# बस्तर की पुलिस का लोकतंत्र और न्यायपालिका पर भरोसा नहीं ,
# न्यायलय से बरी और जमानत पर छूटे ग्रामीणों की कर रही हत्या

       एक तरफ आजादी के 69 साल बाद गोमपाड़ में तिरंगा फहरा कर सोनी सोरी देश के लोकतंत्र और संविधान के प्रति आदिवासियों का विश्वास जगा रही थी , तो ठीक इसी समय बस्तर के आईजी शिवराम प्रसाद कल्लूरी और बस्तर के पुलिस अधीक्षक राजेंद्र नारायण दास प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वतंत्रता दिवस की भेंट के नामपर देश के संविधान , लोकतंत्र और कानून की हत्या करते हुए एक आदिवासी युवक को उसके घर से उठाकर बलि देने का षड्यंत्र कर रहे थे |
      माचकोट एलजीएस सदस्य और जनमिलिशिया कमांडर बताकर जिस अर्जुन को आजादी की वर्षगांठ की रात मारा गया है , वह अभी जमानत पर जेल से बाहर आया था | इसी बस्तर पुलिस ने उसे 17 की उम्र में ही फर्जी मामलों में गिरफ्तार कर सालभर पहले गैरकानूनी ढंग से जेल भेज दिया था , पिछले दो महीने पहले ही उसे जमानत मिला था | वह अपनी पेशी में भी बराबर उपस्थित हो रहा था | पुलिस उसके खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य भी नहीं जुटा पाई थी , तो अब उसे खुद ही सजा दे दी | पुलिस प्रवक्ताओं ने इसे नाम लेकर बस्तर एसपी और कल्लूरी की बहादुरी बताया है |
        बस्तर पुलिस पहले भी जेल से बाईज्जत बरी होकर आये कई निर्दोष ग्रामीणों को नक्सली बताकर ईनामी नक्सली बता कर मार चुकी है | गोमपाड़ के हिड़मा को भी जेल से छूटकर आने के मात्र सात दिन बाद ही एक लाख का ईनामी बता कर मार दिया गया था |  सुकमा पुलिस तो फर्जी मामलों से  बाईज्जत बरी हो चुके आयता को तीन बार फिर से पकड़ कर जेल भेज चुकी है | मैं देशभर के पत्रकारों को आमंत्रित करता हूँ कि वे कानून और न्यायालय पर भरोसा नहीं करने वाली बस्तर की पुलिस के इन आपराधिक कृत्यों को देश के सामने लाकर इन्हें सजा
 दिलाने में सहयोग करें |
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कमल शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार

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