कोयला निकाल रही कंपनियां चुकाएंगी साढ़े तीन हजार करोड

[ भास्कर]

कोयला निकाल रही कंपनियां चुकाएंगी साढ़े तीन हजार करोड़
रायपुर. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ से कोयला निकाल रही कंपनियों को जुर्माने के हजारों करोड़ रुपए चुकाने होंगे। अभी प्रदेश के सात कोल ब्लॉकों से कोयला निकाला जा रहा। इनसे अब तक 125 लाख टन से ज्यादा कोयला निकाला गया है। ऐसे में कंपनियों को साढ़े तीन हजार करोड़ से  ज्यादा जुर्माना देना होगा।
 
सुप्रीम कोर्ट ने निकाले गए कोयले पर प्रति टन 295 रुपए अतिरिक्त लेवी लेने के आदेश दिए हैं। कोल ब्लॉक आवंटन के रद्द होने से लाखों  करोड़ों रुपए के निवेश की योजना पर पानी फिर गया है। वहीं प्रदेश में कंपनियों के 100 नए पॉवर प्रोजेक्टों को भी झटका लगा है। 

उनके प्लांट आदि बनकर  तैयार हो चुके हैं। सूत्रों की मानें तो   इसके अलावा उन कंपनियों को भी भारी झटका लगा है जिन्हें अतिरिक्त लेवी की राशि चुकाने को कहा गया है। इनमें कई स्टील कंपनियां शामिल हैं।
 
…तो राज्य सरकार का भरेगा खजाना
 
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कंपनियों से मिलने वाली अतिरिक्त लेवी की राशि केंद्र के खाते में जाएगी या राज्य सरकार को मिलेगी। यह अभी तय नहीं हो पाया है। लेकिन खनिज विभाग से जुड़े उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो खनन से मिलने    वाली लेवी का एक बड़ा हिस्सा राज्य सरकार को मिलता है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मिलने वाली लेवी में राज्य का भी हिस्सा रहेगा, यह तो तय है,  लेकिन यह राशि कितनी होगी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अभी यह साफ नहीं किया है।
 
नवभारत का मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंपें  : बघेल
 
कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि नवभारत कोलफील्ड्स प्राइवेट लिमिटेड को कोल आवंटन के लिए राज्य शासन ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अनुशंसा भेजी। इसके संचालकों में भाजपा नेत्री नीना सिंह भी हैं। इस कंपनी के पास एक मिलियन टन स्पंज आयरन प्लांट और दो सौ मेगावाट का पावर प्लांट स्थापित होना बताया गया था।  कागजों में कंपनी की संपत्ति 7.84 करोड़ रुपए दिखाई गई थी, हकीकत में कुछ नहीं था। उन्होंने मामला जांच के लिए सीबीआई को देने की मांग की।
 
नवभारत फ्यूज ने कोल ब्लाक के अपने 75 प्रतिशत शेयर मेसर्स सोलर एक्सप्लोसिव लिमिटेड नागपुर को बेच दिये। यह मामला स्व. नंदकुमार पटेल ने विधानसभा में उठाया था। बघेल ने मांग की है कि इस घोटाले की जांच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीसीबीआई से कराएं। इनके साथ ही कोयला एवं लौह अयस्क, बॉक्साइट एवं चूना पत्थर खदानों के आवंटन की उच्च स्तरीय जांच कराएं और मुख्यमंत्री व तत्कालीन मुख्य सचिव के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करें।

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