छत्तीसगढ़ में हजारों आदिवासी भगत सिंह की तरह जेलों में पड़े हैं जेल में ही मार डाले जा रहे हैं .
himanshu kaumar 

आज भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को जेल में फांसी दी गयी थी .
छत्तीसगढ़ में हजारों आदिवासी भगत सिंह की तरह जेलों में पड़े हैं जेल में ही मार डाले जा रहे हैं .
इन सब के खिलाफ़ आज छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आदिवासी एक रैली करने की कोशिश कर रहे हैं .
हजारों आदिवासी कल से ही अपने गाँव से निकल कर दंतेवाड़ा में इकट्ठा होकर अपने साथी आदिवासियों को जेल से रिहा करने उनके मुकदमों की सुनवाइयां समय पर करने की मांग करने के लिए चल पड़े हैं .
कल से ही पुलिस और अर्ध सैनिक बलों के सिपाही और पुलिस आदिवासियों पर रास्ते में हमले कर रहे हैं , आदिवासियों को पीट रहे हैं .
अभी कुछ देर पहले किरंदुल थाने में बड़ी संख्या में आदिवासियों को रोका गया , सूचना मिलने पर सोनी सोरी और लिंगा कोडोपी थाने में पहुंचे और उन्होंने पुलिस अधिकारी एसडीओपी बेग से पूछा कि आपने आदिवासियों को क्यों पकड़ा है तो पुलिस के जवानों ने सोनी सोरी को गालियाँ दी और मारने के लिए लाठियां लेकर सोनी पर हमला करने की कोशिश करी .
सोनी और लिंगा का कहना है कि सरकार कितना भी दमन करे लेकिन हम जेल में बंद निर्दोष आदिवासी साथियों के अधिकारों के लिए ये रैली ज़रूर करेंगे .
छत्तीसगढ़ में भाजपा का राज है .
ये संघी भाजपाई वैसे अपने कार्यालयों में भगत सिंह की फोटो लटकाते हैं लेकिन जब कोई असलियत में भगत सिंह के रास्ते पर पर चलता है तो ये भाजपाई घबरा जाते हैं और उस पर हमला कर बैठते हैं .
इन भाजपाईयों ,संघियों को कश्मीर चाहिये लेकिन कश्मीरी नहीं चाहिये ,
बस्तर की ज़मीन चाहिये लेकिन आदिवासी नहीं चाहिये .
यही तो अँगरेज़ करते थे .
उन्हें भी भारत की दौलत चाहिये थी
लेकिन भारतीय पसंद नहीं थे ,
इसे ही साम्राज्यवाद कहते हैं
इसीलिये भगत सिंह ने कहा साम्राज्यवाद मुर्दाबाद
और बदलाव लाना है इसलिए इन्कलाब ज़िन्दाबाद
इन्कलाब जिंदाबाद
साम्राज्यवाद मुर्दाबाद

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