इंदौर : प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर सिमरोल के सागरपैसा गाँव में किसानों, मेहनतकशों और मजदूरों के साथ उनकी समस्या पर परिचर्चा की.

13.04.2018 इंदौर   सारिका श्रीवास्तव की रिपोर्ट    8 अप्रैल 2018। इंदौर (मध्य प्रदेश)। प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर सिमरोल के सागरपैसा गाँव में किसानों, मेहनतकशों और मजदूरों के साथ उनकी समस्या पर परिचर्चा की। प्रधानमंत्री सड़क योजना को पन्द्रह साल होने को आए हैं
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13.04.2018 कविता कोष से   ❇      करेले बेचने आई बच्चियाँ  पुराने उजाड़ मकानों में खेतों-मैदानों में ट्रेन की पटरियों के किनारे सड़क किनारे घूरों में उगी हैं जो लताएँ जंगली करेले की वहीं से तोड़कर लाती हैं तीन बच्चियाँ छोटे-छोटे करेले गहरे हरे कुछ काई जैसे रंग के और मोल-भाव के बाद तीन रुपए
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⚫  ⚫ मजदूर बिगुल से आभार सहित       कात्यायनी विगत 24 वर्षों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर स्वतंत्र लेखन। लगभग सात वर्षों तक ‘नवभारत टाइम्स’ और ‘स्वतंत्र भारत’ की संवाददाता के रूप में भी काम किया। संप्रति : स्वतंत्र लेखन। कविताएँ हिन्दी की अधिकांश पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कुछ कविताएँ अंग्रेजी, पंजाबी, मराठी, गुजराती
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  12.04.2018 ⭕ || हमें दंगों पर कविता लिखनी है // जब नींद के निचाट अँधेरे में सेंध लगा रहे थे सपने और बच्चों की हँसी से गुदगुदा उठी थी मन की देह, हम जाने किन षड़यंत्रों की ओट में बैठे मंत्रणा करते रहे! व्यंजना के लुब्ध पथ पर क्रियापदों के झुण्ड और धूल भरे
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यातना स्वप्न और जीवन अंजनी कुमार आभार बहुत बहुत  https://bizooka2009.blogspot.in/2018/04/blog-post_11.html?m=1 जी. एन. साईबाबा जी. एन. साईबाबा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कालेज में अंग्रेजी के एसिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उन्होंने अध्यापन का कार्य 2003-04 की अवधि में शुरू किया।  2010-2011 में अपना शोध प्रबंध लिखा और गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही राष्ट्रपति, जिन्होंने प्रोटोकाॅल तोड़ते
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11.04.2018 महात्मा गांधी की किताब हिंद स्वराज की शताब्दी के वर्ष में कई स्तरों पर उस किताब की चर्चा हुई. उसी दौर में मैंने यह लेख लिखा था. आज महात्मा फुले के जन्मदिन के अवसर पर इसे फिर पोस्ट करके मुझे हार्दिक खुशी हो रही है. दरअसल हिंद स्वराज एक ऐसी किताब है, जिसने भारत
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Rare picture of Lahore Railway Station (1947), Photographer Unknown ** लाहौर में हमारा घर डेविस रोड पर था। एक बहुत बड़ी कलोनीयल कोठी जिस के पड़ोस में माथुर्स विला था। अब्बा पंजाब एड्वर्ड्ज़ कॉलेज के प्रिन्सिपल थे जबके मिस्टर विद्या सागर माथुर, जिन्हें मैं माथुर अंकल कहती थी, वहाँ के वाइस प्रिन्सिपल थे। माथुर अंकल
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9.04.2018 हिन्दी के विकास में जिन महापुरुषों का महान योगदान है उनमें राहुल सांकृत्यायन प्रमुख हैं। नामवर सिंह ने अपने तरीके से उनको याद किया है और उनके बारे में जो बातें कही हैं वे काफी मूल्यवान हैं। नामवर सिंह ने उनकी तीन विशेषताएं बतायी हैं,प्रथम, पुनर्जन्म की धारणा में अविश्वास,दूसरा, निरन्तर कर्म की धारणा
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मेरा आदिवासी होना ही काफी है मेरी हत्या के लिए, नक्सली व मुखबीर होना तो बस बहाना है। मेरी माटी पर है नजर तुम्हारी विकास व समसरता तो बस फसाना है।। छिन लेना चाहते हैं सारी सम्पदाएं मुझसे , जो प्रकृति ने मुझे दिया प्यार से , मैनें सरंक्षण किया सबका पर अब लुटना चाहते
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  एकांत श्रीवास्तव हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि हैं। उन्हें हिंदी कविता में अपने विशिष्ट योगदान के कारण केदार सम्मान से सम्मानित किया गया है। एकांत का जन्म छुरा, छत्तीसगढ में हुआ है . कृतियाँ ‘अन्न हैं मेरे शब्द`, ‘मिट्टी से कहूँगा धन्यवाद` और ‘बीज से फूल तक` तीन काव्य संकलन प्रकाशित। कविता पर वैचारिक गद्य, निबंध, डायरी लेखन उनके प्रिय विषय
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