इब्ने सफ़ी की जासूसी दुनिया : अनिल जनविजय .

(तस्वीर में अब्बास हुसैनी और इब्ने सफ़ी) किताबी पन्ना आज किसी ने मेरी पोस्ट पर इब्ने सफ़ी का नाम लिया । जी हाँ, वही इब्ने सफ़ी, जिनकी जासूसी दुनिया ने सन १९६०-७० के दशक में तहलका मचा रखा था । ढाई सौ से अधिक उपन्यास, एक से बढ़कर एक हैरतंगेज़ Continue Reading

प्रसिद्ध उर्दू शायर ‘जोश’ मलीहाबादी : अनिल जनविजय

प्रसिद्ध उर्दू शायर ‘जोश’ मलीहाबादी को उनकी बग़ावत पसंद नज्मों के कारण अंग्रेजों के ज़माने में शायरे इन्कलाब की उपाधि दी गई और लोग उन्हें पढ़ते हुए जेल भेजे जाते थे। उनमें अभिव्यक्ति की उद्भुत शक्ति थी। वे अल्फाज़ में आग भर सकते थे और दिलों में आग लगा सकते Continue Reading

दमादम मस्त कलन्दर के कवि सागर सिद्दक़ी की 11 ग़ज़लें

9.10.2018 प्रस्तुति अनिल जनविजय  सागर सिद्द्की का जन्म अम्बाला में एक मज़दूर परिवार में हुआ था और जन्म के समय उन्हें मुहम्मद अख़्तर नाम दिया गया था। उनके पिता के एक मित्र थे हबीब हसन, जो शायर थे।। उन्होंने ही सागर सिद्द्की को अक्षर ज्ञान करवाया, उर्दू सिखाई और शायरी Continue Reading

कवि नरेश सक्सेना 6 नवगीत …

आपने यह ज़रूर सुना होगा कि कभी कवि नरेश सक्सेना नवगीत लिखा करते थे। उनका आख़िरी नवगीत 1965 में धर्मयुग में छपा था। आने वाली 16 जनवरी को नरेश जी 80 वर्ष के हो जाएँगे। उनकी 80 वीं जयन्ती पर उनके पाठकों को हम उपहार में उनके नवगीत देना चाहते Continue Reading

दस्तावेज़ : हिन्दुस्तानी सरकार के पहले प्रधानमन्त्री मौलाना बरकतउल्लाह

O सुनील दत्ता  ( 7 जुलाई 1854 – 20 सितम्बर 1927 ) ज्यादातर लोग जानते है की ब्रिटिश शासन के दौर में बनी पहली हिन्दुस्तानी सरकार आज़ाद हिन्द फ़ौज की सरकार थी। लेकिन सच्चाई यह है की पहली हिन्दुस्तानी सरकार 1915 में अफगानिस्तान में बनी हिन्दुस्तान की अस्थाई सरकार थी। Continue Reading

दस्तावेज़ : जंगे आज़ादी में अँग्रेज़ॊं के सबसे बड़े दुश्मन मौलवी अहम्दुल्लाह शाह : जगदीश्वर चतुर्वेदी 

10.06.2018  मतलबपरस्ती की इस दुनिया में किसी भी जननायक को भुला देने के लिए 158 साल कम नहीं होते। जब हमारे ही लोग उस गौरवशाली विरासत की शानदार धरोहर को सहेज कर न रख पा रहे हों तो सत्ता को कोसने का क्या मतलब? दरअसल, इतिहास की भी दो किस्में Continue Reading

दस्तावेज़ : जंगे आज़ादी में अँग्रेज़ॊं के सबसे बड़े दुश्मन मौलवी अहम्दुल्लाह शाह : जगदीश्वर चतुर्वेदी 

10.06.2018 मतलबपरस्ती की इस दुनिया में किसी भी जननायक को भुला देने के लिए 158 साल कम नहीं होते। जब हमारे ही लोग उस गौरवशाली विरासत की शानदार धरोहर को सहेज कर न रख पा रहे हों तो सत्ता को कोसने का क्या मतलब? दरअसल, इतिहास की भी दो किस्में Continue Reading

? आदिवासी कवि दोपदी सिंघार की 14 कवितायेँ :, प्रस्तुति अनिल जनविजय .

  23.03.2018 ? आदिवासी कवि दोपदी सिंघार  कि दो तीन साल पहले खूब चर्चा हुई , यह भी निश्चित नहीं हो पाया अंत तक कि वो कौन है और हैं भी कि नहीं .कल अचानक फेसबुक पर जाने माने साहित्यकार अनिल जनविजय ने एक के बाद एक कई कविताएँ फेसबुक Continue Reading

? जब नेहरू ने फ़िराक़ से पूछा- ‘अब भी नाराज़ हो..’. : अनिल जनविजय.

अनिल जनविजय. किस्सा मुम्बई का है। वहाँ फ़िराक़ के कई दोस्त थे। उनमें से एक थीं मशहूर अभिनेत्री नादिरा। उस दिन फ़िराक़ सुबह से ही शराब पीने लगे थे और थोड़ी देर में उनकी ज़ुबान खुरदरी हो चली थी। उनके मुँह से जो शब्द निकल रहे थे वो नादिरा को Continue Reading

बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं-अच्युतानंद मिश्र

इस वर्ष का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार अच्युतानंद मिश्र को! निर्णायक थीं कवि अनामिका। पुरस्कृत कविता का शीर्षक है – बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे (अमेरिकी युद्धों में मारे गये, यतीम और जिहादी बना दिए गये उन असंख्य बच्चों के नाम) * अनिल जनविजय की फेसबूक Continue Reading