नौ अगस्त आदिवासी नहीं मूलनिवासी अधिकार दिवस उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

9.अगस्त 2018 पत्रकार लिंगाराम कोडोपी का माने तो बीते दिनों पुलिस ने जिन 15 आदिवासियों को सुकमा में मुठभेड़ में मौत के घाट उतारने की बात की है वह गलत है | आदिवासी नेत्री सोनी सोरी ने भी इसे गलत ठहराते हुए ग्रामीणों से चर्चा करता वीडियो सोसल मीडिया में वायरल किया तथा अखबारों में
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4.08.2018 सोशल मीडिया में जो खबरे छन कर आ रही है उसे यदि सही माना जाए तो पत्रकारिता देश में संकट के चरम सीमा से होकर गुजर रही है। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया लगभग सरकार से सवाल करने से बच रहे हैं या फिर एन-केन-प्रकारेण बगले झांकने में लगे हैं। और तो और सम्पादकीय विभाग
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1.08.2018  तिथि सही सही याद नहीं वह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार पहली बार साल 1997 तथा दूसरी बार 2005 में उनसे मुलाकात संभव हो पाया था | दूसरी बार दिसम्बर के ठिठुरन भरे दिन में मैंने निरंजन महावर अर्थात भारत के वेरियर एलविन से अर्थात मेरी उनसे आदिवासियों से जुड़े विविध पहलुओं पर बात हुई
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      19.07.2018   मोदी अच्छी सोच रखते हैं और अच्छा काम कर          रहे हैं : नीरज  जी, ठीक पढ़ा आपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भक्त कवि नीरज नहीं रहे | इन लाइनों के लिखे जाने तक प्रधानमंत्री का ट्वीट नहीं पढ़ पाया हूं | सांप्रदायिकता व असहिष्णुता के मुद्दे पर
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  15.07.2018  कल्पेश की मौत के बाद हमारी समझ यकीनन यह साबित करता है कि मीडिया हाऊस कत्लगाह में तब्दील हो गया है | यह हम मीडिया कर्मियों के लिए मौत से कम नहीं है | सम्पादकीय विभाग क्या छापे और क्या नहीं के बीच लटका हुआ है | अखबार गुंडों का समूह और विग्यापन
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6.07.2018  पीयूसीएल द्वारा 2016 का निर्भीक पत्रकारिता सम्मान लेते समय पुरस्कार स्वरूप प्रशस्ति पत्र और धान के कटोरा पुरस्कार में देते हुए कह उठी थी की उत्तम जी इसकी रक्षा पर पत्रकारिता करनी है और जवाब में मैंने कहा था कि ‘इस सम्मान को मैं असंख्य पीडि़त मानवता को समर्पित करता हूं उन लोगों को
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