ताड़मेटला कांड: डीजीपी दिल्ली तलब, दबाव में आठ एसपीओ सस्पेंड, क्या कल्लूरी भी जाएंगे

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राजकुमार सोनी
@CatchHindi | 27 October 2016,

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मनीष कुंजाम की प्रेस कांफ्रेंस में तोडफ़ोड़ करने वाला शख़्स एक तस्वीर में आईजी शिवराम कल्लूरी के साथ फोटो में दिखा छत्तीसगढ़ सरकार ने पुतला जलाने की घटना पर जांच की सिफ़ारिश की, ताड़मेटला समेत तीन गांवों में हुए कांड के लिए आठ स्पेशल पुलिस अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दिया क्या यह कल्लूरी पर दबाव बढ़ने के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और आदिवासियों नेताओं पर यह हमले की शुरुआत है?

बस्तर के तीन गांव ताड़मेटला, तिम्मापुरम और मोरपल्ली में आगजनी, हत्या और बलात्कार छत्तीसगढ़ सरकार के गले की फांस बनती दिख रही है. 21 अक्टूबर को इस कांड की सीबीआई जांच रिपोर्ट आने के बाद राज्य के डीजीपी एएन उपाध्याय और नक्सल ऑपरेशंस के डीजी डीएम अवस्थी को दिल्ली तलब किया गया.

वापस लौटने पर डीजीपी ने आठ विशेष पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश किया है. बावजूद इसके आग ठंडी नहीं हो रही है.

विशेष पुलिस अधिकारियों के नाम वंजम देवा, तेलम कोसा, मडकम भीमा, तेलम नंदा, कीचे नंदा, बर्से रामलाल, सोडी दशरू हैं. राज्य पुलिस ने दोनों दंतेवाड़ा और सुकमा ज़िले के एसपी को कार्रवाई के लिए चिट्ठी भेज दी है.

मगर सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार कहते हैं कि जब सीबीआई की रिपोर्ट में कुल 34 एसपीओ के नाम हैं, तो फिर कार्रवाई का आदेश सिर्फ़ आठ पर क्यों हुआ? वैसे भी ये एसपीओ हैं. कार्रवाई इन्हें हुक्म देने वाले इनके कमांडर शिवराम कल्लूरी पर बनती है. हिमांशु कुमार ने कहा है कि हम कल्लूरी पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाएंगे.

21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश सीबीआई रिपोर्ट और उसके बाद माओवादियों से शांतिवार्ता के सुझाव ने बस्तर में आईजी कल्लूरी के अभियान को गहरा धक्का पहुंचाया है. तभी से जगदलपुर समेत आसपास के इलाक़ों में कुछ ना कुछ घट रहा है.

रिपोर्ट पेश होने के दो दिन बाद 24 अक्टूबर को सहायक आरक्षकों ने जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर में सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत कइयों का पुतला फूंका. पूतला हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, वामपंथी नेता मनीष कुंजाम, आदिवासी नेता सोनी सोरी, वकील शालिनी गेरा और पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम जैसे लोगों का फूंका गया.

मगर छत्तीसगढ़ पुलिस के इतिहास में इस तरह का विरोध प्रदर्शन, वो भी पुलिसवालों की तरफ़ से देखकर राज्य सरकार भी भड़क गई. 26 अक्टूबर यानी बुधवार को गृह विभाग ने बस्तर कमिश्नर दिलीप वासनीकर को पुतला दहन कांड की जांच के निर्देश दिए हैं.

सरकार ने कहा है कि कुछ वर्दीधारियों और सरकारी मुलाज़िमों ने सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का पुतला दहन किया है. राज्य सरकार को इसकी शिकायत मिली है. लिहाज़ा, इसकी प्रशासनिक स्तर पर जांच की जाए.

फंसते कल्लूरी पर कार्रवाई का दबाव तेज़

शिवराम कल्लूरी पर शिकंजा अब कसता जा रहा है. सीबीआई रिपोर्ट के बाद 25 अक्टूबर यानी मंगलवार को कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जगदलपुर में तीखा हमला किया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि ताड़मेटला कांड में पुलिस की भूमिका उजागर होने के बावजूद सरकार कल्लूरी पर मेहरबान है. उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि कल्लूरी के हुक्म पर जवान गलत काम को अंजाम दे रहे हैं. इसी तरह के आरोप सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार और डीयू प्रोफेसर नंदिनी सुंदर ने लगाए हैं.

वामपंथी नेता मनीष कुंजाम ने भी इसी सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर बुधवार को जगदलपुर में प्रेस कांफ्रेंस कर कल्लूरी पर कार्रवाई की मांग की कोशिश की लेकिन इसी दौरान उनपर हमला भी हो गया. आधा दर्जन हमलावरों की अगुवाई कर रहे शख़्स ने चेहरे पर काला कपड़ा बांध रखा था. मगर मज़े की बात यह है इस हमले की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर आईं तो उसमें मौजूद एक शख़्स कल्लूरी और बस्तर एसपी के साथ फोटो क्लिक करवाने वाला निकला.

सोशल मीडिया

आईजी कल्लूरी के बाएं तरफ़ खड़ा शख़्स मनीष कुंजाम पर हुए हमले में शामिल है.

सोशल मीडिया में इसी फोटो के आधार पर यह सवाल भी उठने लगा कि कहीं यह हमला कल्लूरी के इशारे पर तो नहीं करवाया गया. हमलावरों ने कुंजाम से पूछा कि वे बस्तर के बारे में बोलने वाले कौन होते हैं? उन्होंने कुंजाम को धमकी देते हुए कहा कि बस्तर पर बात करने या हिमायती बनने की जरूरत नहीं है. हमलावरों ने प्रेस कांफ्रेंस में रखी कुर्सियां उठाकर फेंक दी. साथ ही, यह भी कहा कि उनके संबंध जेएनयू के कन्हैया कुमार से हैं, इसलिए वे उन्हें देशद्रोही मानते हैं.

माओवाद प्रभावित बस्तर में कुंजाम को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चार गार्ड मुहैया करवाए गए थे, लेकिन बाद में गार्डों की संख्या दो कर दी गई. कुंजाम ने बताया कि उनके सुरक्षाकर्मियों से हथियार वापस ले लिए हैं. अगर उनके पास हथियार होता तो वे हमलावरों को खदेड़ सकते थे, मगर वे निहत्थे खड़े रहे. कुंजाम ने आरोप लगाया कि आईजी कल्लूरी आरएसएस और भगवा बिग्रेड के इशारे पर काम कर रहे हैं.

हालांकि कुंजाम ने इस हमले को लेकर थाने में कोई तहरीर नहीं दी है. उन्होंने दावा ज़रूर किया है कि हमलावरों में एक बाबू बोरई भी हैं जो बीते कुछ समय से अग्नि नामक संगठन में सक्रिय हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार समेत अन्य ने भी सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने और कल्लूरी पर कार्रवाई की मांग का मन लिया है.

संघर्ष समिति

बस्तर पत्रकार संघर्ष समिति के प्रमुख कमल शुक्ला का कहना है कि कुछ महीने पहले बस्तर की पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों का कार्टून सोशल मीडिया पर वायरल किया था. कार्टून में यह बताया गया था कि पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता माओवादियों की दलाली करते हैं.

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले को विधानसभा में जोर-शोर से उठाया तो सरकार ने जांच के निर्देश दे दिए, लेकिन इस मामले की जांच रिपोर्ट भी अब तक सामने नहीं आई है.

पीयूसीएल की प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह का कहना है कि जनसंघर्षों में जुटे हुए लोग इस मामले में तब तक शांत नहीं बैठेंगे, जब तक सरकार कल्लूरी को बर्खास्त नहीं कर देती. लाखन सिंह ने बताया कि 27 अक्टूबर को मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए गुहार लगाएगा.
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