनों और नागरिक समाज से चर्चा किया और जानकारी और दस्तावेज़ एकत्रित किये.
हमारी विस्तृत रिपोर्ट कुछ समय पश्चात ज़ारी की जाएगी परन्तु अंतरिम तौर पर हम आपका ध्यान निम्न गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं:-

1. पास्टर जैकब जोसफ 2004 से लेकर अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ दल्ली राजहरा नगर पालिका के वार्ड 2, 256 चौक की बस्ती में, निरंतर निवास कर रहे हैं, इस बाबत उनके पास उक्त समय से बिजली बिल और पटाये गए कर के सबूत हैं. वे मूलतः केरल प्रान्त के हैं और न्यू इंडिया चर्च ऑफ़ गॉड से जुड़े हैं. 2004 से वे निरंतर अपने निवास स्थान पर हर रविवार को 9 से 12 बजे सुबह प्रार्थना कराते रहे हैं, जिसमे औसतन विभिन्न स्थानों से 60 – 80 व्यक्ति शामिल होते रहे हैं.

करीब 3 महीने पहले उन्होंने अपने ही कब्ज़े की ज़मीन पर प्रार्थना हेतु एक अस्थाई शेड बनाना शुरू जिसका निर्माण अधूरा है. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), डौंडी लोहारा द्वारा दिसम्बर और जनवरी माह के लिए उन्होंने उपरोक्त प्रार्थना हेतु ध्वनी विस्तारक यंत्र की अनुमति भी प्राप्त थी, जो संलग्न है. नगर पालिका अध्यक्ष, दल्ली राजहरा को भी अस्थाई शेड बनाने की जानकारी थी और उन्होंने इस बाबत कोई आपत्ति नहीं की थी. यह भी प्रासंगिक है की पास्टर जैकब के मोहल्ले के अनेक लोग, जो इसाई से इतर धर्मों के थे, उन्हें और उनकी पत्नी को अपने घरों पर प्रार्थना करने के लिए बुलाया करते थे, परन्तु ऐसे व्यक्तियों के धार्मिक आस्था में उन्होंने कभी हस्तक्षेप नहीं किया, और न ही उनपर किसी के धर्मांतरण का कोई आरोप था.
2. यह कि 29 जनवरी 2017 रविवार को, पास्टर जैकब के निवास के पास दुर्गा मंच पर हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों ने एक सभा रखी गयी जिसमे मोहल्ले से खेमचरण निषाद, भूषण निर्मलकर, कृष्णा साहू और कुछ महिलाये शामिल थीं, पर सैंकड़ों की संख्या में बाहर से लोग बुलाये गए थे. करीब 350-400 की भीड़ को पास्टर और उनके धर्म के खिलाफ सुनियोजित तरीके से भड़काया गया, उनकी पत्नी और अन्य महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता की गयी, उनके निवास के गेट और बाहर में रखे 2 बाइक और 1 साइकिल को तोड़ फोड़ कर दिया गया, उनको और उनके धर्म को गाली गलौच किया गया और केरल चले जाने के लिए धमकी दी गयी.

इस घटना में शासन द्वारा संगठित किये जा रहे “महिला कमांडो” का भी एक राजनैतिक और कट्टर धार्मिक एजेंडा के लिए प्रयोग किया गया है. उक्त घटना का विडियो और ऑडियो टेप रिकॉर्डिंग है, और हमारे द्वारा साक्षियों का विडियो पर बयान भी लिया गया है, जिसे विवेचना किये जाने की स्थिति में प्रस्तुत किया जा सकता है.

 सम्बंधित थाने ने अल्पसंख्यक पीड़ितों की शिकायत दर्ज करने और उनकी रक्षा करने की बजाय, उन्ही पर “समझौता” करने और प्रार्थना बंद करने का दबाव बनाया. अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों के हस्तक्षेप के बाद भी नामज़द व्यक्तियों के विरुद्ध कोई FIR दर्ज नहीं किया गया है, यहाँ तक कि उनसे कोई पूछताछ तक नहीं की गयी है, और न ही स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्र में कोई उद्घोषणा करवाकर, इस प्रकार की अल्पसंख्यक विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की गयी. इसके विपरीत अगले दिन रात 8 बजे को थाने के दो सिपाही पास्टर के घर के कमरे में घुस आये जहाँ उनकी पत्नी और दो बच्चे प्रार्थना कर रहे थे और उनका विडियो लेने लगे, उनका कहना था कि यह किसी पडोसी के शिकायत पर जांच के लिए किया गया.

3. जहाँ इस घटना के विरोध में प्रस्तावित हर प्रदर्शन को बहुत ही मुश्किल से अनुमति मिल रही है, दूसरी तरफ हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा खुले आम बिना किसी रोक टोक के निरंतर सभा, रैली की जा रही है.

 14 फरवरी को इनके द्वारा वैलेंटाइन डे के विरोध के नाम पर 10 जोड़ों के साथ बिलकुल अनाद्धिकृत तरीके से दादागिरी दिखाई गयी. मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार  येलोग मुस्लिम नौजवानों को भड़काने के लिए “न अली रहेगा, न वली रहेगा, केवल बजरंग बली रहेगा” जैसे नारे लगाते रहते हैं.

दल्ली राजहरा में विभिन्न प्रान्तों और धर्मों के लोग 70 के दशक से शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं. 1984 में भी सिख शराब ठेकेदारों के विरुद्ध जन भावना के बावजूद, यहाँ के मजदूरों की परिपक्व समझारी के कारण दल्ली राजहरा आसपास के सिख समुदाय के लोगों के लिए शरणस्थली बना रहा. बाबरी मस्जिद के गिराए जाने पर भी यहाँ हिन्दू-मुस्लिम तनाव नहीं पनप पाया. इस शहर में बड़ी संख्या में कैथोलिक एवं प्रोटोस्टेंट सभी चर्च मौजूद है, क्रिस्चियन समुदाय के स्कूल और अस्पताल भी चल रहे हैं

. स्थानीय समुदायों से चर्चा करने पर जानकारी मिली कि अल्पसंख्यक, प्रशासन के एकतरफा और पक्षपाती रवैय्ये से काफी निराश और चिंतित हैं. राजनैतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों का भी मत था कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए लोगो को शहर में अशांति फ़ैलाने की छूट दी जा रही है जो भविष्य के लिए बहुत खतरनाक नीति है.

15 फरवरी 2017 को शहर के चार प्रमुख श्रम संगठनों और बंगाली, उत्कल, गोंडवाना, मुस्लिम, रविदास, झरिया धोबी, और गन्धर्व आदि विभिन्न समाजों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर आज तक कोई कारवाही नहीं की गयी है. जबकि श्रमिक यूनियनों, समाजों, एवं राजनैतिक दलों से सामूहिक चर्चा कर शांति बनाये रखने के लिए समिति आदि बनाना उचित कदम होता.

4. दल्ली राजहरा एक श्रमिक बहुल शहर है. हमारी श्रमिक यूनियनों से जब चर्चा हुई तो पता चला कि श्रमिकों के बीच में काफी आक्रोश था क्योंकि महामाया खदान में चल रहे वाहनों के लिए ट्रांजिट पास बंद कर दिए जाने से, खदान के बंद होने की आशंका थी. टीम के लौट आने के बाद मिली जानकारी से यह आशंका भी सही साबित हुई है. जिलाधीश और खनन अधिकारी – ये दोनों महत्वपूर्ण प्रभार रहने के कारण – इस गंभीर परिस्थिति में – दल्ली राजहरा के श्रमिकों का रोज़गार, भिलाई इस्पात संयत्र को आवश्यक आपूर्ति, और कानून व्यवस्था – इन सभी दृष्टिकोणों से आपके द्वारा तात्कालिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है.

इसलिए हम आपसे निवेदन करते हैं –

क) 29 जनवरी की उपरोक्त वर्णित घटना पर तुरंत FIR दर्ज कर, नामज़द आरोपियों के विरुद्ध तत्काल कारवाही की जाये. पास्टर जैकब जोसफ को अपने निवास स्थान पर प्रति रविवार 9 से 12 बजे प्रार्थना करने की अनुमति दी जाये. आवश्यकता हो तो कुछ समय के लिए उन्हें इसके लिए सुरक्षा प्रदान किया जाये.
ख) प्रभावित क्षेत्र में प्रशासन उद्घोषणा कर सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने हेतु आव्हान करे. शान्ति बनाये रखने के लिए समस्त समाजो, यूनियन और राजनैतिक दलों के साथ सामूहिक चर्चा की प्रक्रिया आरम्भ की जाए. “महिला कमांडो” का प्रयोग सांप्रदायिक गतिविधियों के लिए अथवा दल विशेष के कार्यक्रमों के लिए नहीं किया जाये.
ग) महामाया खदानों के बंद होने की परिस्थिति में समस्त प्रभावित श्रमिक और समस्त यूनियनों से चर्चा कर वर्तमान संकट के निराकरण हेतु शीघ्र पहल की जाये.

भवदीय

“छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन” की ओर से

संजय पराते
प्रति
श्रीमान जिलाधीश एवं खनन अधिकारी
जिला बालोद.

विषय: 1. दल्ली राजहरा शहर में हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों और गुंडा तत्वों द्वारा अल्प्संख्यकों को प्रताड़ित किये जाने की निरंतर जानकारी के बावजूद, पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई अपराधिक/ प्रतिबंधात्मक कारवाही न करने एवं नागरिक समाज की अवहेलना करने बाबत.

2. दल्ली राजहरा के महामाया खदानों में उत्पन्न संकट के न्यायपूर्ण निराकरण के लिए प्रयास करने बाबत.

महोदय,

जैसा आप अवगत है, दल्ली राजहरा नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 2, बस्ती 256 चौक में, 29 जनवरी 2017 को, पास्टर जैकब जोसफ के निवास स्थान पर हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों द्वारा उकसाए गए और प्रायोजित मारपीट, तोड़फोड़ और महिलाओं के साथ बदसलूकी की गंभीर घटना घटित हुई है. इसके बारे में तथ्य अन्वेषण करने हेतु “छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन” – 25 सामाजिक संगठनों का मंच – की ओर से एक जांच दल (जिसमे श्री संजय पराते (राज्य सचिव माकपा), सुश्री सुधा भारद्वाज (महासचिव छत्तीसगढ़ लोक स्वातंत्र्य संगठन), श्री प्रसाद राव (छत्तीसगढ़ क्रिस्चियन फ़ेलोशिप) एवं सुश्री प्रियंका शुक्ल (प्रदेश प्रभारी छत्तीसगढ़ युवा संघर्ष समिति) शामिल थे) ने दिनांक 18 फरवरी को दल्ली राजहरा में पीड़ितों, विभिन्न संगठनों और नागरिक समाज से चर्चा किया और जानकारी और दस्तावेज़ एकत्रित किये.
हमारी विस्तृत रिपोर्ट कुछ समय पश्चात ज़ारी की जाएगी परन्तु अंतरिम तौर पर हम आपका ध्यान निम्न गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं:-

1. पास्टर जैकब जोसफ 2004 से लेकर अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ दल्ली राजहरा नगर पालिका के वार्ड 2, 256 चौक की बस्ती में, निरंतर निवास कर रहे हैं, इस बाबत उनके पास उक्त समय से बिजली बिल और पटाये गए कर के सबूत हैं. वे मूलतः केरल प्रान्त के हैं और न्यू इंडिया चर्च ऑफ़ गॉड से जुड़े हैं. 2004 से वे निरंतर अपने निवास स्थान पर हर रविवार को 9 से 12 बजे सुबह प्रार्थना कराते रहे हैं, जिसमे औसतन विभिन्न स्थानों से 60 – 80 व्यक्ति शामिल होते रहे हैं. करीब 3 महीने पहले उन्होंने अपने ही कब्ज़े की ज़मीन पर प्रार्थना हेतु एक अस्थाई शेड बनाना शुरू जिसका निर्माण अधूरा है. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), डौंडी लोहारा द्वारा दिसम्बर और जनवरी माह के लिए उन्होंने उपरोक्त प्रार्थना हेतु ध्वनी विस्तारक यंत्र की अनुमति भी प्राप्त थी, जो संलग्न है. नगर पालिका अध्यक्ष, दल्ली राजहरा को भी अस्थाई शेड बनाने की जानकारी थी और उन्होंने इस बाबत कोई आपत्ति नहीं की थी. यह भी प्रासंगिक है की पास्टर जैकब के मोहल्ले के अनेक लोग, जो इसाई से इतर धर्मों के थे, उन्हें और उनकी पत्नी को अपने घरों पर प्रार्थना करने के लिए बुलाया करते थे, परन्तु ऐसे व्यक्तियों के धार्मिक आस्था में उन्होंने कभी हस्तक्षेप नहीं किया, और न ही उनपर किसी के धर्मांतरण का कोई आरोप था.
2. यह कि 29 जनवरी 2017 रविवार को, पास्टर जैकब के निवास के पास दुर्गा मंच पर हिन्दू कट्टरपंथी संगठनों ने एक सभा रखी गयी जिसमे मोहल्ले से खेमचरण निषाद, भूषण निर्मलकर, कृष्णा साहू और कुछ महिलाये शामिल थीं, पर सैंकड़ों की संख्या में बाहर से लोग बुलाये गए थे. करीब 350-400 की भीड़ को पास्टर और उनके धर्म के खिलाफ सुनियोजित तरीके से भड़काया गया, उनकी पत्नी और अन्य महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्रता की गयी, उनके निवास के गेट और बाहर में रखे 2 बाइक और 1 साइकिल को तोड़ फोड़ कर दिया गया, उनको और उनके धर्म को गाली गलौच किया गया और केरल चले जाने के लिए धमकी दी गयी. इस घटना में शासन द्वारा संगठित किये जा रहे “महिला कमांडो” का भी एक राजनैतिक और कट्टर धार्मिक एजेंडा के लिए प्रयोग किया गया है. उक्त घटना का विडियो और ऑडियो टेप रिकॉर्डिंग है, और हमारे द्वारा साक्षियों का विडियो पर बयान भी लिया गया है, जिसे विवेचना किये जाने की स्थिति में प्रस्तुत किया जा सकता है. सम्बंधित थाने ने अल्पसंख्यक पीड़ितों की शिकायत दर्ज करने और उनकी रक्षा करने की बजाय, उन्ही पर “समझौता” करने और प्रार्थना बंद करने का दबाव बनाया. अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों के हस्तक्षेप के बाद भी नामज़द व्यक्तियों के विरुद्ध कोई FIR दर्ज नहीं किया गया है, यहाँ तक कि उनसे कोई पूछताछ तक नहीं की गयी है, और न ही स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्र में कोई उद्घोषणा करवाकर, इस प्रकार की अल्पसंख्यक विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की गयी. इसके विपरीत अगले दिन रात 8 बजे को थाने के दो सिपाही पास्टर के घर के कमरे में घुस आये जहाँ उनकी पत्नी और दो बच्चे प्रार्थना कर रहे थे और उनका विडियो लेने लगे, उनका कहना था कि यह किसी पडोसी के शिकायत पर जांच के लिए किया गया.

3. जहाँ इस घटना के विरोध में प्रस्तावित हर प्रदर्शन को बहुत ही मुश्किल से अनुमति मिल रही है, दूसरी तरफ हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा खुले आम बिना किसी रोक टोक के निरंतर सभा, रैली की जा रही है. 14 फरवरी को इनके द्वारा वैलेंटाइन डे के विरोध के नाम पर 10 जोड़ों के साथ बिलकुल अनाद्धिकृत तरीके से दादागिरी दिखाई गयी. मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार  येलोग मुस्लिम नौजवानों को भड़काने के लिए “न अली रहेगा, न वली रहेगा, केवल बजरंग बली रहेगा” जैसे नारे लगाते रहते हैं. दल्ली राजहरा में विभिन्न प्रान्तों और धर्मों के लोग 70 के दशक से शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं. 1984 में भी सिख शराब ठेकेदारों के विरुद्ध जन भावना के बावजूद, यहाँ के मजदूरों की परिपक्व समझारी के कारण दल्ली राजहरा आसपास के सिख समुदाय के लोगों के लिए शरणस्थली बना रहा. बाबरी मस्जिद के गिराए जाने पर भी यहाँ हिन्दू-मुस्लिम तनाव नहीं पनप पाया. इस शहर में बड़ी संख्या में कैथोलिक एवं प्रोटोस्टेंट सभी चर्च मौजूद है, क्रिस्चियन समुदाय के स्कूल और अस्पताल भी चल रहे हैं. स्थानीय समुदायों से चर्चा करने पर जानकारी मिली कि अल्पसंख्यक, प्रशासन के एकतरफा और पक्षपाती रवैय्ये से काफी निराश और चिंतित हैं. राजनैतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों का भी मत था कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए लोगो को शहर में अशांति फ़ैलाने की छूट दी जा रही है जो भविष्य के लिए बहुत खतरनाक नीति है. 15 फरवरी 2017 को शहर के चार प्रमुख श्रम संगठनों और बंगाली, उत्कल, गोंडवाना, मुस्लिम, रविदास, झरिया धोबी, और गन्धर्व आदि विभिन्न समाजों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर आज तक कोई कारवाही नहीं की गयी है. जबकि श्रमिक यूनियनों, समाजों, एवं राजनैतिक दलों से सामूहिक चर्चा कर शांति बनाये रखने के लिए समिति आदि बनाना उचित कदम होता.

4. दल्ली राजहरा एक श्रमिक बहुल शहर है. हमारी श्रमिक यूनियनों से जब चर्चा हुई तो पता चला कि श्रमिकों के बीच में काफी आक्रोश था क्योंकि महामाया खदान में चल रहे वाहनों के लिए ट्रांजिट पास बंद कर दिए जाने से, खदान के बंद होने की आशंका थी. टीम के लौट आने के बाद मिली जानकारी से यह आशंका भी सही साबित हुई है. जिलाधीश और खनन अधिकारी – ये दोनों महत्वपूर्ण प्रभार रहने के कारण – इस गंभीर परिस्थिति में – दल्ली राजहरा के श्रमिकों का रोज़गार, भिलाई इस्पात संयत्र को आवश्यक आपूर्ति, और कानून व्यवस्था – इन सभी दृष्टिकोणों से आपके द्वारा तात्कालिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है.

इसलिए हम आपसे निवेदन करते हैं –

क) 29 जनवरी की उपरोक्त वर्णित घटना पर तुरंत FIR दर्ज कर, नामज़द आरोपियों के विरुद्ध तत्काल कारवाही की जाये. पास्टर जैकब जोसफ को अपने निवास स्थान पर प्रति रविवार 9 से 12 बजे प्रार्थना करने की अनुमति दी जाये. आवश्यकता हो तो कुछ समय के लिए उन्हें इसके लिए सुरक्षा प्रदान किया जाये.
ख) प्रभावित क्षेत्र में प्रशासन उद्घोषणा कर सांप्रदायिक सौहार्द बनाये रखने हेतु आव्हान करे. शान्ति बनाये रखने के लिए समस्त समाजो, यूनियन और राजनैतिक दलों के साथ सामूहिक चर्चा की प्रक्रिया आरम्भ की जाए. “महिला कमांडो” का प्रयोग सांप्रदायिक गतिविधियों के लिए अथवा दल विशेष के कार्यक्रमों के लिए नहीं किया जाये.
ग) महामाया खदानों के बंद होने की परिस्थिति में समस्त प्रभावित श्रमिक और समस्त यूनियनों से चर्चा कर वर्तमान संकट के निराकरण हेतु शीघ्र पहल की जाये.

भवदीय

“छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन” की ओर से

संजय पराते
राज्य सचिव ( माकपा )

सुधा भारद्वाज
छग लोकस्वातंत्रय संगठन

प्रसाद राव
(छत्तीसगढ़ क्रिस्चियन फ़ेलोशिप)

प्रियंका शुक्ल
  (प्रदेश प्रभारी CYSS)

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