आदिवासियों की जमीन हड़प रहा गिरोहरोक लगे वर्ना होंगे घातक परिणाम

आदिवासियों की जमीन हड़प रहा गिरोहरोक लगे वर्ना होंगे घातक परिणाम

क्या है मामला

 रायगढ़ निवासी घसिया आत्मज कैरा जाति खडिया ने राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष टी. राधाकृष्ण के समक्ष २ दिसबंर को राजस्व संहिता की धारा ८ के तहत आवेदन किया कि रायगढ़ जिले के ग्राम बड़े अतरमुंडा स्थित अपनी जमीन ०.२४७ हेक्टेयर को वह गगन राठी को बेचना चाहता है आवेदक खडिया आदिमजाति का है, इसलिए उसे जमीन बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति आवश्यक है, लेकिन रायगढ़ कलेक्टर ने विक्रय की अनुमति प्रतिबंधित कर रखी है इसी आवेदन में कहा गया कि आदिम जाति अनुसंधान संस्थान ने ७ जनवरी २००८ के एक पत्र में खुलासा किया है कि खडिया किसी भी राज्य की आदिम जनजाति की सूची में नहीं है तत्कालीन अध्यक्ष राजस्व मंडल ने अगले दिन यानी ३ दिसंबर, २०१० को उस जमीन को बेचने की अनुमति धारा १६५(६) एवं १६५(७) के तहत प्रदान की इस मामले सहित इसी तरह के कई अन्य मामलों को राजस्व मंडल के मौजूदा अध्यक्ष श्री मिश्र ने कतिपय अनियमितता पाए जाने पर धारा ५१ के तहत स्वमेव पुनर्विलोकन में ग्राह्य किया

छल-कपट ऐसे हुआ

राजस्व मंडल की चेतावनी

 पट्टेधारियों के फर्जी आवेदन से जमीन के हस्तांतरण के ५० मामलों के पुनरावलोकन से खुला राज-॥-राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष ने दिया था कानून के खिलाफ स्वेच्छाचारी फैसला

क्या है गड़बड़ी

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जिया कुरैशी रायपुर
छत्तीसगढ़ में राजस्व मामलों की सुनवाई के दौरान संभवतः पहली बार राजस्व मामलों के न्यायालय ने बेहद नाराजगी के साथ कहा है कि रायगढ़ जिले में कपटपूर्ण तरीके से गरीब, अनपढ़ आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए कोई गिरोह काम कर रहा है इसे यदि नहीं रोका गया तो इसके घातक परिणाम होंगे 
।छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल के अध्यक्ष डीएस मिश्र ने एक पुनर्विलोकन मामले में जारी आदेश में यह बात कही है खास बात यह है कि आदिवासियों की जमीन हड़पने के ऐसे बहुत से मामलों में राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष टी. राधाकृष्णन के न्यायालय से कानून विरोधी आदेश जारी कर आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित की गई है
 राजस्व मंडल ने आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को बेचे जाने संबंधी कई मामलों की सुनवाई के दौरान पाया है कि करीब ५० मामलों में राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष ने एक ही प्रकार के आदेश जारी किए हैं
 ताजा मामले में राजस्व मंडल ने पूर्व अध्यक्ष द्वारा जारी किए गए आदेश को विधि विरुद्ध और स्वेच्छाचारी कहा है छत्तीसगढ़ शासन विरुद्ध घसिया, गगन राठी के मामले में पाया गया है कि समस्त प्रकार के विधिक प्रावधानों तथा कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए जिस हड़बड़ी के साथ इस प्रकरण में कार्रवाई की गई है और मात्र दो दिन में आदेश पारित किया गया है, उससे यह आदेश स्पष्टतः दुर्भावनापूर्ण एवं कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होना प्रतीत होता है
राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में धारा १६७(७-बी) के तहत शासकीय पट्टे की जमीन विक्रय की अनुमति से संबंधित ५० मामलों मे पट्टाधारियों ने राजस्व मंडल में उपस्थित होकर बताया कि उन्होंने कभी भी अपने पट्टे की भूमि को बेचने का सौदा नहीं किया, न ही बेचने के लिए अनुमति का कोई आवेदन किया और न ही आवेदन पर उनका हस्ताक्षर है इन्ही में से एक बीरबल नामक व्यक्ति के आवेदन में उसके अंगूठे का निशान है,
 जबकि न्याायालय में प्रस्तुत उसके आवेदन में हस्ताक्षर दर्ज है घसिया के प्रकरण में दर्ज हस्ताक्षर के फर्जी होने की आशंका राजस्व मंडल ने जताई है यानी जिन आदिवासी लोगों के नाम की जमीन गैर-आदिवासियों के नाम करने राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए गए, वे पूरी तरह फर्जी थे, लेकिन उनमें जमीन गैर-आदिवासियों के नाम करने के आदेश जारी किए गएपुनर्विलोकन में पाया गया कि आदिम जनजातियों की सूची में खडिया शामिल है यानी न्यायालय के आवेदक घसिया ने गलत जानकारी दी तत्कालीन राजस्व मंडल के अध्यक्ष आवेदक द्वारा दी गई गलत जानकारी को ही मान्य किया जमीन बेचने की अनुमति देने से पहले उस पत्र की जांच भी नहीं की गई, जिसके मुताबिक खडिया को आदिम जाति न होने की बात कही गई थी जिस धारा के तहत जमीन बेचने का आदेश दिया गया था, उसके तहत राजस्व मंडल को जमीन बेचने की अनुमति देने का अधिकार ही नहीं है 
यह भी पाया गया कि तत्कालीन अध्यक्ष ने धारा ८ के तहत न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश पारित किया, वह भी कानून के अनुरूप नहीं है इस मामले में तत्कालीन सरकारी वकील की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है आदेश में लिखा गया है- सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आवेदक की बी-वन की प्रति १९६७ की है, जो प्रमाणित नहीं है इस अप्रमाणित अभिलेख को मान्य करते हुए उक्त भूमि के मालिकाना हक की जांच किए बिना विक्रय की अनुमति दी गई है इसे भी विचित्र तथ्य माना गया है कि धारा १६७(७) के तहत शासकीय पट्टे की जमीन के विक्रय की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन आवेदक की भूमि निजी थी
क्या है मामला
 रायगढ़ निवासी घसिया आत्मज कैरा जाति खडिया ने राजस्व मंडल के पूर्व अध्यक्ष टी. राधाकृष्ण के समक्ष २ दिसबंर को राजस्व संहिता की धारा ८ के तहत आवेदन किया कि रायगढ़ जिले के ग्राम बड़े अतरमुंडा स्थित अपनी जमीन ०.२४७ हेक्टेयर को वह गगन राठी को बेचना चाहता है आवेदक खडिया आदिमजाति का है, इसलिए उसे जमीन बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति आवश्यक है,
 लेकिन रायगढ़ कलेक्टर ने विक्रय की अनुमति प्रतिबंधित कर रखी है इसी आवेदन में कहा गया कि आदिम जाति अनुसंधान संस्थान ने ७ जनवरी २००८ के एक पत्र में खुलासा किया है कि खडिया किसी भी राज्य की आदिम जनजाति की सूची में नहीं है तत्कालीन अध्यक्ष राजस्व मंडल ने अगले दिन यानी ३ दिसंबर, २०१० को उस जमीन को बेचने की अनुमति धारा १६५(६) एवं १६५(७) के तहत प्रदान की इस मामले सहित इसी तरह के कई अन्य मामलों को राजस्व मंडल के मौजूदा अध्यक्ष श्री मिश्र ने कतिपय अनियमितता पाए जाने पर धारा ५१ के तहत स्वमेव पुनर्विलोकन में ग्राह्य किया
इसी आधार पर जाहिर हुई जमीन हड़पने वाले गिरोह की आशंका : राजस्व मंडल ने आदेश में इन सभी मामलों पर गौर करने के बाद अपने आदेश में कहा है कि इससे स्पष्ट है कि संपूर्ण कपटपूर्ण कार्रवाई के पीछे कोई गिरोह सक्रिय है और सुनियोजित ढंग से इन गरीब अनपढ़ पट्टेधारियों तथा आदिम जनजाति के रायगढ़ जिले के भूमि स्वामियों कि जमीन हड़पने का काम कर रहा है आदेश में लिखा गया है-दिलचस्प बात यह है कि इन सभी प्रकरण में खरीदार मात्र दो व्यक्ति गगन राठी और पवन चौहान, जो रायगढ़ निवासी हैं, यही लोग इस गिरोह के सरगना हो सकते हैं

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