जशपुर रियासत महल का फरमान: टैक्स दो या मकान खाली करो
जशपुर. जशपुर रियासत का हिस्सा रहे कुनकुरी विकासखंड के कुंजारा गांव के लोगों की इस समय नींद उड़ी हुई है। इसकी वजह है महल का फरमान। कुंजारा की ज्यादातर जमीनें इस रियासत के राजा और राज्यसभा सांसद रणविजय सिंह की मिलकियत है। कुंजारा में रह रहे ग्रामीणों को जमीन और घरों का टैक्स के साथ किराया देने के लिए कहा जा रहा है अन्यथा जमीन और मकान खाली करने को कहा गया है।
उड़ी ग्रामीणों की नींद
लोगों में भय इसलिए भी बढ़ गया है कि राजा की जमीन पर अंग्रेजों के जमाने से बने पीडब्ल्यूडी और वन विभाग के दो भवनों को नेस्तनाबूत कर दिया गया है। जशपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किमी दूर कुंजारा जशपुर रियासत का सबसे खास गांव कोइनारा हुआ करता था जो बाद में कुंजगढ़ बना। राजा विजय भूषण सिंह जूदेव ने अपने सेवकों को खैरात में जमीनें दी थीं, जिसमें लोग घर बनाकर रहने लगे, लेकिन नया फरमान गांवों के लोगों के लिए पैरों तले जमीन खिसकने के समान है।
इंदिरा आवास भी स्वीकृत
गांव में रहने वाले रविशंकर, सुखनी बाई, मनियारोए, सुरेश ने बताया, एक माह पहले रणविजय सिंह ने कुंजारा की जमीन की नपाई कराई, जिसमें गांव की अधिकांश जमीन उनके नाम पर है। इसके बाद राजा के लिए काम करने वाले लोगों ने जमीन पर काबिज ग्रामीणों को धमकाना शुरू कर दिया है और अब घर के लिए 300 रुपए महीना और पांच से 12 हजार रुपए तक टैक्स देने के लिए कहा जा रहा है। से घरों और भूमि का किराया और टैक्स देने के लिए कह रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इसी जमीन पर वर्ष 2012-14 में इंदिरा आवास भी स्वीकृत किया गया है।
52.77 एकड़ जमीन राजा की
पटवारी हीरालाल प्रधान ने कहा कि कुंजारा में राजा साहब की 52.77 एकड़ जमीन नाप के दौरान निकली है। उनकी जमीन के कई हिस्सों में कब्जा है। मुझे ऐसे कब्जाधारियों को बेदखल करने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य देश्वर राम ने कहा, कुंजारा गांव की काफी जमीन राजा के परिवार की है, जिसमें उनके सेवा में लगे लोगों ने मकान बनवा लिए हैं।
सांसद ने कहा, मैंने एेसा कुछ नहीं कहा
सांसद रणविजय सिंह ने फोन पर कहा कि उन्होंने ऐसा कोई फरमान नहीं जारी किया है। ऐसा कौन लोग कह रहे हैं, यह भी उन्हें नहीं मालूम।
हम बात करेंगे : साय
कुनकुरी विधायक रोहित साय ने कहा, वे ग्रामीणों और रणविजय सिंह से इस संबंध में बात करेंगे।
मामले की जानकारी नही।
भवन पुराने या अनुपयोगी भी थे तो उसे प्रक्रिया के तहत गिराया जाना चाहिए। फिलहाल मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यहां के एसडीएम छुट्टी पर हैं। शनिवार को लौटने पर उनसे जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है ।
ईम. शिखर गुप्ता, कलेक्टर, जशपुर

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