‘अब तक दार्शनिकों ने समाज की व्याख्या की है, लेकिन सवाल इसे बदलने का है।’’ मार्क्स को याद करते हुये सीमा आज़ाद.

मार्क्स की 201 वीं जयन्ती 5 मई 2019 दुनिया को समझने ही नहीं, बल्कि इसे बदलने का दर्शन समाज को देने वाले कार्ल मार्क्स 201, साल के हो रहे हैं। 5 मई 2019 को दुनिया उनके जन्म की 201 वीं जयन्ती मनायेगी। दुनिया को अब तक जिस दर्शन ने सबसे Continue Reading

न्याय के सिद्धांत सीजेआई पर भी लागू होने चाहिए : सीमा आज़ाद .

दस्तक मई-जून 2019 का सम्पादकीय  सीमा आज़ाद 23-4-2019 न्याय के सिद्धांत सीजेआई पर भी लागू होने चाहिए 19 अप्रेल  भारतीय न्याय व्यवस्था में उस वक्त भूचाल आ गया, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई पर उनकी एक जूनियर स्टाफ ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। उसने यह आरोप Continue Reading

गलती केवल फातमी जी की नहीं ,पितृसत्ता के खिलाफ आवाज उठाने का एक अनुभव : सीमा आजा़द

7.04.2019 पिछले दिनों राजेन्द्र कुमार जी के 75 पार के जश्न में इलाहाबाद विवि उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो अली अहमद फातमी की एक महिला विरोधी अभद्र टिप्पणी के खिलाफ मैंने विरोध जताया और देश भर से इसके लिए समर्थन भी मिला, लेकिन इलाहाबाद के अन्दर इसे लेकर राजनीति के Continue Reading

संदर्भ , प्रोफेसर अली अहमद फातमी की महिला विरोधी टिप्पणी .: मैं उस हंसी में शामिल नहीं थी. – सीमा आज़ाद . विषद चर्चा और पटाक्षेप .

2.04.2019 पिछले दिनों इलाहबाद में राजेंद्र कुमार जी के 75 वें वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में इलाहाबाद विवि में उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो अली अहमद फातमी जी ने बेहद हल्के रूप में महिला विरोधी टिप्पणी की जिसके बाद.पूरा हाल ठहाको से भर गया. इसी टिप्पणी पर दस्तक़ की संपादक Continue Reading

जंगल में ‘स्वर्ण मृग’ : सीमा आज़ाद

जंगल में ‘स्वर्ण मृग’ देखो, इतिहास कैसे दोहराता है खुद को सीता ने जंगल में फिर देख लिया है ‘स्वर्ण मृग’ राम ने आखेट का आदेश दे दिया है लक्ष्मण निकाल पड़े हैं हथियार लेकर। फिर कटेगी नाक शूर्पनाखाओं की, शंबूकों के सिर फिर कलम होंगे, मारे जाएंगे जंगली सभी। Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस : महिला आन्दोलन और फासीवाद : सीमा आज़ाद 

दस्तक, मार्च-अप्रैल 2019, अंक का संपादकीय 8 मार्च अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हमारे सामने है। इस दिन महिलायें पितृसत्ता के कारण दमित कर दिये गये उनके अधिकारों के खिलाफ एकजुट लड़ाई का संकल्प दोहराती हैं। महिला आन्दोलनों का ही नतीजा है कि वे हर क्षेत्र में पुरूष वर्चस्व को तोड़ समाज Continue Reading

आरक्षण गरीबी नहीं, वर्णव्यवस्था खत्म करने के लिए है : सीमा आज़ाद

10.01.2019  आरक्षण गरीबी नहीं, बल्कि वर्णव्यस्था खत्म करने के लिए है। गरीबी दूर करने के लिए सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करना चाहिए, जिनकी वजह से देश की सम्पदा मुट्ठी भर लोगों के हाथ में सिमट गयी है और लगातार सिमटती जा रही है। असंतुष्ट और बदहाल जनता Continue Reading

कुम्भमेला: बाजार और धर्म का गठजोड़ ःः सीमा आज़ाद , संपादक 

30.12.2018 जीवन में धार्मिक होना आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन जीने के लिए धर्म का इस्तेमाल व्यवसाय है। धर्म में पूंजी-निवेश धर्म का बाजारीकरण है और धर्म में सत्ता का प्रवेश धर्म का फासीवादीकरण है। धर्म मूलतः राजनीति का ही अंग है। इलाहाबाद में माघ मेला हर साल Continue Reading

पाकिस्तान की मशहूर शायरा फहमीदा रियाज़ को बहुत याद करते हुए ःः सीमा आज़ाद

22.11.2018 पाकिस्तान के हालात पर फ़हमीदा रियाज़ पाकिस्तानी शायरा और एक्टिविस्ट फ़हमीदा रियाज़ सन 2012 के 8 से 10 नवम्बर तक इलाहाबाद में थीं। इस दौरान उन्होनें अपनी लेखन प्रक्रिया, समाज में लेखकों की जिम्मेदारी व महिला स्वतन्त्रता पर अपने तीन व्याख्यान दिये। हर कार्यक्रम में उनके परिचय के साथ ‘नारीवादी’ Continue Reading

इलाहबाद : ये हर तरफ खुदा-खुदा क्यों है ? : सीमा आज़ाद

दस्तक, नवम्बर-दिसम्बर 2018, का सम्पादकीय  इलाहाबाद, बनारस सहित उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहर इस समय धूल-मलबे से अंटे पड़े हैं। यहां के लोग इस खुदाई से आजिज आकर आपस में मजाक करने लगे है कि ‘आज कल हर तरफ खुदा-खुदा है।’ इलाहाबाद का नाम हाल ही में ‘प्रयागराज’ होने से Continue Reading