हैप्पी बर्थ डे रेखा गणेशन वन ऑफ द मोस्ट आउटस्टैंडिंग एन्ड सेल्फ मेड पर्सनालिटी ऑफ बॉलीवुड !!

* बादल सरोज #रेखा ● रेखा एक दृष्टि हैं । उन कैरियरिस्ट और चतुर बच्चों को दूर से ही भांप लेती है जो सारी उछलकूद और अपनी पारी खेलने के बाद जैसे ही खुद का नम्बर आता है वैसे ही बिसूरकर कहते है “नईं अब हम नईं खेलेंगे, मम्मी नाराज होंगी “। बाकियों का सबकुछ
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07.10.2018 न जाने किन किन ने कहा था कि मत बाँटो। मत बांटो हिन्दुस्तान को। खतरनाक खेल है, जिसने भी खेला है वह साबुत नहीं बचा है। एक बार विभाजन की भट्टी सुलग गयी, “हम” और “वो” की भाषा वर्तनी में आना शुरू हो गयी तो बात फिर हिन्दू मुसलमान तक नहीं रुकेगी। भट्टी धधकेगी,
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14.09.2018 | ग्वालियर  हिंदी फिल्मों की अन्य विशेषताओं के साथ एक खासियत यह भी है कि वे ढंग-ढोर से डरा भी नही पाती । भय पैदा करने का पूरा जिम्मा बैकग्राउंड म्यूजिक पर होता है जो भें-भें-छुन्न-भड़ाक करके डराता कम है कानों को सताता अधिक है । उस पर हॉरर को साफ-सुथरी कॉमेडी से जोड़ना,
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  14.09.2018 शुरुआत एक कहानी से : 1983-84 की बात है । ईएमएस नम्बूदिरीपाद भोपाल आये थे । कार्यक्रम के बाद रेलवे स्टेशन के रिटायरिंग रूम में वापसी ट्रेन के इंतजार में थे । हम उस वक़्त का अपना नौजवान सभा का पाक्षिक अखबार “नौजवान” लेकर उन्हें दिखाने पहुंचे । उन्होंने उसे देखा, अल्टा-पल्टा और
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13.08.2018 सोमनाथ दा भारतीय संसद के सर्वकालीन श्रेष्ठों में से एक हैं । एक अनुभवी सांसद, तार्किक और प्रखर वक्ता, एक साथ आक्रामक किन्तु संयत। ईमानदारी और जन प्रतिबद्दता की मिसाल ; भारतीय राजनीति में यह विरल मेल सिर्फ एक धारा के पास है ; वाम की धारा के पास। ● वे अखिलभारतीय हिन्दू महासभा
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10.08.2018 #मुल्क फिल्म मुसलमानों के खिलाफ बनाये जा रहे जहरीले माहौल की विभीषिका को पूरी समग्रता के साथ उजागर करती है। किस प्रकार इस जहर ने पीढ़ियों पुराने रिश्तों, दोस्ती-यारियों, सुख-दुःख में साझेदारियों, तहजीबी और कौमी विरासत यहां तक कि पासपड़ोस तक के साझेपन को काफूर कर दिया है इसका ब्यौरा यह फिल्म बहुत गहराई
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    8.08.2018/ भोपाल  बादल सरोज  वामपंथ_है_कहाँ? #Where_is_the_left कल भोपाल में #शैलेन्द्र_शैली की स्मृति में हुए 16वे व्याख्यान में बोलते हुए #प्रभात_पटनायक ने जब मौजूदा हालात में वामपंथ की विशेष जरूरत और निर्णायक भूमिका पर जोर दिया तब एक सजग नागरिक और हम सबके वरिष्ठ साथी ने खड़े होकर पूछा था : #व्हेयर_इज_द_लैफ्ट ? चार
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  2.08.2018 अमूमन बायोपिक – वास्तविक घटनाओं-व्यक्तियों पर बनी फिल्में – या तो उसका उबाऊ सा वर्णन बनने या फिर भारी मिलावट के साथ चूं चूं का मुरब्बा बनने की दो में से एक अति की शिकार बनकर रह जाती हैं । सूरमा बायोपिकों की नियति के इस तिलिस्म को तोड़ती है और दर्शकों को
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30.07.2018 यह 24 वर्ष की युवती हैँ, इनके नाम में #पूजा भी है #शुक्ला भी । उनके साथ भगवा वस्त्रधारी योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह विष्ट की सरकार ने किस तरह का शिष्ट आचरण किया, पढ़िये पूजा जी की जुबानी । और याद रखिये कि अब #सोनी_सोरी बनाने के लिए उनका बस्तर में होना जरूरी
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  अनिच्छुक_सम्मानित “हमे सम्मान-वम्मान की आदत नही है । सम्मान की बात सुनते ही बड़ी घबराहट सी होने लगती है, बड़ा असहज और अजीब सा लगता है ।” कुछ इस तरह से #सरोज_स्मृति_सम्मान से सम्मानित होने के बाद अपने संबोधन में #शुभा ने अपनी बात शुरू की . ● उनके बोलने के लहजे और अंदाज़
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