कल्लूरी का ऑक्सिजन खत्म हुआ और बस्तर में बुझ गई अग्नि

राजकुमार सोनी
@CatchHindi | 10 February 2017, 8:35 IST
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यह वैज्ञानिक तथ्य है कि अग्नि सिर्फ ऑक्सिजन की सहायता से ही जलती है. ऑक्सिजन खत्म तो आग बुझ जाती है.

बस्तर में चल रही अग्नि भी इसी वैज्ञानिक तथ्य का शिकार हुई. कल्लूरी नाम की ऑक्सिजन जैसे ही बस्तर में बंद हुई माओवाद से लोहा लेने वाली अग्नि भी गुरुवार को बुझ गई.

बस्तर से माओवाद उन्मूलन में पुलिस के साथ सहयोग कर रही संस्था ‘अग्नि’ को यहां के आईजी रहे एसआरपी कल्लूरी का दिया गया आश्वासन भी काम नहीं आया. गुरुवार को इस संगठन को भंग कर दिया गया.

अग्नि (एक्शन ग्रुप ऑफ नेशनल इंटीग्रिटी) के सदस्यों ने इसके गठन के दौरान एक मशाल जलाकर शपथ ली गई थी कि, जब तक बस्तर इलाके से माओवाद का खात्मा नहीं कर देंगे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे. लेकिन बस्तर से आईजी शिवराम कल्लूरी की विदाई के साथ ही अग्नि संस्था भंग कर दी गई. कुछ दिन पहले ही बस्तर के पूर्व पुलिस आई शिवराम कल्लूरी को सरकार ने जबरन लंबी छुट्टी पर भेजने के बाद अब उन्हें रायपुर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है.

बस्तर में यह एक खुला सच था कि अग्नि को शिवराम कल्लूरी का खुला संरक्षण मिला हुआ था

अग्नि के राष्ट्रीय संयोजक आनंद मोहन मिश्रा ने बताया, ‘अग्नि सरकार और पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लोकतांत्रिक तरीके से माओवाद का विरोध कर रही थीं, लेकिन मौजूदा परिस्थिति ऐसी नहीं थीं कि संस्था को बहुत लंबा खींचा जाता. इसलिए इसे भंग कर दिया गया है.’

बस्तर में यह एक खुला सच था कि अग्नि को शिवराम कल्लूरी का खुला संरक्षण मिला हुआ था. संस्था के लोग कल्लूरी के इशारे पर सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकारवादियों और कानूनी विशेषज्ञों को परेशान करने के काम में लगे हुए थे.

बस्तर में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार का कहना है, ‘हमने अग्नि से मुकाबले के लिए पीपुल्स एक्शन फॉर नॉन वायलेंस इंडिया यानी पानी नाम की एक गैर पंजीकृत संस्था शुरू की थी. हमारी संस्था ने अभी ठीक-ठाक तरीके से पानी का छिड़काव भी नहीं किया था कि अग्नि बुझ गई.’

उन्होंने कहा, ‘भले ही अग्नि का अस्तित्व समाप्त हो चुका है, लेकिन इससे जुड़े लोगों ने बस्तर में सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, अधिवक्ताओं और बेगुनाह आदिवासियों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए जो षडयंत्र रचा था उसे हर हाल में कानून के दायरे में लाया जाएगा.’

सलवा जुडूम पार्ट टू

बस्तर में माओवाद के खात्मे के लिए अलग-अलग तरीके से कई तरह के अभियान संचालित किए जाते रहे हैं. कभी हल्ला बोल कार्यक्रम चलाया गया, तो कभी आदिवासियों के स्वत:स्फूर्त आंदोलन के नाम पर सलवा-जुडूम अभियान संचालित किया जाता रहा है.

आदिवासियों को हथियार थमाकर माओवादियों से मुकाबला की योजना पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद जब बस्तर में सलवा-जुडूम को बंद कर दिया गया तो एक नए छद्म संगठन सामाजिक एकता मंच का उदय हुआ. इस संस्था की उत्पति के साथ ही यह दावा किया गया कि देर-सबेर माओवाद का खात्मा कर दिया जाएगा, लेकिन मंच की बैठक आईजी कल्लूरी के निवास पर होने तथा सामाजिक-मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर प्रताड़ना के आरोपों के साथ ही यह संस्था विवादों में घिर गई.

अप्रैल 2016 में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान ही सामाजिक एकता मंच को भंग कर दिया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही मंच से जुड़े लोगों ने एक नए संगठन के नीचे पनाह ले ली. इस बार माओवाद के खात्मे के नाम पर अग्नि नामक संस्था का गठन किया गया.

फंड कहां से लाते?

अग्नि के भंग होने के साथ ही यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या बस्तर से माओवाद का सफाया हो गया है? पीयूसीएल के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह कहते हैं, ‘अग्नि में देशभक्ति और राष्ट्रवाद को पोषित करने के नाम पर आसामाजिक तत्व जुड़े हुए थे. इस संस्था को कभी भी इस बात से वास्ता नहीं था कि माओवाद की समस्या से निजात पाने के लिए किस तरह की कोशिश होनी चाहिए. सब जानते हैं, माओवाद के खात्मे के लिए केंद्र से भारी-भरकम फंड मिलता है. इस संस्था को मुखबिरों को दिया जाने वाला वह पैसा दिया जाता था जिसका ऑडिट नहीं होता है.’

लाखन सिंह के मुताबिक बस्तर में माओवादियों से मुकाबले के नाम पर जितनी भी रैलियां, सभाएं होती थी वह सभी प्रायोजित होती थी. ऐसे में जब कल्लूरी हटा दिए गए हैं तब अग्नि संस्था के लोगों को बताना चाहिए कि माओवाद से दो-दो हाथ करते रहने का उनका संकल्प दिखावा मात्र था या आईजी कल्लूरी के हटते ही संकल्प ध्वस्त हो गया.

सरकारी पैसे की ऑक्सिजन पर चल रही अग्नि ऑक्सिजन खत्म होते ही बुझ गई.

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