नायरा वहीद की अनुवादित कवितायें.

नायरा वहीद के ‘नमक’ और ‘नजमा’ नाम से दो काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं| वर्जनाओं से निकल कर स्पष्ट और कोमल अनुभूतियों को यथार्थ की कसौटी पर कसती ये कविताएँ सतर्क और सचेत होकर बिषमताओं से जूझती हैं और नया रास्ता ढूँढने का प्रयास करतीं हैं| भोजन में नमक की तरह Continue Reading

नाज़िम हिक़मत …

आज मेरी बारी है, मैं तो सामाजिक परिवर्तन का मैदानी कार्यकर्त्ता हूं। एक पाठक हूं। बहुत से रचनाकार मेरे प्रिय हैं।आज की परिस्थितियों में प्रस्तुत है नाजिम हिकमत की कविता दस्तक में अनिल करमेले की प्रस्तुति .. मनहूस आजादी नाज़िम हिक़मत » दिनेश पोसवाल» 🔴 तुम बेच देते हो -– Continue Reading

|| मुझे शक है, हर एक पर शक है || कुमार अंबुज .

⭕. दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले कुमार अम्बुज की यह प्रासंगिक कविता पढ़ें. हम तमाम ऐसे लोग जो इस समय के चुने हुए विजयी उद्घोष को सुन कर चिंता में हैं, यह कविता उन सबकी भावनाओं की अभिव्यक्ति है. || मुझे शक है, हर एक पर शक है Continue Reading

इतवारी कविता में आज हम लेकर आये हैं अनिल करमेले की कविता : लोहे की धमक

इतवारी कविता में आज हम लेकर आये हैं अनिल करमेले की कविता : लोहे की धमक वाचन स्वर : बहादुर पटेल विडिओ एडिटिंग : कृष्ण पटेल तो सुनिए और देखिए। हमेशा की तरह आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा। प्रस्तुति : ज्योति देशमुख दस्तक़ में प्रस्तुत 

कवितायें ःः ज्योति शोभा ःः दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

⭕ || पकड़ने की कला में निपुण नहीं होती देह || वर्षों पुरानी हो गयी है देह  भार नहीं संभाल पाती चुंबन गिर रहे हैं  केशों की रेखा पर रखे गए थे जो  अज्ञातवास के ईश्वर की तरह  जो वेदों से निकल कर घूमता है अर्धरात्रि की शीतल कालिमा में  टहक कर Continue Reading

🎥 || रफ्ता रफ्ता देखो क्‍या हो रहा है…|| ० यूनुस ख़ान

28.01.2019 ० दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले हिंदी सिनेमा में बीते कई सालों से एक अजीब-सा चलन सामने आया है और ये चलन है पुराने गानों को नये अंदाज़ में पेश करने का. ये गाने सत्‍तर या अस्‍सी के दशक के भी हैं और बाद के यानी नब्‍बे Continue Reading

० नीता पोरवाल की कविताये  :  ० दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

⭕ आज प्रस्तुत हैं समूह की साथी *नीता पोरवाल* की कविताएँ. एक कवि, एक कथाकार होने के साथ वे अच्छी अनुवादक भी हैं। २०१८ में उन्होंने चीनी साहित्य की सौ कविताओं का हिंदी अनुवाद भी किया, जिसके लिए उनकी टीम को DJS Translation Award से सम्मानित किया गया है। साथ Continue Reading

कवितायें : ० प्रदीप मिश्र , ⭕ दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले

|| कब्र को किस तरह कहेगा घर || एलन कुर्दी से कोई पूछेगा घर कहाँ है भूख से बिलबिलाते हुए उठेगा और एक विस्फोट हो जाएगा उसके हृदय में अपनी मासूमियत के चिथड़ों को समेटते हुए वह बनाएगा घर जिसमें भरी होगी बारूद की दुर्गंध वह किसी को नहीं बता Continue Reading

🎥 || हमें तो अब भी वो गुज़रा ज़माना याद आता है || :  ० दस्तक के लिए- यूनुस खान

🎥 🎥  🎥 ० दस्तक के लिए अनिल करमेले 2019 की इस सर्द सुबह अगर किसी के किसी गैजेट पर ग़ज़लें बज रही हों, और मौसम गुलाबी हुआ जा रहा हो, तो ये समझ लीजिएगा कि ग़ज़लों का दौर कभी ख़त्‍म नहीं होगा। मेहदी हसन गुनगुना रहे हैं—‘अब के हम बिछड़े तो Continue Reading

📽 🎥 | 2019 में आएंगी कुछ अलग लगने वाली फिल्‍में || * यूनुस ख़ान

० दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले साल 2018 अब बीत रहा है और ज़ाहिर है ये समय है अगले बरस की तरफ देखने का। आईये बात की जाए कि आने वाले साल में हमें किन फिल्‍मों का इंतज़ार रहेगा। अगले साल की शुरूआत किस तरह की रहेगी—ये आप Continue Reading