पर्सनैलिटी आँफ दी वीक में डा. लाखन सिंह : डीएमए आँन लाईन .

इस सप्ताह हम चर्चा कर रहे है मानव अधिकार कार्यकर्ता और पीयूसीएल छत्तीसगढ़ से जुड़े डा. लाखन सिंह से.जो मूलतः ग्वालियर से है और छत्तीसगढ़ में विभिन्न जन आंदोलनों मे सक्रिय है.वे बता रहे है कि कैसे ग्वालियर मेंं वामपंथी आंदोलन से जुड़े रहे ,अपने दोस्तों जो बाद में माकपा Continue Reading

मतगणना के ठीक पहले राजनैतिक परिचर्चा . सारोकार कार्यक्रम ,डीएमए आनलाईन .

लोकसभा चुनाव का अंतिम पडाव मतगणना के ठीक पहले और प्रायोजित एक्जेट पोल के समय राजनैतिक चर्चा .डीएमए आन लाईन के सारोकार कार्यक्रम में. चर्चा में भाग ले रहे हैं ,समाजवादी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ आनंद मिश्रा ,मानव अधिकार कार्यकर्ता डा.लाखन सिंह ,सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता प्रियंका और सामाजिक कार्रवाई Continue Reading

ठेकेदारों की बीएसपी प्रबंधन के साथ खुली मिलीभगत सामने आई, कार्यवाही करो : माकपा.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया है कि पुलिस की जांच-पड़ताल में भिलाई स्टील प्लांट के असंगठित मजदूरों को संगठित करने और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले सीटू नेता कॉमरेड योगेश सोनी पर हुए हमले में बीएसपी प्रबंधन और ठेकेदारों की मिलीभगत खुलकर सामने आई है. योगेश पर यह Continue Reading

एक गैर -चुनावी चर्चा : ललित सुरजन

देशबंधु में 16 मई 2019 को प्रकाशित देश में इन दिनों चारों तरफ आम चुनावों का माहौल है, लेकिन इसी बीच रायपुर में एक गैर-चुनावी घटना से प्याली में तूफान उठने की स्थिति बन गई। हुआ यह है कि प्रदेश के चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता कुणाल शुक्ल एक दिन सुबह-सुबह वरिष्ठ Continue Reading

किस ईश्वर को मानते हैं और कैसी अराधना करते हैं यह एकदम निजी मामला है.

नंद कश्यप भक्त लोग बार बार हिंदू राष्ट्र हिंदू राष्ट्र चिल्लाते हैं लेकिन असलियत क्या है। सच्चाई यह भी है कि भारत विभिन्न राष्ट्रीयताओं का देश रहा है। आज भी छत्तीसगढ़ में बसे उत्तर प्रदेश या बिहार का व्यक्ति अपने घर जाता है तो देस जा रहे हैं कहता है।सभी Continue Reading

5 साल बाद ही सही लेकिन अब तो इसकी पुष्टि हो गई कि प्रधानमंत्री लाइव इंटरव्यू तो नहीं ही देते हैं, इंटरव्यू देने से पहले सवाल मंगा लेते हैं और जवाब देने के बाद एडिट करवाते हैं. – रवीश कुमार .

झूठ जब बढ़ जाता है तो सत्य झांकने चला आता है, क्या आप ऐसा इंटरव्यू देखना चाहेंगे जिसमें सवाल पहले से तय हों ? लेखक रवीश कुमार मई 13, 2019 “I belive that the thinking of the government as well as the thinking of the people in media should be transparent. Continue Reading

आतिश तासीर का लेख राजनीति का लिबरल सरलीकरण है: प्रकाश के रे

लेख मोदी को समकालीन राजनीतिक इतिहास के भीतर रख कर विश्लेषित करने से चूक जाता है. By प्रकाश के रे | May 11, 2019  भारतीय और विदेशी मीडिया में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले से एक ‘हाईली पोलराइज़िंग फ़ीगर’ कहा जाता रहा है. इस संज्ञा का मुख्य आधार उनके Continue Reading

टाईम ने ईदी अमीन पर भी दो अंक निकाले थे एक तारीफ में और दुसरा आदमखोर के रूप में और अब …

नंद कश्यप ,राजनैतिक विश्लेषक कुछ लोग होंगे जिन्हें अगस्त 1972 याद होगा। युगांडा के राष्ट्रपति ईदी अमीन ने भारतीय मूल के 75 हजार लोगों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दे दिया था। इनमें से 20000 से अधिक लोग ब्रिटिश पासपोर्ट धारी थे।इस संबंध में थोड़ा ईदी अमीन के बारे Continue Reading

Of the great democracies to fall to populism, India was the first. ReutersBY AATISH TASEER ; This appears in the May 20, 2019 issue of TIME.

ReutersBY AATISH TASEER MAY 9, 2019 I DEASTaseer, a novelist and journalist, is the author, most recently, of The Twice-Born: Life and Death on the Ganges Read Ian Bremmer’s “Modi Is India’s Best Hope for Economic Reform” Of the great democracies to fall to populism, India was the first. In 2014, Narendra Continue Reading

प्रज्ञा के बहाने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश – जीवेश चौबे

हिंदू या भगवा आतंकवाद की थ्योरी के जनक मुख्य रूप से दिग्विजय सिंह ही रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने खूब नमक-मिर्च लगाकर हिंदू आतंकवाद के मुद्दे को देश की जनता के सामने रखा। उन्हीं ने हिन्दू या भगवा आतंक के आख्यान को देश में फैलाया। यह स्पष्ट है कि दिग्विजय Continue Reading