मानवाधिकार आयोग ने कोंडसवाली में हुई आगजनी और हत्याकांड पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की और मुख्य सचिव को नोटिस दिया .छत्तीसगढ़ . **

मानवाधिकार आयोग ने कोंडसवाली में हुई आगजनी और हत्याकांड पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की और मुख्य सचिव को नोटिस दिया .छत्तीसगढ़ .  **

मानवाधिकार आयोग ने कोंडसवाली में हुई आगजनी और हत्याकांड पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की और मुख्य सचिव को नोटिस दिया .छत्तीसगढ़ . **

 

टिप्पणी और ऑब्जर्वेशन

**

आयोग को उपलब्ध तथ्यों से ऐसा लगता है कि वर्ष २००७ में कोंडासावली, कमराजुड़ा और कररेपाड़ा गांवों में घरों को जलाने की घटना और सात गांववाले की हत्या हुई थी। कलेक्टर, सुकमा और पुलिस अधीक्षक, सुक्मा के अनुसार, इस घटना के सम्बन्ध में कोई भी मामला इसलिए पंजीकृत नहीं किया गया था क्योंकि किसी ने भी कभी भी इस गाँव के अधिकार क्षेत्र में आने वाले थाना पर कोई रिपोर्ट नहीं लिखवाई थी।

एक जिले में, राजस्व संग्रह और विकास की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होती है। इसी तरह, कानून और व्यवस्था के रखरखाव की ज़िम्मेदारी, जिले के पुलिस अधीक्षक के कंधों पर निर्भर है, जिन्हें इस कार्य में पुलिस स्टेशनों और पुलिस पदों में तैनात उनके विभिन्न अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए, राजस्व विभाग के अधिकारी और विभिन्न विकास संबंधित विभाग जैसे ब्लॉक विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और उनके अधीनस्थों को नियमित रूप से अपने क्षेत्राधिकार में गांवों का दौरा करना पड़ता है और इन यात्राओं के दौरान उन गांवों में हुई घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त/एकत्र करनी होती है। इसी प्रकार, विभिन्न पुलिस स्टेशनों में तैनात पुलिस अधिकारियों को नियमित रूप से सूचनाओं को एकत्रित करने के लिए, जांच के संबंध में आदि के लिए अपने अधिकार क्षेत्र के विभिन्न गांवों में जाने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, प्रत्येक जिले में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों का एक नेटवर्क है , स्वास्थ्य उप केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र. इन स्कूल और स्वास्थ्य देखभाल सम्बंधित कार्यों को सरकारी कर्मचारियों द्वारा ही किया और संभाला जाता है. इस प्रकार, एक जिले में जिला कार्यकर्ताओं का नेटवर्क काफी बड़ा और व्यापक है; खासकर के पुलिस और राजस्व विभाग का।

इसलिए, यह अविश्वसनीय और अस्वीकार्य है कि उपरोक्त नामित तीन गांवों में इस प्रकार की भयानक घटनाएं हुईं और जिसके शिकायत आखिरकार 2013 में दर्ज की गई, जिसके बाद जगर्गुडा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और यह जिला सुकमा के किसी भी गांव / ब्लॉक / पुलिस पद / पुलिस स्टेशन स्तर के कार्यकर्ताओं के नोटिस पर नहीं आया. इसलिए, आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला है कि ये घटनाएं पुलिस, राजस्व और जिला सुकमा के अन्य अधिकारियों के नोटिस में घटना हनी के तुरंत बाद आ गईं थी, लेकिन पुलिस और जिला अधिकारियों ने जानबूझकर इन हत्याओं और आगजनी की घटनाओं को नाज़ेंदाज़ कर दिया।

वास्तव में, राज्य और जिला सुकमा अधिकारी द्वारा सात साल तक इन घटनाओं का संज्ञान नहीं लेना यह बहुत मजबूती से दर्शाता है कि यह अपराध सुक्मा जिले/ राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा किया गया है।

इस तरह लंबी अवधि तक इन घटनाओं का संज्ञान नहीं लेने की जानबूझकर कर की गयी चूक , इस तथ्य की और दृढ़ता से इंगित करता है की ये भयावह अपराध जगतगुडा बेस कैंप के एसपीओ द्वारा किया गया था, जैसा कि FIR no. 10/2013 के शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है।

जिस तरीके से पुलिस द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है और जिस तरीके से कोंटा तहसीलदार ने अपनी जांच की है, उस तरीके को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि राज्य विभागों का उद्देश्य पुलिस और प्रशासन दोनों का उद्देश्यइन घटनाओं के बारे में सच्चाई का पता लगाने का नहीं है लेकिन इन अपराधों को छिपने का है। तहसीलदार कोंटा की जांच रिपोर्ट और जांच अधिकारी द्वारा दर्ज बयानों का पढ़ने से पता चलता है कि उनका उद्देश्य सत्य को खोदने के लिए बिल्कुल भी नहीं है और वह केवलइस घटना का एक कवर अप ऑपरेशन कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य के सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले ये कार्य कोंडसावली, कमराजुड़ा और कररेपारा गांव के मारे गए निवासियों और जिनके घर / झोपड़े जला दिए गए थे के मानवाधिकारों का एक बड़ा उल्लंघन है.

लेकिन, आयोग अपना अंतिम नतीजे लेने से पहले, छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार को उपरोक्त वर्णित अनियमितताओं और टिपण्णीयों पर जवाब देने का अवसार प्रदान करता है.

साथ ही आयोग राज्य सरकार से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त करना चाहती है –
दिनांक 1.1.2007 से 31.10.2013 की अवधि के दौरान गांव कोंडासावली, कामरगुड़ा और करेपारा के पटवारियों के नाम की जानकारी , इन तीन गांवों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले नायब तहसीलदारों, तहसीलदारों, ब्लाक विकास अधिकारियों, कृषि विकास अधिकारियो, खाद्य अधिकारियों, आशा कर्मचारियों के नाम की जानकारी. इन तीन गांवों से निकटतम पुलिस थाना का नाम और दूरी की जानकारी तथा 1.1.2007 से 31.10.2013 की अवधि के दौरान इन पुलिस पदों में कार्यरत अधिकारियो के नाम की जानकारी. इन तीन गांवों से जगरगुडा पुलिस थाना की दूरी तथा 1.1.2007 से 31.10.2013 की अवधि के दौरान थाना जगरगुडा के थाना गृह अधिकारियों के नाम की जानकारी. दिनांक 1.1.2007 से 31.10.2013 की अवधि के दौरान इन तीन गांवों से सबसे निकटतम गाँव का नाम तथा दुरी जहां पर प्राथमिक विद्यालय स्थित हो. इन गांवों की निकटता में स्थित स्वास्थ्य उप केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम तथा दुरी.
छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को उपरोक्त मुद्दों पर आठ सप्ताह के भीतर आयोग द्वारा मांगी गई जानकारियों पर टिप्पणी करने के निर्देश दिए गए हैं।

***

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account