|| भूपिंदरप्रीत की पंजाबी कविताएँ || दस्तक़ में आज प्रस्तुत , प्रस्तुती अंजू शर्मा

आज प्रस्तुत हैं पंजाबी के अग्रणी कवि *भूपिंदरप्रीत* की कुछ पंजाबी कविताओं के अनुवाद।   कविता के साथ अनुवाद पर आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।  अनुवाद : पंजाबी कवि बिपनप्रीत और हिन्दी कवि रुस्तम द्वारा साभार समालोचन से ⭕ दस्तक के लिए प्रस्तुति : अंजू शर्मा   1 || छोटी सी बात ||     एक
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भोपाल, 4 जून शहर के साहित्यकारों के समूह दस्तक की ओर से मायाराम सुरजन स्मृति भवन में सोमवार को काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इस काव्य गोष्ठी में अनूपपुर से आईं युवा कवियत्री अनामिका चक्रवर्ती, गया के युवा कवि सौरभ शांडिल्य, युवा कवि सचिन श्रीवास्तव समेत प्रज्ञा रावत, संगीता सक्सेना, संध्या कुलकर्णी और ममता
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27 मई 2018  वो आजादी के बाद का दौर था, जब प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू अपने विजन के तहत देश भर में भिलाई सहित कई आधुनिक तीर्थ तैयार करवा रहे थे। भिलाई से पं. नेहरू का खास लगाव था। जब भिलाई स्टील प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ तो पं. नेहरू ने प्रशासनिक कामकाज को देखते
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आज चर्चा हेतु प्रस्तुत है हमारी नन्ही बाल कथाकार *उदिता मिश्र* की नई कहानी। पढ़कर टिप्पणी जरूर कीजिये। आज टिप्पणी अनिवार्य है। ☺आप सभी की प्रतिक्रियाओं की मुझे और उदिता दोनों को प्रतीक्षा रहेगी। || बदमाश शैतान बिल्ला || आज सुबह मम्मी ने मुझे याद दिलाया कि मैं अपने दोस्त के लिए एक कटोरा दूध
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दोस्तों आज हम हो ची मिन्ह की कुछ कविताएं पढ़ते हैं। अनुवाद हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि और उतने ही महत्वपूर्ण अनुवादक सोमदत्त जी का है। पढ़ें और इन पर और अनुवाद पर भी बात करें साथियों   1 *हज़ार कवियों का कविता-संग्रह पढ़ने पर* पुरखे चाव से गाते थे गीत नैसर्गिक सौन्दर्य के बर्फ़ के,
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दोस्तों आज विनय दुबे की कविताएं प्रस्तुत कर रहा हूँ. विनय दुबे प्रतिरोध के सशक्त कवि थे. उनका एक बिलकुल अलग अंदाज था. कविता के इस तेवर को देखिये और इन कविताओं पर बात कीजिए. दस्तक के लिए प्रस्तुति अमिताभ मिश्र दिल्ली होने से तो अच्छा है मैं पहाड़ देखता हूँ तो पहाड़ हो जाता
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5 मई 2018  ‘अब तक दार्शनिकों ने समाज की व्याख्या की है, लेकिन सवाल इसे बदलने का है।’’   दुनिया को समझने ही नहीं, बल्कि इसे बदलने का दर्शन समाज को देने वाले कार्ल मार्क्स 200 साल के हो रहे हैं। 5 मई 2018 को दुनिया उनके जन्म की 200वीं जयन्ती मनायेगी। दुनिया को अब
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हरीशचंद्र पाण्डे ० दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले ⭕ || असहमति || अगर कहूँगा शून्य तो ढूँढ़ने लग जाएँगे बहुत-से लोग बहुत कुछ इसलिए कहता हूँ ख़ालीपन जैसे बामियान में बुद्ध प्रतिमा टूटने के बाद का जैसे अयोध्या में मस्जिद ढहने के बाद का ढहा-तोड़ दिए गये दोनों ये मेरे सामने-सामने की बात
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अनुवाद और प्रस्तुति : *अंचित* साभार सदानीरा से आगा शाहिद अली यादों के शाइर हैं और उनकी निजी यादें उनकी जमीन के इतिहास से मिलती-जुलती और उसमें डूबती-उतरती रहती हैं. अपनी कविताओं में वह हमेशा घर लौटने को बेचैन दिखाई देते लगते हैं. उनकी कविता दर्द की पड़ताल में अपना समय व्यतीत करती है और उनकी
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⭕ विहाग वैभव की कविताएँ   || ओझौती जारी है || तपते तवे पर डिग्रियाँ रखकर  जवान लड़के जोर से चिल्लाये – रोजगार बिखरे चेहरे वाली अधनंगी लड़की  हवा में खून सना सलवार लहराई बदहवास और रोकर चीखी – न्याय मोहर लगे बोरे को लालच से देख  हँसिया जड़े हाथों को जोड़    किसान गिड़गिड़ाये –
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