राशन और सब्सिडी जैसी तुच्छ चीजे इनके प्राथमिकता से कोसो दूर हैं , इन्होने तो चुनाव मे भी यही कहा था , अब आपने नहीं सुना तो हमारा क्या दोष .

छत्तीसगढ सरकार बड़ी परेशान दिख रही है ,क्योकि रमनसिंह की तो सारी राजनीति ही एक दो रुपये चावल की थी ,और उसका लाभ भी उन्होने 12 साल से उठाया भी हैं ,अब जो भी उन्होने घोषणा की वे सब उनके लिये उल्टी पड़ रही हैं , हालत ये है की चुनाव के पहले सरकार ने 70 लाख राशन कार्ड बना दिया , सीधा हिसाब लगाये तो 70 लाख कार्ड का मतलब है ,यदि 5 लोगो का प्रति परि

राशन और सब्सिडी जैसी तुच्छ चीजे इनके प्राथमिकता से कोसो दूर हैं , इन्होने तो चुनाव मे भी यही कहा था , अब आपने नहीं सुना तो हमारा क्या दोष .

वार भी मन लिया जाये तो 3,5 करोड़ कुल जनसंख्या होती हैं जब की प्रदेश की कुल जनसंख्या ही 2,25 करोड़ हैं ,

सरकार ने 70 लाख मे से 10 लाख राशन कार्ड निरस्त कर दिया यानी लगभग 50 लाख लोगो का राशन बंद ,10 राशन कार्ड का हिसाब लगने के लिये आपको केलुकेलटर लेके मेरे स्थ बैठना पड़ेगा , अब सबसे पहले तो 10 लाख को 35 किलो प्रति परिवार प्रति माह राशन के हिसाब से गुना करिये ,जो गुणफल आये ,उसमे 12 माह का दुबारा गुना करिये जिससे एक साल का हिसाब आये ,अब जो फल आये उसमे लांसे लाम पांच साल का गुणा कर दीजिये , भाई अभी रुकिये जो चावल का वजन आया हैं उसे कामसे काम 14 रुपये से गुणा करिये , देखते रहिये की कही आपका केलुकेलटर बंद ना हो जाये ,तो भाई जो राशि निकली है उसका हिसाब कों देगा, यही सारा घपला हैं ,जिसके बाल पे भाजपा चुनाव जीत के आई हैं

अब मूल समस्या सरकार के पास ये आई की इन सब घोटाले मे सरकारी धन की बंदरबांट होने से सरकारी खजाना बहुत आं हो गया ,रमण सिंह ने केन्द्रसरकार से गुहार लगाई की भाई हमे विशेष राजाइया का दर्जा दे दीजिये ,हमने जनता से वायदा किया था ,की जितने के बाद दर्जा मिलेगा ,और ये भी कहा था की किसानो को धान पे बोनस दिया जायेगा , लेकिन केन्द्र ने दोनो से साफ इंकार का र्दिया ,

, राज्य शाशन ने हॉस्टल मे मिलने वाला प्रतिमाह चावल 15 किलो की जगह 7 किलो कर र्दिया , और विकलांग ,बुजुर्ग ,महिला और निरासरित महलाओ को 35 किलो की जगह केवल 20 किलो चावल कर दिया .स्कूलो मे मध्यान्ह भोजन भी कतोत्री की जा रही हैं ,,कुल मिला के जिस चावल के बल पे रमनसिंह चुनाव जीते थे वो सब एक दम खतम करने की फिराक़ मे हैं ,

मोदी जब गुजरात मेथे एटाब भी केन्द्रा के मिलने वाला अनाज़ उठाया ही नहीं था ,और जिन योजनाओ मे सब्सिडी गुजरात को मिली उसका 30 प्रतिशत भी उपयोग नहीं किया ,कारण ये है की उनकी मुल धारना यही है की अनुदान कम से कम करके उसे खतम कर दिया जाये ,लेकिन सारी सब्सिडी कारपोरेट को देने मे कोई प्रोबलम नहीं हैं ,

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