एक_कैविएट :  सोमनाथ_दा : अवाम_की_बहुमूल्य_धरोहर : बादल सरोज 

13.08.2018 सोमनाथ दा भारतीय संसद के सर्वकालीन श्रेष्ठों में से एक हैं । एक अनुभवी सांसद, तार्किक और प्रखर वक्ता, एक साथ आक्रामक किन्तु संयत। ईमानदारी और जन प्रतिबद्दता की मिसाल ; भारतीय राजनीति में यह विरल मेल सिर्फ एक धारा के पास है ; वाम की धारा के पास। ● वे अखिलभारतीय हिन्दू महासभा
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10.08.2018 #मुल्क फिल्म मुसलमानों के खिलाफ बनाये जा रहे जहरीले माहौल की विभीषिका को पूरी समग्रता के साथ उजागर करती है। किस प्रकार इस जहर ने पीढ़ियों पुराने रिश्तों, दोस्ती-यारियों, सुख-दुःख में साझेदारियों, तहजीबी और कौमी विरासत यहां तक कि पासपड़ोस तक के साझेपन को काफूर कर दिया है इसका ब्यौरा यह फिल्म बहुत गहराई
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    8.08.2018/ भोपाल  बादल सरोज  वामपंथ_है_कहाँ? #Where_is_the_left कल भोपाल में #शैलेन्द्र_शैली की स्मृति में हुए 16वे व्याख्यान में बोलते हुए #प्रभात_पटनायक ने जब मौजूदा हालात में वामपंथ की विशेष जरूरत और निर्णायक भूमिका पर जोर दिया तब एक सजग नागरिक और हम सबके वरिष्ठ साथी ने खड़े होकर पूछा था : #व्हेयर_इज_द_लैफ्ट ? चार
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  2.08.2018 अमूमन बायोपिक – वास्तविक घटनाओं-व्यक्तियों पर बनी फिल्में – या तो उसका उबाऊ सा वर्णन बनने या फिर भारी मिलावट के साथ चूं चूं का मुरब्बा बनने की दो में से एक अति की शिकार बनकर रह जाती हैं । सूरमा बायोपिकों की नियति के इस तिलिस्म को तोड़ती है और दर्शकों को
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30.07.2018 यह 24 वर्ष की युवती हैँ, इनके नाम में #पूजा भी है #शुक्ला भी । उनके साथ भगवा वस्त्रधारी योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह विष्ट की सरकार ने किस तरह का शिष्ट आचरण किया, पढ़िये पूजा जी की जुबानी । और याद रखिये कि अब #सोनी_सोरी बनाने के लिए उनका बस्तर में होना जरूरी
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  अनिच्छुक_सम्मानित “हमे सम्मान-वम्मान की आदत नही है । सम्मान की बात सुनते ही बड़ी घबराहट सी होने लगती है, बड़ा असहज और अजीब सा लगता है ।” कुछ इस तरह से #सरोज_स्मृति_सम्मान से सम्मानित होने के बाद अपने संबोधन में #शुभा ने अपनी बात शुरू की . ● उनके बोलने के लहजे और अंदाज़
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28.07.2018 “अर्जुनसिंह निकम्मा है, फूलन उसकी अम्मा है” जे क्या नारा लगाते हैं आप लोग ? फूलन देवी ने अपनी आंखों को शरारती अंदाज में मटकाते हुए यह सवाल मम्मी से पूछा था जब वे कुछ दिन उनके साथ जेल में थीं । मम्मी और उनके साथ गईं जनवादी महिला समिति की सभी साथिने जोर
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26.07.201 :ग्वालियर  “यह कालखंड हमारे समय का सबसे भयानक दौर है। देश के जीवन में इतने कठिन हालात पहले कभी पैदा नहीं हुए ; डेढ़ दो सौ वर्षों की लड़ाई के बाद हासिल संसदीय लोकतंत्र और हजार डेढ़ हजार की सामाजिक सौहार्द्र और साम्प्रदायिक भाई चारे को उल्टी दिशा में धकेला जा रहा है।” यह
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बादल सरोज / ग्वालियर  27.07.2018  इनके साथ ग्वालियर की जेल में न जाने कितनी कितनी बार गहरी बातें करने की स्मृतियाँ हैं .  वे अंदर के फाटक के पास बनी जेल अदालत के बाहर यूं ही बैठी रहती थीं । हम हमसे मिलने आये मुलाक़ातियों से मिलने के बाद लौटते में या जेल अस्पताल के
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18.07.2018 रंगभेदी निज़ाम के चंगुल से अपने देश और नागरिकों को आजाद कराने के लिए एक वकील और आंदोलनकारी से लेकर कम्युनिस्ट गुरिल्ला तक के रूप में जूझना, रोबन आइलैंड की जेल में चूना खदानों में काम करते हुए 27 साल काटना, अपनी सदारत में नए दक्षिण अफ्रीका का निर्माण करना, लोकप्रियता के शिखर पर
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