गरीब और दलितों को ही मिलता है मृत्युदंड: विधि आयोग प्रमुख

गरीब और दलितों को ही मिलता है मृत्युदंड: विधि आयोग प्रमुख

भाषा

नई दिल्ली

फांसी आमतौर पर गरीबों और दलितों को ही होने की बात पर गौर करते हुए विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एपी शाह ने कहा है कि देश में मौत की सजा पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शाह ने कहा, ‘आम तौर पर गरीब और दलित ही मौत की सजा पाते हैं। मृत्युदंड गरीबों को अधिक मिलता है।’

उन्होंने कहा, ‘व्यवस्था में विसंगतियां हैं और अपराध के लिए दंडित करने के वैकल्पिक मॉडल की आवश्यकता है और भारत में मृत्युदंड पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की भी जरूरत है।’

न्यायमूर्ति शाह ‘यूनिवर्सल एबॉलिशन ऑफ डेथ पेनल्टीः ए ह्यूमन राइट्स इंपरेटिव’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन विधि आयोग ने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के साथ मिलकर किया।
http://m.navbharattimes.indiatimes.com/india/Death-penalty-is-privilege-of-poor-says-Law-Commission-head/articleshow/48037704.cms
यह है देश कि न्यायपालिका का न्यायिक चरीञ
जहाँ न्याय
गरीबी अमीरी से होता हैं
जहाँ देश के सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के कुल 600 जजों में से 582 जज एक ही जाति के हों जहाँ देश कि न्याय व्यवस्था ही वर्चस्व वादी लोगों के कब्जे में हों
और हम न्याय कि उम्मीद लगा कर
बैठे हों
और आनेवाली पिढियो को
इसी व्यवस्था के भरोसे छोड़कर अपने जीवन में आनंद कि सोच रहें हो तो जागीये
आप अपनी आनेवाली पिढी को किस व्यवस्था में छोडकर जाना चाहते हैं

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