माओवादियों द्वारा अपहरण किये गये सिपाही कलमू हिडमें  ,से सुरक्षा बल और सरकार  बेखब़र .
सोनी सोरी के प्रयास के खिलाफ खड़ी है छत्तीसगढ़ पुलिस.
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माओवादियों ने पुलिस के सिपाही का अपहरण कर लिया .
सिपाही आदिवासी और निर्धन परिवार से आता है उसका नाम है कलमू हिडमे सीआरपीएफ कैम्प में पोस्टेड था और अपनी बच्ची का इलाज करवा कर छुट्टी खतम होने पर कैम्प लौट रहा था.
रास्ते में माओवादियों ने पूछताछ के बाद उसे पकड कर ले गये ,सीआरपीएफ को इस अपहण की जानकारी तक नही मिली ,शाम को जब गिनती हुई तब मालुम हुआ कि उनका जवान का अपहरण हो गया है .
एसे ही कुछ साल पहले कलेक्टर का अपहरण कर लिया था तब छत्तीसगढ़ सरकार और केन्द्र ने जमीन आसमान एक कर दिया था, अब जब तीन चार दिन होने को आये पुलिस और सरकार में कोई हलचल नहीं है .
न कोई मध्यस्थ न कोई और प्रयास ,क्यों ?
क्योंकि कि सरकार मूल आदिवासियों को चारे की तरह स्तेमाल करना जानती है .

** सोनी सोरी ने माओवादियों से की अपील दो दिन पहले वो भी खुद आगे होकर .पुलिस ने उनसे संपर्क नहीं किया .
खैर ,
बस्तर बचाओ सयुक्त संघर्ष समिति के कार्यकर्ति और सोनी ने उस गांव में जाने की कोशिश की तो उल्टे पुलिस उनको ही रोकने लगी
पूरे घटनाक्रम पर संकेत ठाकुर की रिपोर्ट
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माओवादियों द्वारा अपह्यत  सहायक आरक्षक कलमु हिडमो का अभी तक कुछ पता नही, सरकार उदासीन –  सोनी सोरी
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आज माओवादियों द्वारा अपह्यत  सहायक आरक्षक कलमु हिडमो के घरवालों से मिलने सोनी सोरी के नेतृत्व  में बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के सामाजिक कार्यकर्ताओ की  टीम सुकमा जिला के पोलमपल्ली गांव रवाना हुई । लेकिन गादीरास थाना और बाद में सुकमा पुलिस टीम के द्वारा उन्हें  जानबूझकर रोका गया ।

उल्लेखनीय है कि पुसवाड़ा सीआरपीएफ केम्प में पदस्थ सहायक आरक्षक कलमू हिडमो का अपहरण माओवादियों ने अपनी बच्ची का इलाज कराकर अपने गांव पोलमपल्ली लौटने के दौरान 31 अक्टूवर को कर लिया था । वारदात के 4 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होता देखकर सोनी सोरी ने स्वयं पहल करते हुए माओवादियों से आरक्षक के रिहाई अपील 2 दिन पूर्व की थी और आज कोई हल नही निकलता देख मामले की जाँच करने  पोलमपल्ली जाने का फैसला किया ।

 लगता है कि जिला प्रशासन अपने ही सहायकआरक्षक  कलमू की रिहाई के लिये गम्भीर नही  है । बल्कि इसके उलट आज सोनी सोरी और उनके साथियो सुकुलधर नाग, अरविन्द गुप्ता, लिंगाराम कोडोपी को पोलमपल्ली जाने से रोकने की कोशिश की गई जिस कारण उनका 2 घण्टे से अधिक का समय गादीरास और सुकमा में पुलिस द्वारा बर्बाद करवा दिया गया । अँधेरा हो जाने के कारण  वे दोरनापाल के निकट से वापसी को मजबूर कर दी गई ।

 सोनी सोरी का कहना है कि बस्तर के आदिवासियों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार बिलकुल भी गम्भीर नहीं है । सहायक आरक्षक स्थानीय आदिवासी है इसलिये सरकार ने उसे व उसके परिवार को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया है ।
 
सोनी सोरी कल अपने साथियो सुकुलधर नाग, अरविन्द गुप्ता, लिंगाराम कोडोपी के कल पुनः जाने का प्रयास करेंगी ।
अभी थोड़ी देर पहले  ही मेरी सोनी सोरी से बात हुई है . संकेत ठाकुर
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