प्रदेश की शर्मनाक तस्वीर : आज भी कंदमूल खाकर जीने को मजबूर हैं पहाड़ी कोरवा

प्रदेश की शर्मनाक तस्वीर : आज भी कंदमूल खाकर जीने को मजबूर हैं पहाड़ी कोरवा 
जशपुरनगर/बगीचा. विशेष संरक्षित जनजाति और राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र, पहाड़ी कोरवाओं पर अबतक खर्च हुए करोड़ों रूपए की पोल धीरे-धीरे खुल रही है। खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बावजूद एक पहाड़ी कोरवा की मौत भूख से हो जाने की बात परिजनों के द्वारा कही जा रही है।
अंबिकापुर मार्ग से पीडि़ता सुखनी बाई के मायके खजरीकोना पहुंचे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने दर्जनों पहाड़ी कोरवाओं के घर जाकर देखा कि उनके हांडियों में अनाज की जगह पहाडिय़ों से लाए कंदमूल है।
उसे ही खाकर वे जीवन गुजार रहे हैं। आर्थिक� सुदृढ़ता के लिए उनके पास सूखी लकड़ी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। कोरवाओं को दी जा रही सुविधाओं का लाभ कागजों में दिखाकर पैसा अधिकारियों द्वारा डकार लिया जा रहा है।
पोषण आहार के नाम पर उन्हें कुछ भी नसीब नहीं हो रहा है। पोषक अनाज की बात तो दूर भरपेट चावल भी नसीब नहीं है। कोरवाओं की दयनीय हालत उनकी दशा को देखकर पता चलता है।
उन्होंने कहा, कई कोरवाओं का राशन कार्ड बना ही नहीं है और कई लोगों का कार्ड सत्यापन के नाम पर काट दिया गया है। प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, सरकार इनके लिए रोजगार मुहैया कराए, और इनका इलाज कराते हुए राहत पहुंचाए।
उबला कांदा खाकर दिन गुजार रहे पहाड़ी कोरवाओं की हालत सरकार खुद यहां आकर देखे। प्रशासनिक अधिकारी जमीनी हकीकत जानने यहां पहुंचते ही नहीं और मामला सच आने के बाद उसपर लीपापोती का प्रयास शुरू कर दिया जाता है। प्रशासन मामले को भले ही दबाने में लगा है लेकिन इसकी गूंज दिल्ली तक पहुंचाई जाएगी।
इलाज के लिए दौड़
भूख से मौत की खबर सुर्खियों में आने के बाद मृतक की पत्नि सुखनी बाई की इलाज की कवायद शुरू कर दी गई है। बीमारी की वजह से एक आंख बंद हो चुके सुखनी को इलाद दिलाने कांग्रेस, बीजेपी और प्रशासन की ओर से पहल की जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचे जिला कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने मीडिया के सामने बयान जारी कर कहा, सुखनी बाई की इलाज का संपूर्ण खर्च वे स्वयं वहन करेंगे और उसकी बेहतर इलाज के लिए आगे तक लेकर जाएंगे।
उन्होंने खाद्य सुरक्षा कानून के तहत और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश के पिछड़े इलाकों में बेहतर सुविधा मुहैया कराने के प्रदेश सरकार के दावों को खोखला करार दिया है। जिला प्रशासन की टीम ने सुखनी बाई को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराने की तैयारी की है।
चना वितरण है बंद �
पोषण आहार मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार की ओर से खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गरीबों को दिया जा चना की सुविधा भी बंद करा दी गई है। जिला� खाद्य अधिकारी दिनेश्वर प्रसाद ने बताया, अगस्त महीने से चना का वितरण बंद है। इन हालात में पोषण की उम्मीद नाकाफी है। इसके साथ ही खजरीकोना निवासी देवचरन ने बताया कि उनके क्षेत्र में अनाज भी बहुत देरी से बांटा जाता है।
हंगामे के बाद विभाग ने की खानापूर्ति
मामले की खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन की ओर मृतक लम्बू की मां विजनी और भाई लम्बी के निवास स्थल लेदरागढ़ा में मंगलवार को एक बोरी चावल भिजवाया।
वहीं पति खोने का दु:ख झेल रही पीडि़ता सुखनी बाई के पास खजरीकोना में किसी प्रकार की राहत सामाग्री नहीं पहुंची। जिसकी चर्चाएं इलाके में है।

प्रबल ने बुलाई कोरवाओं की महापंचायत
बगीचा विकासखंड के ग्राम लेदरपाठ में भूख से एक पहाड़ी कोरवा की मौत की घटना को लेकर ऑपरेशन घर वापसी के प्रमुख व जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कोरवाओं की महापंचायत बुलाई है।
प्रबल की उपस्थित में पाठ क्षेत्र में स्थित ग्राम भादो में 28 अक्टूबर को सभी पहाड़ी कोरवा जुटेंगे। पहाड़ी कोरवा की भूख से मौत की घटना सामने आने के बाद जनप्रतिनिधियों में प्रबल प्रताप सबसे पहले पीडि़त महिला से मिलने के लिए ग्राम लेदरापाठ पहुंचे।
इस घटना का खुलासा होने के बाद जैसे ही प्रबल प्रताप को इसकी जानकारी मिली वे अपने समर्थकों के साथ तत्काल सन्ना के ग्राम लेदरापाठ पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने मृतक लंबू राम की पत्नी सुकनी से मुलाकात की और घटना के संबंध में विस्तार से चर्चा की।
प्रबल ने गांव के अन्य लोगों से भी घटना के बारे में जानकारी ली। वस्तुत: भूख से मौत हुई है यह साफ� नहीं हो पाया है। व्यवस्था संबंधी कुछ खामियां सामने आई है। प्रबल ने गांव में उपस्थित अन्य पहाड़ी कोरवाओं को भरोसा दिलाया कि पहाड़ी कोरवाओं को सुविधा देने के मामले में व्यवस्था संबंध्ी गड़बड़ी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जशपुर जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि कोरवाओं से हमारा घरेलू रिश्ता है। इस समाज में हमेशा हमारे सुख, दुख में साथ दिया है और हम भी इनकी गम व खुशियों में शामिल होते हुए आए हैं।
पहाड़ी कोरवा की मौत हो जाना बडा संवेदनशील मामला है। कोरवाओं के साथ अनदेखी हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोरवाओं की समस्याओं को जानने के लिए 28 को भादो गांव में महापंचायत बुलाई गई है।

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