दर्पण के उस पार व्यथित विचलित मन : सावि  की डायरी के कुछ छिटके पन्ने ..।

आईने के उस पार दिख रही अक्स मुझे निरंतर रोती आंखों से निहार रही थी जैसे कुछ कहना चाह रही हो पर जंजीरों में अंदर से जकड़ी हुई हो जैसे मैंने पूछा कौन हो तुम जल से भरे तुम्हारी नैन कातर नजरों से क्यों निहार रही है मुझे उसने कहा Continue Reading

बहुत सुखद होता है अपनेपन का वह एहसास ःः सविता तिवारी

4.12.2018 ● “एहसास ” ● कभी कभी किसी अपरिचिता से मिलना बहुत ही खूबसूरत सी ख़ुशी का एहसास करा जाती है, लगता ही नहीं कि अपरिचिता है, प्यारे से चेहरे पर,प्यारी सी मुस्कान उनके अपने होने का एहसास करा जाती है, बहुत सुखद होता है अपनेपन का वह एहसास, जिसमें Continue Reading

सविता तिवारी की कविता “शून्य”

“शून्य” आज मन में और दिमाग में असंख्य कल्पनाएं थीं कि शून्य पर बहुत कुछ लिखूंगी पक्ष और विपक्ष पर सतत आलोचना और प्रशंसा कर शून्य का विस्तृत वर्णन करूंगी डायरी कलम लेकर बैठी अब तो पूरा शून्य का महिमा मंडन करना ही है, पर ये क्या हुआ अचानक हाथों Continue Reading

“शुभचिंतक” ःः  जिनके मानस पटल पर मैं छा गई हूँ…..सविता तिवारी 

कुछ ऐसे मेरे कुटिल शुभचिंतक जिनके मानस पटल पर मैं छा गई हूँ, दिन-रात, प्रति पल, हर क्षण, विचारों में जिनकी मैं समा गई हूँ, कुटिल मेरे शुभचिंतक, ईर्ष्या की आग में हर क्षण जलते रहते हैं, कैसे “सवि”को परेशान करें, निरंतर चिंतन मनन करते रहते हैं, दोस्तों को मेरे Continue Reading

अभिव्यक्ति ःः 💠 हां, कुछ बदल सी गई है सवि .ःः सविता तिवारी .

28.11.2018. सविता तिवारी 💠 हां, कुछ बदल सी गई है सवि . 🔆🔆🔆 खुद का कदर करना सीख गई है, खुद के लिये जीना सीख गई है सवि, त्याग दिया है उसने बेकदरों का साथ, अब पूरे आल्हादित मन से खुद के लिये मुस्काती हैं सवि खुद के लिये सजती Continue Reading