|| मरते समय उन बच्चों ने भी माँ को पुकारा होगा ||यह कविता 75 साल पहले मारे गए उन मासूम बच्चों की याद में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सोमदत्त जी ने लिखी थी.

 

सोमदत्त

*दस्तक* के लिए प्रस्तुति : *अनिल करमेले*

*क्रागुएवात्स में पूरे स्कूल के साथ तीसरी क्लास की परीक्षा – स्मृतिशेष सोमदत्त जी की कविता*

स्कूल के 800 बच्चों की हत्या की दास्तान इस कविता में पढ़ते हुए आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे.

क्रागुएवात्स में पूरे स्कूल के साथ तीसरी क्लास की परीक्षा जिसमे सवाल बंदूक पूछती है और जवाब सीने से देने होते हैं।

इस कविता में दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान की एक घटना का ज़िक्र है जिसमे हिटलर की नाज़ी सेनाओं द्वारा मासूम बच्चों के क़त्ल की एक दास्ताँ हैं ।

वह तारीख 19 अक्टूबर 1941 थी जब युगोस्लाविया मुहिम के दौरान जर्मन सेनाएं सुमादिया क्षेत्र के कस्बे क्रागुएवात्स पहुंची । 20 को उन्होंने वहां के बेकसूर लोगों को गिरफ़्तार कर लिया । उसी दिन फासिस्टों ने क्रागुएवात्स के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल के 800 बच्चों को शिक्षकों सहित गिरफ्तार किया और गांव के पश्चिम छोर पर बनी एक कच्ची बैरक में बंद कर दिया । रात भर वहां रहने के बाद दूसरे रोज 21 अक्टूबर की सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे के बीच वे मासूम बच्चे 10-20 और 25- 40 के समूहों में अलग-अलग अपने शिक्षकों सहित भून दिए गए ।

जर्मनों के जाने के बाद जब दूसरे गांवों के बचे खुचे लोग वहां पहुंचे तब उन्हें कब्र और सूखे खून से सनी मिट्टी के बीच कुछ चिन्दियाँ मिली । कागज की वे चिन्दियाँ दरअसल कुछ चिठ्ठियाँ थी जिनमें बच्चों ने और शिक्षकों ने संदेश लिखे थे अपने प्रियजनों को संबोधित आखरी संदेसे इस उम्मीद में कि उनके मारे जाने के बाद वे उन्हें मिल जाएँ ।

*सोमदत्त जी की यह कविता एक बच्चे की अपनी माँ को लिखी गई मार्मिक चिठ्ठी के रूप में है । इसे पढ़ना एक तकलीफ़ से गुजरना है*।

सोमदत्त जी लिखते हैं “2 मई 1981 को जब मैं 21 अक्टूबर स्मारक पहुंचा तब पहली बार दूसरे महायुद्ध में मासूमों द्वारा झेली गई यातना का मर्म मिला , क्रागुएवात्स युगोस्लाविया यात्रा की सर्वाधिक तकलीफदेह लेकिन मूल्यवान अनुभूति है । आज भी जब क्रागुएवात्स याद आ जाता है तब याद आती है उन *800 बच्चों की आख़िरी आवाजें ।”*

*यह कविता 75 साल पहले मारे गए उन मासूम बच्चों की याद में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए*

*० शरद कोकास*
________________________

 

? *शाम सात बजे*

मामा, मामा
मुझे नींद आ रही है
पूरी क्लास को नींद आ रही है
सब जम्हाई ले रहे हैं
अभी-अभी मेरा तलुवा खुजाया
कई बच्चों ने तलवे खुजाए बारी बारी से
तुमने मेरा नाम लिया क्या मामा
दरवाजे पर खड़े होकर पुकारा या
चेरी के नीचे से ?
वहां टूटी हरी बोतल का एक टुकड़ा पड़ा था
सुबह उससे बाल-बाल बचा में
तुम्हारे साथ टॉमी भी था क्या
मुझे पुकारता
अलबत्ता उसकी आवाज मुझे नहीं सुनाई दी
क्या तुमने उसके सिर के बाल खुजा दिए मेरी तरह
उसकी आवाज हमेशा पहचान जाता हूं मैं
इस वक्त
जाने कितने कुत्तों की
वैसी आवाज आ रही हैं मां
जिन्हें तू रोना कहती है
आज मन गणित की क्लास में
नताशा को फिर ज्यादा नंबर मिले
मुझे उसके बाद
मिरो को मेरे बाद अन्तिच को मिरो के बाद

पान केक संभाल कर रखना
वास्को अंकल को बहुत पसंद है
चट कर जाएंगे
मामा मुझे नींद आ रही है
सर को गाने सूझ रहे हैं
वह अपनी कैप घुटनों पर रखे फर्श पर बैठे हैं
मूछों के नीचे हंसते हुए
आज पहली बार वह हम सब को बार-बार गाने सुना रहे हैं
वह कहते हैं गाओ
दूना का गीत गाओ
बियोग्राद का गीत गाओ
दिनभर हमने गाया- पूरी क्लास ने- पूरे स्कूल ने

आज पूरा स्कूल एक क्लास में लगा है
क्लास स्कूल में नहीं लगी
आठवीं क्लास वाली सिस्टर वीश्निच
अरे वही वाली जिनकी आंखें बहुत काली
जिनके बाल भुट्टे के सिर में उगे रेशों के रंग से
अरे वही मां जो पिछले साल परी बनी थी -वह
अचानक दौड़ती हुई हमारे क्लास में आई
बोली,
बोली
बच्चों । मेरे फूलों ।
उनने मेरे फूलों क्यों कहा मामा
हम कोई फूल हैं ?
बोली , बच्चों !
यह हमारा नया स्कूल है
जंगल में टीन से घिरा कोई स्कूल होता है क्या
कल सुबह परीक्षा होगी
तड़के शुरू हो जाएगी
हर एक की होगी
बच्चों की, टीचरों की, प्रिंसिपल की
पानी पिलाने वाली बूढी आया की
स्कूल के चौकीदार सूपिच की
घंटी बजाने वाले को भी छुट्टी नहीं मिलेगी
सब
एक लाइन में खड़े किए जाएंगे
फिर एक-एक से सवाल होगा
सवाल बंदूक पूछेगी
और हमें मुंह से नहीं
अपने सीने से जवाब देने होंगे
सिर्फ एक सवाल किया जाएगा एक से
पर्चा जर्मनी से आया है
कोई हिटलर है
उसने बनाया है

ऐसा कहकर वह हंसी
हमारी पूरी क्लास हंसी
हंसते-हंसते नताशा ने मुझे गुदगुदाया
मुझे खूब हंसी आई
टीचरों की परीक्षा की बात सभी को भाई
परीक्षा के डर के मारे ही
प्रिंसिपल सर भर नहीं हंसे
और वह खूसट सूपिच जो हर वक़्त हँसता है
वह भी नहीं हंसा
और ना वह घंटी बजाने वाला
हम लोग तो खूब हंसे
सब ने ताली बजाई
की बंदूक से पहली बार हम खेलेंगे
उसके सवाल सीने पर झेलेंगे
पापा नहीं रहेंगे
तुम नहीं रहोगी
हमी हम रहेंगे
खूब मजा रहेगा
ठाएँ- ठाएँ ,ठाएँ- ठाएँ होगा
परी सिस्टर ने बताया
पूरे स्कूल से एक ही सवाल पूछा जाएगा
ऐसा क्यों है माँ कि सभी से एक सवाल पूछा जाएगा ?

इसी स्कूल में
आज रात भर रहना है
और मुझे नींद आ रही है मां
टीचर कहती है अभी ब्रेड मिलेगी
टीचर ने बताया कि तुम्हें और पापा दोनों को मालूम है
सभी के मम्मी पापा को मालूम है कि
सब रात भर यही रहेंगे
ममा !
ममा !
अगले बरस जब मैं चौथी में जाऊंगा
तो यह जो जर्मन है ना लाल चौकोर निशान वाला
उसको चेरी पर चढ़कर
अपनी गुलेल से एक पत्थर जमाऊंगा
उसने
अभी थोड़ी देर पहले
दूना का गीत गाती परी को
बंदूक के हत्थे से नीचे गिरा दिया था
ममा उनके मुंह का खून
मेरे सामने फैला है उसका रंग बदल रहा है
उसे देख कर मुझे डर लग रहा है
परीक्षा देकर कल जब घर आऊंगा
सब कुछ बताऊंगा
अभी मेरा मुंह सूख रहा है

? *रात बारह बजे*

पानी
ममा ! पानी
मुझे प्यास लगी है
भूख भी लगी है
नताशा रो रही है
मिरो और आन्तिच भी जाग रहे हैं
घास गड़ने लगी
प्रिंसिपल सर लिख रहे हैं
अभी एक चिड़िया उड़ी-
आज दोपहर भी
दो कबूतर उड़ने आए थे
जब उन्होंने उन्हें गिराया मार
फिर एक झुंड आया
उन्हें भी उनने गिराया मार
दो लड़कों की कमीज़ें उतार कर उसने आग जलाई
दोनों लड़के चिल्लाए
अभी जब वे दोनों मुझे सपने में दिखे
नंग- धडंग ,जर्मनों को नोचते, अपनी चेरी के सामने
टॉमी उन्हें देख भौंका
मुझे हंसी आई
हंसा तो नींद खुली
मुझे प्यास लगी है
कहीं पानी नहीं दिखता

? *सुबह पांच बजे*

दूसरे रोज
मामा, पूरी क्लास जब जगाई गई
तब अंधेरा था
प्रिंसिपल सर ने अपनी शानदार आवाज में कहा
खड़े हो जाओ
दूना का गीत गाओ
सब ने गाया
वह जर्मन आया
उसने प्रिंसिपल सर के कंधे पर
बंदूक का हत्था पीछे से जमाया और हंसा
कंधे पर हाथ रखते गिरते-गिरते बचते
सर भी हंसे
सर जब हंसे
तब डर लगा मुझे

? *सुबह सात बजे*

मामा धूप निकली हुई है
हमारे क्लास की परीक्षा शुरु होने वाली है
दस – दस लड़कों के लिए एक बंदूक है

नकल से बचाने के लिए
दूर दूर ले जाया गया है सबको स्कूल से
हर क्लास दस-दस पेड़ दूर है

मुझे इतनी प्यास लगी है इतनी प्यास
की बंदूक की परीक्षा ना होती
भाग आता मैं

? *सुबह साढ़े सात बजे*

 

मामा बंदूक वाले सर सामने खड़े हैं चौकोर निशान पहने
बाद में हम उनसे गंदे जर्मन की शिकायत करेंगे
परी हमारे पीछे
उनने जोर से कहा
सीने से जवाब देना है
खोलो सीने, ऊंचे उठाओ अपने सिर
अगर थका ना होता मैं
तुम्हारे पेट तक उठा लेता अपना सिर
लेकिन तीनों बटन खोल लिए हैं

ममा
परीक्षा शुरू
हर कोई सवाल सुनते ही
दूना की तरह लहराता
धड़ से नीचे लेट जाता है
मैं भी ऐसा करूंगा
पर चीखूंगा नहीं दूसरों के जैसे

फिर
दौड़ता आऊंगा………
पान केक………..

✍? *सोमदत्त*

*दस्तक* के लिए प्रस्तुति : *अनिल करमेले*

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