36 संगठनों के समर्थन वाली तिरंगा यात्रा में 10 लोग भी नहीं – मिश्रा
उद्देश्य तिरंगा फहराना या फिर प्रजातांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करना

जगदलपुर, 12 अगस्त। नक्सलवाद एवं आतंकवाद के खिलाफ गठित संस्था अग्रि के राष्ट्रीय संयोजक आनंद मोहन मिश्रा ने सोनी सोढ़ी की तिरंगा यात्रा को नाटक नौटंकी निरूपित करते हुए कहा कि देश भर में 36 संगठनों का सहयोग बताने वाली यात्रा का यह हाल की यात्रा में गिनती के 10 लोग भी नहीं हैं। शायद यात्रा में शामिल नहीं होने वालों की, तिरंगे के प्रति आस्था नहीं रही होगी।

श्री मिश्रा ने कहा कि अब यह तो स्पष्ट हो गया है कि तिरंगा यात्रा के  बहाने सोनी सोढ़ी सरकार और प्रशासन को बदनाम करना चाहती है। उनकी कोशिश थी कि 36 संगठन के लोग बस्तर आएं और यहां अराजकता फैले, किंतु वे अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पायीं। सोनी सोढ़ी की पूर्व की गतिविधियों के मद्देनजर ही स्थानीय लोगों ने पूरी तरह उनसे किनारा कस लिया है और समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसीलिए यात्रा में शामिल होने लोग नहीं मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यात्रा में गिनती के लोग ही शामिल हैं। कुछ वापस चले गये हैं और कुछ दंतेवाड़ा जाकर लॉज में रह रहे हैं, सोनी सोढ़ी वाहन में यात्रा कर रही हैं। यात्रा में शामिल उपरोक्त लोग जेएनयू खालिद गैंग का खुल कर समर्थन करते आये हैं, हम चाहते हैं कि हमारा पवित्र-प्यारा तिरंगा नियत स्थल पर फहराया जाये, किंतु इन की संदिग्ध गतिविधियों से हम आशंकित हैं कि ये लोग वास्तव में तिरंगा फहराना चाहते हैं या केवल विश्व के सामने हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करना चाहते हैं।

विफल यात्रा को समाप्त करने पुलिस को बदनाम कर रहे – बेंजामिन

इधर छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फोरम के उपाध्यक्ष रत्नेश बेंजामिन ने कहा कि तिरंगा यात्रा झूठ का पुलिंदा निकला, जिस तरह से इसे देश में प्रचारित कर हो हल्ला किया गया, उसकी जमीनी हकीकत यह है कि यात्रा में दस लोग भी नहीं जुट रहे हैं। यात्रा में शामिल 10 लोगों में 6 बस्तर के बाहर के हैं। उन्होंने कहा कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने सोनी सोरी पूर्व की तरह इस बार भी पुलिस पर बेबुनियाद एवं कपोल कल्पित आरोप लगा रही हैं। यदि उन्हें किसी ने धमकी दी तो उन्होंने उस वाहन और लोगों को मोबाईल से शूट क्यों नहीं किया, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता। दरअसल यह समूचा ड्रामा यात्रा को समाप्त करने के रचा जा रहा है, क्योंकि स्थानीय और बाहरी दोनों ओर से समर्थन न मिलने से सोनी सोढ़ी बुरी तरह विचलित हो गयी हैं और यात्रा समाप्त करने की कोई बढिय़ा सी तरकीब ढूंढ रही हैं।

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