एक थीं शिखा ……
लिखना बडा अज़ीब लग रहा है
लेकिन अब यही सत्य है ..
आज शिखा का निधन हो गया
हमारे परिवार में सबसे बडी विपत्ति बन कर आई यह खबर .वो हमारी बहू थीं,हमारे भतीजे की पत्नी ,
शिखा सिंह मालवीय +(उनका पूरा नाम) बबलू विश्वविजय सिंह की पत्नी थी ,उनकी उम्र मुश्किल से 32 साल थी ,उनके दो बेटे  6 साल का भीम और तीन साल का कृष्णा है .इनकी शादी बबलू से सात साल पहले  पूणे में हुई थी .शिखा रहने वाली थी. इन दोनों ने प्रेम विवाह किया था ,जो हमारे परिवार में पहली बार हुआ था.
शिखा बेहद शुशील सुंदर और व्यवहारिक बहू बनी और सबको प्यार, सम्मान और पारिवारिक रिश्तोँ का आदर करने वाली रही.
मेरा उनसे संपर्क पूणे में तीन चार बार हुआ ,दोनों बच्चे बड़े  प्यारे और बदमाश है.
वे बिलासपुर तो नहीं आ सकी लेकिन शिखा ने मुझे गोवा बार बार आने के लिये आमंत्रित किया .अपनी लापरवाही और स्वास्थ्य के कारण गौवा नहीं जा सका
पूणे में लंबे समय रहने के बाद बबलू ने गोवा में मकान ले लिया था.
हममें से किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कभी हमे यह भी देखना होगा.
दिवाली पर भाई साहब शिखा और दोनों बच्चों को गोवा से लेके आये थे ,बबलू को छुट्टी नही मिल रही थी.
भोपाल में हर साल की तरह पूरे परिवार ने हंसी उल्लास के साथ दिवाली मनाई ,दूसरे दिन गोवर्धन पूजा ,तीसरे दिन भाई दूज में शामिल रही .
( दिवाली 30 अक्टूबर 2016 ,को थी ,)
दिवाली के पांचवें दिन भोपाल में दिनांक तीन अक्टूबर को अपनी मौसी के घर खाना खाने गई थी ,शाम को करीब सात बजे  कृष्णा को कपड़ा पहना रही थी कि उन्हें चक्कर आया और वही गिर गई. आनन फानन में उन्हें हजैला अस्पताल भोपाल ले गये , डाक्टरों ने बताया कि उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ है ,उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया .
डब्बू (सत्येंद्र )ने बताया कि उन्हें एक बड़े अस्पताल बंसल होस्पिटल ले गये . डाक्टरों ने कह दिया था कि बहुत क्रिटिकल स्थिति है .
रात को तीन बजे सीटू +( दिग्विजय )का फोन आया और उसने यह बता कर हम सब को हतप्रभ कर दिया कि “चाचा शिखा भाभी नही रहीं “
तीन नवंम्बर 2016 की सुबह दो बजे वो चली गई .
हम सब असहाय हतप्रभ और ठगे से यह गये .
शोना (शर्मिष्ठा ) बिलासपुर में सबेरे चार बजे रोते हुये अपने घर से यहाँ पहुची .शोना, विक्की  और शिखा लंबे समय तक पूणे में साथ साथ रहे है .
ममता ,पप्पू और हम सब रात में तीन बजे इकठ्ठे हो गये थे .
बबलू को शाम को गोवा खबर की गई थी ,वो बम्बई दिल्ली इन्दौर होते हुये सबेरे आठ बजे भोपाल पहुंच पाये.
दिनांक 5 नवंम्बर 2016 को दोपहर उनकी अंतिम संस्कार भोपाल में किया गया .
एक होनहार संभावनाओं से भरी बिटिया शिखा की कहानी हम लोगों के देखते देखते खतम हो गई.
आज हम सब अपार दुख और पीड़ा में असहाय सा मेहसूस कर रहे है .
भाई साहव ने  इन शब्दों कि साथ सबके बताया .

“” दो दिन पहले अपनी बहू शिखा और दो नातियों 3 एवं 6 वर्ष को गोवा से दीवाली मानाने के भोपाल लाया था।
     आज रात को 2 बजे हार्ट अटैक के कारण मेरी बहु शिखा का बंसल अस्पताल में बेहद दुखद निधन हो गया है।
     मेरे दोनों छोटे छोटे नाती अभी घर में सो रहे है और मेरा बेटा जिसे अभी उसकी पत्नी की मौत के बारे में कुछ नहीं बताया है रास्ते में है ,में उन्हें कैसे बता पाऊंगा ये सोच कर  दिल फटा जा रहा है।
  I am helpless and in deep sorrow. “”

शोना ने शिखा के बारे में कहा :

God looked around his garden and found some empty space. Then he looked down upon earth and found your pretty face..He put his arms around you and lifted you up to rest….. God’s garden must be beautiful… Cuz he only takes the best. I will miss you as much all my life as I did the day you left.      Those special memories will only bring a smile… If only I could have you back for just a little while…. Will miss you a li’ll too much DI…. All my life… 😌😢
****
हम लोग 12 नवंबर को भोपाल पहुच रहे है .
दूर दूर बसना हमेशा कष्टों देता है
खासकर एसे समय .
***
लाखन सिंह
4.11.2016
Bilaspur 

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