इस बहुत शोर के बीच – संपादकीय ,नथमल शर्मा 

इस बहुत शोर के बीच – संपादकीय ,नथमल शर्मा 

ईवनिंग टाइम्स बिलासपुर

सब तरफ बहुत शोर है। बेचैनी भरा शोर। लगता है जैसे आग लगी हुई है। ऐसी तपन के बीच कोई शीतल सा हवा का झोंका आ जाए तो ? तो सचमुच बहुत सुकून मिलता है। हमारे छत्तीसगढ़ के एक गाँव देवरी से आई ऐसी ही एक सुकून भरी ख़बर। इस पूरी बेचैनी के बीच जैसे एक प्यार भरी पुकार। देवरी गांव में एक युवक है भोज साहू। वह गांव में जिनके यहाँ बेटी होती है उस दंपत्ति को सम्मानित करते हैं। भोज साहू की इस पहल पर अब उनके साथ गांव के ही कुछ और युवा साथी जुड़ गए हैं।
देश के दो राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। हमारे छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव की धूम है। सनी लियोन से लेकर खली तक के जलवे बिखर रहे हैं (सनी के न आने के बावजूद )। एक मंत्री की सीडी का बहुत शोर है। राजनीति के भीतरी गलियारों से निकल कर आई सीडी ने बाहर तक गंदी हो रही (हो गई ) राजनीति का चरित्र ही बताया है। एक पत्रकार गिरफ्तार है पर उत्सव में सम्मानित हो रहे पत्रकारों के शोर के आगे पुलिस के दमन के खिलाफ आवाज दब गई है। हम उत्सवधर्मिता में ज्यादा सुख पाते हैं। गावों में बोनस तिहार का शोर है। देश के प्रधानमंत्री को गुजरात और हिमाचल में कमल खिल जाने की चिंता है। और उनके भाषणों में कांग्रेस के खिलाफ बहुत शोर है। ऐसे शोर के बीच राष्ट्रपति आए हमारे प्रदेश में। कहा कि इस प्रदेश की तरक्की में उनकी भी सहभागिता है। विपक्ष की राजनीति का गुम होता शोर भी है। अमेरिका की सड़कों से बेहतर मध्यप्रदेश की सड़कों के होने का हास्य मिश्रित शोर भी। देश के किसी कोने में हुए एक उप चुनाव में भाजपा को बहुत वोटों से हराकर कांग्रेस के जीतने का भी शोर।
सब तरफ के ऐसे शोर के बीच अपने छत्तीसगढ़ के एक गाँव देवरी से एक खबर आई। अख़बार के किसी कोने में छपी इस खबर के अनुसार गांव में भोज साहू नामक युवक एक बहुत ही सार्थक काम में जुटे हुए हैं। गांव में जिनके यहाँ बेटी होती है वे उसकेघर जाते हैं। और बेटी के होने की खुशी में उसके माता-पिता को सम्मानित करते हैं। इतना ही नहीं जिनको दो बेटियाँ हैं वे उन्हें परिवार नियोजन के लिए प्रेरित करते हैं। समझाते हैं कि बेटे की चाह में तीन चार या उससे भी ज्यादा बच्चे पैदा करते जाना कतई उचित नहीं। भोज साहू के इस काम को सराहना मिल रही है। कुछ और साथी भी साथ जुटने लगे हैं। बालोद जिले के इस गाँव देवरी में कोई युवक इतना महत्वपूर्ण काम कर रहा है । चुपचाप, बिना किसी शोर शराबे के। ऐसे कामों के लिए पता नहीं भोज साहू को कहाँ से प्रेरणा मिली। वे करते क्या हैं ? इत्यादि जानकारी नहीं है । वे कोई विज्ञापन दाता होते तो अख़बार के पूरे पन्ने पर उनकी रंगीन तस्वीर के साथ स्टोरी होती। फिर भी अविश्वास और रिश्तों के छीजने के इस भयावह समय में भोज साहू की यह खबर सुकून देती है। सब कुछ खत्म नही हुआ है। समाज में भोज साहू और उनके साथी हैं तो अख़बार में भी कोने में ही सही इतनी संवेदनशीलता बची हुई है। यही तो उम्मीद की लौ है जो हमें मानवीय बनाए रखती है। बेटियों को बचाने के लिए जिस समाज में सरकार को अभियान चलाना पड़े। उसकी मानसिकता को समझा जा सकता है। तथाकथित स्त्री विमर्श और सशक्तिकरण ने सामाजिक ताने-बाने को चोट ही पहुचाई। स्त्री-पुरूष सहयात्री या साथी होने के बजाय प्रतिपक्ष ही तो होकर रह गए। बहुत बहुत बरसों से अन्याय सहती आ रही स्त्री को सशक्त बनाने के सेमीनारों,कार्यशालाओं ने एनजीओ को तो पुष्पित पल्लवित किया पर समाज में सौहार्द्र पर गहरी चोट की। सारा सशक्तिकरण बेटियों को नहीं बचा पा रहा है। हाँ, इस अभियान से हाशिए पर पड़ी स्त्री मुख्य धारा की तरफ तो बढ़ी। इस जरूरी मुकाम की ओर बढ़ने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। बढ़ना जरूरी है पर संतुलन भी उतना ही जरूरी है। सामाजिक विमर्श सिर्फ़ कुछ एनजीओ के विमर्श बनकर रह जाने से ऐसे हालात आ जाते हैं। कुछ लोग और संस्थाएं भी इस पर गंभीर काम कर रही है।
इनके भी काम सामने आ नहीं पाते। इसलिए कि अब तो बे-काम का ही शोर ज्यादा बढ़ गया है। लोग बोल नहीं चीख रहें हैं। पर्यावरण और जंगलों को बचाने की बात हो रही है पर कारखानों की चिमनियां और ऊंची होते जा रही है। बिजली बनाने के लिए लाखों गैलन पानी लग रहा है और हम पीने के साफ पानी के लिए तरस रहें हैं। खेत सिमट रहें हैं। कालोनियां बन रही हैं जिसने मोहल्ले की आत्मीयता को लील लिया है। ऐसे शोर के बीच देवरी गांव में कोई एक युवक कुछ सार्थक कर रहा है चुपचाप। बेटियों की दुआएं तो उसके साथ है ही। हम अपने आसपास ऐसा या ऐसा ही कुछ नहीं कर सकते ? इस शोरगुल से थोड़ा हटकर सोचें कि अब तक किए कामों में, अब तक जिए जीवन में ऐसा कुछ किया है क्या हमने ?
मुक्तिबोध की पंक्तियाँ याद आतीं हैं-
अब तक क्या किया
जीवन क्या जिया
बहुत-बहुत ज्यादा लिया
और दिया बहुत कम !!!

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नथमल शर्मा ,संपादक ईवनिंग टाईम्स बिलासपुर

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