महानता का दावा ही लोकतंत्र का विरोधी है , -हिमांशु कुमार

महानता का दावा ही लोकतंत्र का विरोधी है ,
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दिल्ली आया हुआ हूँ ၊
कल युवाओं के एक प्रशिक्षण में बातचीत के लिये बुलाया गया था ၊
विषय था लोकतन्त्र के सिकुड़ते दायरे और भूख से मुक्ति का आंदोलन ,
मैनें पूछा सबसे महान संस्कृति कौन सी है ?
लगभग सभी ने जवाब दिया भारत की ,
मैने पूछा बताइये क्या क्या महान है इस संस्कृति में ?
यहाँ मेहनत करने वाले नीच जात माने जाते हैं ,
यहाँ औरतों की हालत गुलामों जैसी है ,
यहाँ मेहनत करने वाले गरीब और बैठ के मजे करने वाले अमीर माने गये ,
एक ने कहा कि यहाँ गंगा यमुना हैं और राम कृष्ण हैं इसलिये महान है ,
मैनें कहा हर देश में अलग – अलग नदियां होती हैं ,
कोई नदियों से महान होता है क्या ?
राम कृष्ण तो मिथक हैं ,
हर देश की संस्कृति में अपने अपने मिथक यानी काल्पनिक पात्र होते हैं ,
अपने काल्पनिक पात्रों की वजह से कोई देश महान कैसे हो सकता है ?
मैने आगे कहा,
महानता का दावा एक षडयंत्र है ,
आपका ध्यान भूख से हटाने के लिये
अपको महानता के नशे मे फंसा दिया जाता है ,
और आपको मूर्ख बना कर सत्ता अपने हाथ मे ले ली जाती है ,
और फिर अमीरों के फायदे के लिये सरकार काम करती है ,
याद रखिये दुनिया का कोई इन्सान महान नहीं है ,
सब एक बराबर हैं ,
कोई देश किसी दूसरे देश से ज़्यादा महान नहीं है ,
सब एक जैसे हैं ,
महानता का दावा ही लोकतंत्र का विरोधी है ,
अगर कोई आपसे संस्कृति की महानता या धर्म की महानता या राष्ट्र की महानता की बात करे,
 तो जवाब मे उससे भूख , राशन , बेराज़गारी की बात कीजिये ,
राजनीति भूख और इन्सान के मुद्दों पर होनी चाहिये ,
पांच हज़ार साल पहले के मर्यादा पुरोषोत्तम या ऋषि मुनियों के नाम पर राजनीति आपकी भूख और बेरोज़गारी की मांग को दबाने की साजिश है ,
इस महानता की साजिश से नकलिये ,
हकीकत की ज़मीन पर खड़े होकर असली मुद्दों पर जवाब मांगिये,
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हिमांशु कुमार 

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