लाखों की निर्माण सामान भी पहाड़ पर कर दिया जाम, अब पहाड़ से हजारों पेड़ों को कटकर रात में हो रही तस्करी, वन विभाग के अधिकारी मौन,.-कांकेर गढिया पहाड़

लाखों की निर्माण सामान भी पहाड़ पर कर दिया जाम, अब पहाड़ से हजारों पेड़ों को कटकर रात में हो रही तस्करी, वन विभाग के अधिकारी मौन,.-कांकेर गढिया पहाड़

* पानी स्टोर करने के लिए ठेकेदार ने गढिय़ा पहाड़ पर खोद दिया तालाब.
*-मजदूरों ने पहाड़ पर खड़ा कर गाड दिया टेंट,
* लाखों की निर्माण सामान भी पहाड़ पर कर दिया जाम, अब पहाड़ से हजारों पेड़ों को कटकर रात में हो रही तस्करी, वन विभाग के अधिकारी मौन,.
* लोकनिर्माण से खिलाफ कार्रवाई करने से वन विभाग के अधिकारियों का कांप रहे हाथ .

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अंकुर तिवारी की विशेष रिपोर्ट

3.11.2017

कांकेर. उच्चाधिकारियों के संरक्षण में गढिय़ा पहाड़ की बर्बादी हो रही है। पहाड़ पर ठेकेदार ने पोकलेन मशीन से तालाब खोदकर पानी स्टोर कर रहा है। सडक़ निर्माण में लगे मजदूरों ने पहाड़ पर तीन टेंट गाड़ दिया है। सडक़ निर्माण में निकले मलबा को पहाड़ पर फेंक देने से हजारों पेड़ दफन हो गए हैं। लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने में वन विभाग के अफसरों का हाथ कांप रहा है।
गढिय़ा पहाड़ पर बन रही रोड में खुली अनियमितता की जा रही है। लोनिवि व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने से वन विभाग के अफसरों में डर बनी है। ठेकेदार के सामने वन विभाग के अधिकारी पूरी तरह से नतमस्तक हो चुके हैं। ठेकेदार ने करोड़ों के मलबा को पहाड़ से नीचे फेंक दिया है। इस मलबा में दबने से हजारों पेड़ नष्ट हो चुके हैं। इस पहाड़ के ठीक नीचे निवास कर रही हजारों आबादी के उपर संकट के बादल छा गया है। १३.८६ करोड़ की इस सडक़ निर्माण में जांच हुई तो करोड़ों का घोटाला सामने आएगा

पत्थर को मशीन से काटकर निकाला ही नहीं गया और अफसरों ने करोड़ों का भुगतान कर दिया। करोड़ों का मलबा जाम होने के बाद भी कागज में दूसरे स्थान पर डंप दिखा का ठेकेदार पर अफसर मेहबान हो गए। वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पहाड़ पर पानी स्टोर के लिए तालाब का खनन नहीं किया जाना है। पहाड़ पर टेंट प्रतिबंधित होने के बाद भी खड़ा कर दिया गया है। लोनिवि के अफसरों के सरंक्षण में नियम का खुला उंलघन किया जा रहा है।

 

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( इन नियमों के लिए लोनिवि ने दिया था बचन, अब इसका पालन नहीं.
” सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विशेषज्ञ समिमि की अंतिम रिपोर्ट में यदि शुद्ध पत्याशा मूल्य की राशि की अतिरिक्त राशि जमा करने के लिए निर्देश प्राप्त होगा तो विभाग जमा करने के लिए बचनबद्ध है। प्रत्यावर्तित भूमि के बदले दोगुने क्षेत्र में वैकल्पिक पौधरोपण के लिए ३६ लाख कैंपामद में देने को बचन देता है। मिट्टी कटाव को रोकने के लिए भू संरक्षण कार्य के लिए ४ लाख जमा करने को बचनबद्ध हूं। सडक़ निर्माण करते समय किसी भी सामग्रियों को वन क्षेत्र में डंप नहीं करुंगा। प्रस्तावित सडक़ निर्माण के अंदर आने वाले पेड़ों को ही हटाया जाएगा। सडक़ निर्माण से बाहर के पेड़ों को काटने पर वन विभाग को दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है।

वन विभाग ने किस नियम शर्तों के आधार पर गढिय़ा पहाड़ पर सडक़ निर्माण के लिए अनुमति दिया था, इसकी जानकारी हमें नहीं है। अगर लोनिवि के संरक्षण में ठेकेदार नियम का पालन नहीं कर रहा तो वन विभाग की ओर से कठोर कार्रवाई की जाएगी। “

( सीएल नाग. रेंजर वन विभाग कांकेर.)
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” गढिय़ा पहाड़ सडक़ निर्माण में आप सीरियल छाप रहे हो तो छापो, इस सीरियल छापने से कुछ नहीं होने वाला है। रही बात ठेकेदार को भुगतान करने की तो वह मैं नहीं जानता हूं। बाबू से संपर्क करो वहीं जानकारी देगा और आप खूब सीरियल से छापो।”

( डीराम. ईई लोक निर्माण विभाग कांकेर)
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डीएफओ आवास के पास पहाड़ पर हो रहे थे
बम से धमके, अफसर बोले-हमने नहीं सूना
-पहाड़ के नीचे आबादी में मची थी खलबली, लोगों के घरों में गिर रहे थे पत्थर के टूकड़े, आज भी पहाड़ पर बारुद से ब्लॉस्ट के निशान, मुख्यमंत्री के घोषणा के नाम पर ठेकेदार दे रहा था अफसरों को धमकी, आज तक आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं, मुख्यमंत्री ने नियम से काम करने के लिए स्वीकृत किया था १३.८६ करोड़.

कांकेर. डीएफओ आवास से गढिय़ा पहाड़ पर बन रही सडक़ महज पांच सौ मीटर और दफ्तर डेढ़ किमी दूर है। दो साल पहले नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए ठेकेदार ने सूरज ढलते ही पहाड़ को बारुद से दहला रहा था। पहाड़ के नीचे आम जनता में भगदड़ जैसे हालात थे, लोगों के घरों पर पत्थर के टूकड़े गिर रहे थे। लेकिन वन विभाग के अफसरों और कलक्टर के कानों तक इस अवैध धमाकों की आवाज नहीं पहुंच रही थी, अफसरों के ऐसे बयान से यहां निवास करने वाली जनता हैरान है।

जानकारी के अनुसार गढिय़ा पहाड़ वन विभाग कांकेर वृत्त के अधीन आता है। कक्ष क्रमांक पुराना ३० और नया ६९ में रकबा २.०२८ हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन विभाग की भूमि पर २.२६ किमी सडक़ का निर्माण कराया जा रहा है। सडक़ निर्माण के लिए १३.८६ करोड़ मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर स्वीकृत किया गया है। वन विभाग के नियम शर्तों के तहत सडक़ का निर्माण कराना है। पहाड़ पर एक पटाखा फोडऩे तक की अनुमति लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार को नहीं थी। बावजूद पहाड़ को सीएम के घोषणा के नाम पर ठेकेदार ने बम से तोड़ दिया। पहाड़ पर बारुद के आज भी निशान साफ दिख रहे हैं। ८ किसी चौड़ी सडक़ निर्माण में आने वाले पत्थरों को मशीन से चीरकर निकालना था। जबकि लोक निर्माण विभाग के संरक्षण में पहाड़ को पोकलेन मशीन और बारुद से पूरी तरह से तोड़ दिया गया है। बारुद से दो साल पहले गढिय़ा पहाड़ पर जब धमका हो रहा था तो नीच बसी आबादी अपनी घरों छोड़ दी थी। बम से तोड़ जाने से पत्थर के टूकड़े लोगों के घरों में गिर रहे थे। जबकि सडक़ निर्माण से मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर बम के धमाकों की आवास न तो कलक्टर ने सूनी न ही पहाड़ के नीच कांकेर डीएफओ और रेंजर के कानों तक पहुंची। इस सडक़ निर्माण से लोगों में आक्रोश भडक़ रहा है।
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(” मुख्यमंत्री ने नियम से गढिय़ा पहाड़़ निर्माण के लिए १३.८६ करोड़ के लिए अनुमोदन किया था। बारुद से पहाड़ पर धमाका नहीं करना था तो किसके आदेश पर ठेकेदार ने किया। इस मामले को विधानसभा में उठाऊंगा। ठेकेदार को ब्लैकलिस्टेड और लोक निर्माण विभाग के ईई और एसडीओ की बर्खास्तगी की मांग करुंगा।”

(शंकर ध्रुवा, विधायक कांकेर. )

“वन विभाग ने नियम एवं शर्तों के तहत गढिय़ा पहाड़ पर सडक़ निर्माण के लिए अनुमति दिया है। नियम का उलंघन करने वाले लोनिवि और ठेकेदार पर कार्रवाई के लिए पत्र भेज रहा हूं। ठेकेदार और लोकनिर्माण विभाग पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। मलबा को पहाड़ से नहीं फेंकना था तत्काल अब काब बंद होगा।”

( जे श्रीराम, डीएफओ कांकेर.)

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अंकुर तिवारी के विशेष रिपोर्ट

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