आईने के उस पार दिख रही अक्स मुझे निरंतर रोती आंखों से निहार रही थी जैसे कुछ कहना चाह रही […]

कुछ ऐसे मेरे कुटिल शुभचिंतक जिनके मानस पटल पर मैं छा गई हूँ, दिन-रात, प्रति पल, हर क्षण, विचारों में […]