नुक्कड़ कैफे में शरद कोकास और मीर अली मीर का कविता पाठ .

प्रस्तुति अनुज श्रीवास्तव पिछले दिनों भिलाई के मशहूर हो रहे नुक्कड़ कैफे में शरद कोकास ने अपनी दो कवितायें , पिता हुये नाराज ,भाई ने दी धमकी मां ने बंद कर दी बातचीत ,उसने नाटक नहीँ छोड़ा ..और . स्त्री होना कितना दुखद है .. पानी का पाठ किया . Continue Reading

” यात्रा ” घूमने जाना और दूर नौकरी करने जाना .. फर्क तो होता है .. शरद कोकास

3.05.2019 शरद बिलौरे को कोई नहीं जानता अगर उसकी कविताएँ उसकी मृत्यु के बाद संकलित न की गई होतीं .. ज़्यादा नहीं लगभग सौ कविताएँ लिखी होंगी शरद ने, जिनमे से चालीस उसके संग्रह ‘ तय तो यही हुआ ‘ में बाद में राजेश जोशी जी ने संकलित की । Continue Reading

हमारे हाथ अभी बाकी हैं : शरद कोकास .

डॉ कमला प्रसाद जी को जब मैंने मजदूरों पर लिखी अपने शुरुआती दौर की यह कविता सुनाई तो उसकी पंक्तियाँ थीं…”उठो दौड़ो /छीन लो उनके हाथों से वे पत्थर / तुम्हारे हाथ अभी बाकी हैं ।” कमला जी ने नाराज़ होते हुए कहा “एक सर्वहारा या मजदूर को यह हक़ Continue Reading

बिलक़ीस बानो को समर्पित एक कविता  ( दो भाग ) शरद कोकास .

कौसर बानो का अजन्मा बेटा – एक पृथ्वी पर मनुष्य के जन्म लेने की घटना इतनी साधारण है अपनी परम्परा में  कि संवेदना में कहीं कोई हस्तक्षेप नहीं करती इसके निहितार्थ में है इसकी असामान्यता जो ठीक उस तरह शुरू हुई जैसे कि एक जीवन के अस्तित्व में आने की Continue Reading

हमें आंबेडकर के सपनों के हिसाब से भारत बनाना चाहिए : आंबेडकर और गाँधी : सुविख्यात आलोचक अजय तिवारी से कवि शरद कोकास की बातचीत..

🔵🔵🔵 14.04.2019 *शरद कोकास* : गांधी और आंबेडकर दोनों महामानवों का भारत के साहित्यिक समाज में काफी प्रभाव रहा है । लेकिन यह देखा जाता है कि अनेक दलित साहित्यकार आंबेडकर को जितना मानते हैं उतना वे गांधी को नहीं मानते । आंबेडकर के प्रति आस्था तो उनके मन में Continue Reading

युध्द के ख़िलाफ़ ‘: शरद कोकास 

कवि  उठो लिखो कविता युध्द के ख़िलाफ़ युध्द में प्रयुक्त प्रक्षेपास्त्रों के ख़िलाफ़ प्रक्षेपास्त्र चलाने वाले हाथों के ख़िलाफ़ हाथों को आदेश देने वाले दिमागों के ख़िलाफ़ लिखो कि अभी वसुंधरा पर हम सांस लेना चाहते है खुली हवा में लिखो कि अभी आकाश में हम देखना चाहते हैं चमकता Continue Reading

वेलेंटाइन डे पर शरद कोकास की कविता ” चुबंन “

💋💋💋💋💋         चुम्बन 💋💋💋💋💋 होठों के तरल में वे चुम्बन डूबते उतराते गये जो वर्जनाओं की दीवार पर प्रेम की परिभाषा लिखते रहे लैला के नर्म नाज़ुक होठों पर रक्त में सनी रेत है जो संगसार किये जाते मजनूं के होठों से उस तक पहुँची है वारिनिया Continue Reading

शरद कोकास की कविता ” पत्रकार ” जो उन्होंने पत्रकारों पर हमले के खिलाफ धरने पर रायपुर में सुनाई ..

पत्रकार वह टेबल पर बैठकर खबरें नहीं बनाता आसमान तक जाता है सितारों की असलियत ढूँढ लाता है वह बोलने सुनने और देखने के मामले में बापू के तीन बन्दरों की तरह भले हो अपनी इन्द्रियों पर भरोसा रखता है वह हाथ में कलम रखता है और तलवार का भ्रम Continue Reading

💓💓 प्रपोज़ डे पर शरद बिल्लोरे को याद करते हुए : शरद कोकास

8.02.2019 शरद बिल्लौरे बहुत खूबसूरत था और कॉलेज के दिनों में एक लड़की से एकतरफ़ा प्यार करता था .. शायद पहला प्यार था उसका .. । शरद ने उस लड़की के साथ आकाशवाणी पर एक कार्यक्रम दिया था और वह उसे अच्छी लगने लगी थी .. लेकिन उस लड़की की Continue Reading

2 दिसंबर 84 की वह रात कोई कैसे भूल सकता है ःः शरद कोकास.

3.12. 2018 2 दिसंबर 1984 को रविवार था । मैं एक सप्ताह से अपने दोस्त सुरेश स्वप्निल के घर ठहरा हुआ था । भोपाल के तमाम दोस्तों से मिलकर बैचलर होने के सुख से भरा हुआ दोस्तों की दावतों का लुत्फ उठाकर वापस दुर्ग लौट रहा था। अगले दिन सोमवार Continue Reading