जिन्दल के बहुत से कारनामे सारे दुनिया मे जाने जाते हैं ,हमारा छत्तिसगढ़ सबसे ज्यादा उन्हे भोग रहा हैं .

जिन्दल के बहुत से कारनामे सारे दुनिया मे
जाने जाते हैं ,हमारा छत्तिसगढ़ सबसे ज्यादा उन्हे भोग रहा हैं .
करोडो की ज़मीन , फिर भी उसकी विधवा दाने
दाने को मोहताज़ , आदिवासी के साथ फर्जी और अपराधिक  तरीके से ज़मीन हथियाने
वाले के साह पूरा प्रशासन और सरकार खदी दिखती रही है ,और आज भी ऐसा ही हैं .जिस
आदिवासी की ज़मीन पे जिन्दल का पावर प्लांट खडा है उसे २००८ मे जिन्दल ने किसान के
नाम से खरीदी थी . उसे ज़मीन का कितना भुगतान मिला इसका सबसे बड़ा उदहरण यही है की
उसकी विधवा आज काम ना मिलने के कारण भूख मरने की नोबत आ गई हैं .वह एक ठेकेदार के
यहाँ १४० रूपये रोज पे दिहादी का काम करने की मजबूर हैं ,ये काम भी उसे सप्ताह मे
एक दो दिन मिल पाता हैं.पिछले तीन महीन से उसे बीपीएल का राशन भी नहीं मिल पाया
हैं।
आदिवासी भूमि का बेनामी अंत्रण  की
प्रशासनिक जांच मे ये खुलसा हुआ की , तमनार के  सलियाभाटा के संत राम के नाम
पे जिन्दल पावर प्लांट ने १९ जगह १८.४२ हेक्टर जमीन खाीदी ,यानी संत राम ने जितनी
जमीन खरीदी उस पे जिन्दल का कब्ज़ा हैं .तब इस जमीन की कीमत ३६,४३,६०० रूपये थी
.संत राम की पत्नी सुशीला ने बताया की उनके पति जिन्दल के यहाँ चपरासी थे .२००९ मे
उनकी मोत हो गई .मोत के बाद कम्पनी ने शुशीला को अपने यहाँ नोकरी का बहाना बना के
बुलाया ,और उनके पति का डेथ प्रमणपत्र भी जमा कर लिया , जॉ आज तक नहीं लोटाया ,
जिन्दल कानूनी दाव पेच से बचने के लिये
ऐसे ही फर्जी तरीके से करोडो की जमीन खरीद लेते हैं,फिर उस आदिवासी को बेसहारा कर
देते हैं .शुशीला को पता ही नहीं है की उसके पति के नाम करोडो की ज़मीन है ,जहाँ
उसका प्लांट खडा है ,और वो भूख मरने को मजबूर हैं .
उसने बताया की संत राम ने कभी ये तो कहा
था की जिन्दल वालो ने कोर कागज पे अंगूठा लगवाया था ,संत राम को चपरासी बना लिया
,उसे एक पैसा भी नहीं मिला .

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