ठग्स ऑफ हिंदुस्तान गधों-घोड़ों की तरह खरीद रहे हैं,मगर आप आलू की तरह बिक काहे रहे हैं.बादल सरोज.

कर्नाटक में लगी विधायकों की मण्डी में अपने कुछ घोड़ों के बिचक कर भाजपा की हरी घास में पहुंच जाने के बाद से मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार में दहशत है। सुनते हैं अपने नवनिर्वाचित सांसद बेटे को दिल्ली ले जाकर नरेंद्र मोदी के साथ फोटो उतरवाने सहित बाकी सब करने Continue Reading

मप्र. बुरहानपुरमें आदिवासियों पर गोली-चलाई ,चार घालल.

बादल सरोज की रिपोर्ट . एक ओर म.प्र शासन वन अधिकार के लिए खरीफ और लंबित दावों का पुनः निरिक्षण का प्रक्रिया शुरू कर रही है और इस बारे में समस्त कलेक्टरों को आदेशित भी किया गया है कि इस प्रक्रिया के होने तक किसी को बेदखल नहीं किया जाए। Continue Reading

जनकवि सरोज सम्मान 2019 डॉ मालिनी गौतम को.

भोपाल. हर वर्ष दिए जाने वाले जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति सम्मान से इस वर्ष कवियित्री डॉ मालिनी गौतम को अभिनंदित किया जाएगा। झाबुआ में जन्मी डॉ मालिनी गुजरात के उच्च शिक्षा विभाग में एसोशिएट प्रोफ़ेसर हैं। वे छन्द और मुक्त छन्द दोनों विधाओं में लिखती हैं। अभी तक उनके Continue Reading

बर्बरता की पूर्णिमा और बर्बरता की पूर्णिमा और भेड़ियों के पूर्णावतार का समय.

बादल सरोज . ● इस बार वे झारखण्ड के तबरेज़ अंसारी के लिए आये । बेख़ौफ़ और खुल्लमखुल्ला आये, दिनदहाड़े आये । उन्होंने उसे आसानी से ज़िबह नही किया । बहुत तसल्ली से पहले उन्होंने उसके साथ गिरफ्त में आये मेमने की तरह अपनी सारी क्रीड़ा की, खेल खेले । Continue Reading

जश्नमनाते हुक्मरान और डली भर गुड़, ग्लास भर दूध के इन्तजार में मरते_बच्चे.

बादल सरोज ● दो रुपये में आठ के भाव आने वाली एक पैरासिटामोल की गोली, ओआरएस घोल या ग्लूकोज़ का एक पाउच वो न हो तो दो चम्मच शक्कर या एक डली गुड़, माथे पर ठंडी पट्टी रखने के लिए बित्ते भर कपड़ा और एक किलो बर्फ : सिर्फ इतना Continue Reading

बंगाल : त्रासदी से ज्यादा विडम्बना और_पाखण्ड . बादल सरोज

● पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर सप्ताह भर से जो तूमार सा खड़ा किया जा रहा है उसमे त्रासदी से ज्यादा विडम्बना और पाखण्ड है । विडम्बना इस मायने में कि पारस्परिक पूरक और प्रतिद्वंद्वी साम्प्रदायिक उन्माद में अब तक इससे तकरीबन अछूते रहे, देश भर के सामने साम्प्रदायिक Continue Reading

इतना भाव क्यूँ खा रहे हो कल मुँहे अशिष्ट , तुम बादल हो या कैपिटलिस्ट ??

बादल सरोज नदी से नहर से, कुंए से बावड़ी से, गमले से बाल्टी से, डबरे से घाटी से, ताल से तलैया से, खुले में रखी कटोरी और थाली से यहां तक कि प्यासे पक्षियों के लिए बालकनी में लटकाये मिट्टी के बर्तनों और दुःख और विरह में भीगी आंखों तक Continue Reading

क्या वे मूर्ख_हैं ? नही , बिल्कुल नही उनकी मंशा है एक अज्ञानी और कूढ़मगज, अंधविश्वासी और कुपढ समाज का निर्माण करना.

बादल सरोज विज्ञान की प्रमाणित खोजें कहती हैं कि बमुश्किल 90 हजार साल पहले की बात है जब अफ्रीका के बाहर नियंडरथल मानव पहुंचा अब तक मिला उसका सबसे पुराना घर, सबसे पुरानी गुफा कोई 32 हजार साल पुरानी है कोई 30 हजार साल पहले आधुनिक मानव का निकटतम पुरखा Continue Reading

गांव बसने से पहले ही आ धमके_भेड़िये : बादल सरोज .

मोदीराज द्वितीय के लिए कारपोरेट एजेंडा पूंजीवादी लोकतंत्र में चुनाव सिर्फ एक एपिसोड होते हैं । असली पटकथा फ़ायनेंसर्स चुनाव के पहले ही लिख देते हैं , चुनाव बाद उसका मन्चन भी उन्ही के डायरेक्शन में होता है । मोदी सरकार प्रथम इसका ड्रेस रिहर्सल थी और अब मोदीराज द्वितीय Continue Reading

बहुतईऔघड़ समय_है : बादल सरोज .

जो सबसे ज्यादा परेशान है वह तो मोर्चे पर डटा है। जो उतनी मुश्किल में नहीं है वह परेशान बैठा है, “लुट गए रे-मर गए रे- अब तो कच्छु नहीं होगो रे” के वृंदगान में सुर मिला रहा है, हारी हारी सी बातों से वातायन भर रहा है । ● Continue Reading