जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों? : उत्तराखंड शासन प्रशासन ने दिखा दिया कि बांध कंपनियां लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.

 1 मार्च, 2019 यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बांध परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई प्रभावित क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर मोरी ब्लॉक में कथित रूप से पूरी कर दी गई। 1 मार्च को जन सुनवाई का समय 11:00 बजे से शुरू हुआ किंतु Continue Reading

पत्थलगांव : वनाधिकार कानून पर विस्थापन के खिलाफ़ राष्ट्रपति को सोंपा ज्ञापन .

ऐतिहासिक अन्याय को सुधरने के लिए बने कानून पर ऐतिहासिक अन्याय. 27.02.2019/ पत्थलगांव / याकूब कुजुर की रिपोर्ट    पत्थलगाँव में एस टी, एस सी, ओ बी सी मंच ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर वन अधिकार कानून 2006 पर माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले Continue Reading

जखोल साकरी बांध की जनसुनवाई रद्द करो फिर वही धोकाः बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

27.02.2019 जखोल साकरी बांध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखंड की 1 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई ताकि वह जन विरोध से बच जाए। सरकार ने प्रभावितों Continue Reading

छत्त्तीसगढ ःः  जनसंगठनों के नेतृत्व में  कोरबा में भू-विस्थापितों की पदयात्रा : कारवां बढ़ता गया, लोग जुड़ते गए, हजारों ने दी कलेक्टोरेट पर दस्तक।

26.02.2019 ● दो दिन पूर्व आंधी-तूफान से मची तबाही भी उन्हें नहीं रोक पाई. दरअसल उनकी जिंदगी में इससे बड़ा तूफान सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से आ गया है, जिसमें उसने पांच माह के अंदर वन भूमि पर बसे एक करोड़ आदिवासियों को बेदखल करने का राज्य सरकारों को Continue Reading

सर्वोच्च न्यायालय में वनाधिकार कानून के तहत आदिवासी तथा परंपरागत वनवासियों के जंगल अधिकार को मान्यता देने पर केंद्र -राज्य सरकारों के ढुल मुल रवैये का छत्तीसगढ़ पी यू सी एल ने कडा एतराज़ किया है .

बिलासपुर .26.02.2019 रायपुर में सम्पन्न राज्य स्तरीय सम्मेलन के मौके पर एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में समुचित पैरवी नही करने के कारण ही देश के एक करोड़ परिवार आज जबरन बेदखली के मुहाने पर हैं जो किसी भयंकर त्रासदी से कम Continue Reading

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ःः आदिवासियों की बेदखली के खिलाफ़ राजनांदगांव में किसान संघ का धरना प्रदर्शन .रायपुर में भारी प्रदर्शन का एलान .

25.02.2019 राजनांदगांव  आज राजनादगांव में जिला किसान संघ के द्वारा वनाधिकार, जलाधिकार को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया जिसमें हजारों के जनसंख्या में किसान सांथी सामील हुए एक सप्ताह पहले से यात्रा चल रहा था जो आज राजनादगांव पहुचा ,परिस्थिति बदलते हुए निर्णय लिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदिवासियों Continue Reading

कोरबा : पीड़ित ,विस्थापित किसान पदयात्रा 26 को :दीपका से कलेक्ट्रेड तक पदयात्रा कर मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे अपना सन्देश.

25.02.2019 /कोरबा  ग्राम स्तर की बैठकों में मिल रहा भारी समर्थन आद्योगिक नगरी कोरबा जिला अंतर्गत कोयला खदानों एवं उसके अंतर्गत संचालित कोलवाशरी , एनटीपीसी ,सीएसईबी , बालको ,देबू पावर , वंदना ,लैंको-अमरकंटक, बाँध परियोजनाओं , रेल कॉरिडोर, हाइवे ,आदि से प्रभावित होने वाले पीड़ित विस्थापित एवं पुनर्वास गाँवों से Continue Reading

छत्त्तीसगढ ःः संवैधानिक हकों और वन संसाधनों पर अधिकारों के लिए ग्राम सभाओं की एकजुत्ता :  वन अधिका कानून को उसकी मूल भावना के अनुरूप के अनुसार लागू करना हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता.: आदिवासी विकास मंत्री .

 मोरगा ,कोरबा / 24 फ़रवरी 2019  छत्त्तीसगढ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने बताया कि कोरबा  ज़िले के ग्राम मोरगा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 13 फरवरी को देश के लाखों आदिवासियों व वन समुदायों के खिलाफ आये आदेश के बाद ग्राम सभाओं का महाजुटान हुआ। अपनी तरह के विशिष्ट Continue Reading

उद्योग मंत्री कवासी लखमा का विधानसभा में एलान ; बस्तर में अदानी को घुसने नहीं देंगे .

रायपुर / 23.02.2019 छत्तीसगढ़ विधान सभा में आज उद्योगमंत्री कवासी लखमा ने कहां की हम उद्योग विरोधी नहीं हैं ,लेकिन गरीब आदिवासियों का नुकसान करके हम किसी को उद्योग नहीं लगाने देंगें. उन्होने अनुदान मानगो पर चर्चा करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अदानी को किसी  भी कीमत पर Continue Reading

वन अधिकार अधिनियम पर सर्वोच्च न्यायलय का फैसला -; विश्व का सबसे बड़ा जंगल आधारित भू-सुधार(लैंड रिफार्म)पर तथा विस्थापन का बड़ा खतरा .; केंद्र और राज्य सरकारें तुरंत हस्तक्षेप करे या सरकार अध्यादेश लाये ; छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन .

रायपुर / 22.02.2019 सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को एक अभूतपूर्व फैसला सुनाते हुए 21 राज्यों को आदेश दिया हैं कि वन अधिकार कानून के तहत निरस्त दावेदारों को बेदखल कर जंगल ज़मीन खाली करवाएँ. हालांकि सर्वोच्च न्यायलय सन 2015 का आंकड़े के हिसाव से पूरे देश में 10 लाख Continue Reading