|| देवीप्रसाद मिश्र की कविताएँ || दस्तक में आज प्रस्तुत

|| देवीप्रसाद मिश्र की कविताएँ || दस्तक में आज प्रस्तुत

|| देवीप्रसाद मिश्र की कविताएँ || दस्तक में आज प्रस्तुत

✍? *देवीप्रसाद मिश्र*

⭕ *दस्तक* के लिए प्रस्तुति : *अनिल करमेले*

*|| राजा ने आदेश दिया ||*

राजा ने आदेश दिया : बोलना बन्द
क्योंकि लोग बोलते हैं तो राजा के विरुद्ध बोलते हैं

राजा ने आदेश दिया : लिखना बन्द
क्योंकि लोग लिखते हैं तो राजा के विरुद्ध लिखते हैं

राजा ने आदेश दिया : चलना बन्द
क्योंकि लोग चलते हैं तो राजा के विरुद्ध चलते हैं

राजा ने आदेश दिया : हँसना बन्द
क्योंकि लोग हँसते हैं तो राजा के विरुद्ध हँसते हैं

राजा ने आदेश दिया : होना बन्द
क्योंकि लोग होते हैं तो राजा के विरुद्ध होते हैं

इस तरह राजा के आदेशों ने लोगों को
उनकी छोटी-छोटी क्रियाओं का महत्त्व बताया.

 

*|| होटल पैराडाइज़ ||*

जिस होटल में मैं रुका हूँ वह गुलाबी नियान लाइट में पैराडाइज़ है मेज़
चिपचिपी है गिलासों और कप और दीवारों पर ग्रीज़ है बिस्तर का चादर ऐसा है
कि जैसे कीर्तन में बिछाने के बाद झटककर यहाँ बिछा दिया गया हो ओढऩे
वाला चादर ज्यादा संदेहास्पद है – जंगल काटने वाले किसी मामूली स्मगलर का
सेक्सवर्कर के साथ अभिसार का बिछावन। तकिया किसी मेडिकल रिप्रज़ंटेटिव
की दवाओं का थैला लग रहा है

होटल मालिक का तीसरा बेटा सीने की ज़ंजीर गले में डालकर घूमता है – स्टेशन
के पास माइनिंग के पैसे से होटल होने का जो भरोसा उसके पास है उसकी तुलना मेरे हिंदी
में लिखने के गिरते आत्मविश्वास से नहीं की जा सकती

वह मेरे कुर्ते, मोबाइल और होने को हिकारत से देखता है और पूछता रहता है
कि सब ठीक तो है सर मैं कहता हूँ कि सब ठीक होता तो तुम यह होटल न
बनवा पाते उसने हँसते हुए कहा कि होटल के परिसर में उसने मंदिर बनवा
रखा है माँ का आदेश हुआ कृष्ण उसका सखा है बोलो राधे राधे
मैं बिस्तर से उठता हूँ – हड्डियों की चट चट की आवाज़ें आती हैं। मैं अपने
पास कम साल होने की घबराहट से नहीं से अत्याचार की परंपराओं से विचलित हूँ

होटल का सबसे दुबला कर्मचारी आकर पूछता है कि टीवी चला दूँ तो जैसे याद
करके औचक कहता हूँ कि पंखा चला दो उसने कहा वह ख़राब है उसने जाते
हुए कहा कि कुछ और चाहिये क्या तो मैंने कहा कि सरसों का तेल जिसे वह
वाकई दे गया बहुत धीमे से यह बताते हुए कि वह इस बोतल को अपने कमरे
से लाया है जो होटल की छत पर है ठीक वहाँ जहाँ पैराडाइज़ लिखा है उसके पीछे

वह पूछता है कि आप क्या काम करते हैं तो मैं कहता हूँ कि कविताएँ लिखता
हूँ वह कहता है कि क्या आप इस बात को अपनी कविता में लिख सकते हैं
कि होटल के मालिक का दूसरा बेटा हर तीसरे दिन गुलाबी नियान लाइट में
नहाये पैराडाइज़ की बरसाती में बारह के बाद आता है, मुझे नंगा करता है और
पेट के बल लिटाता है मैंने कहा कि हिंदी में शील और अश्लील को लेकर बहुत
पाखंड है इसीलिये सच कहने के तरीके भी सीमित हैं- काफी हद तक अप्रमाणिक।

वह मुझे देखता रहा। फिर वह चाय नाश्ते के बर्तन हटाता रहा। इस दौरान कभी
टीवी का रिमोट दब गया – टीवी चल गया और लोकतंत्र के फ़साद का बहुत
सारा धुआँ कमरे में भर गया- बहुत सारे फासिस्ट कमरे में टहलने लगे जिसमें
होटल के मालिक का तीसरा बेटा भी था जो यह कहते हुए कमरे में घुस आया
कि सर सब ठीक तो हैं?

 

*|| कविताएँ लिखनी चाहिए ||*

जैसा कि एक कवि कहता है कि मातृभाषा में ही लिखी जा सकती है कविता
तो मातृभाषा को याद रखने के लिए लिखी जानी चाहिए कविता
और इसलिए भी कि यह समझ धुंधली न हो
कि पिता पहला तानाशाह होते हैं
और जैसा कि मैं कह गया हूं मांएं पहला कम्युनिस्ट
पड़ोसियों ने फ़ासिस्ट न होने की गारंटी कभी नहीं दी

इलाहाबाद से दिल्ली के सफर के शुरू में
एक आदमी ने सीट को एक्सचेंज करने का प्रस्ताव रखा
फिर उसने कहा कि और क्या एक्सचेंज किया जा सकता है
मैंने कहा कि मैं किसी को अपना कोहराम नहीं देने वाला
जाते-जाते वह कह गया कि झूठ पर फ़िल्म बनाने के बहुत पैसे मिलते हैं
मैंने गायब होने के पहले कहा

कि जो संरक्षण संविधान में कवि को मिलना चाहिए था वह गाय को मिल गया
पान खाते हुए वह हंस पड़ा और उसका सारा थूक मेरे मुंह पर पड़ गया

कविताएं लिखनी चाहिए ताकि कवि नैतिक अल्पसंख्यक न रह जाएं

कविताएं लिखी जानी चाहिए ताकि मुक्केबाज के तौर पर मुहम्मद अली की याद रहे
और देश के तौर पर वियतनाम की
और बसने के लिए फिलिस्तीन से बेहतर कोई देश न लगे
और वेमुला होना सबसे ज्यादा मनुष्य होना लगे

कविताएं लिखनी चाहिए क्योंकि ऋतुओं और बहनों केबगल से गुजरने को
कविताएं ही रजिस्टर करती हैं और पत्तों और आदमी के गिरने को

कविताएं लिखी जानी चाहिए क्योंकि कवि ही करते हैं वापस पुरस्कार
और उन्हें ही आती है अखलाक पर कविताएं लिखते हुए रो पड़ने की अप्रतिम कला.

 

*|| सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए ||*

औरों की मैं नहीं जानता
लेकिन मेरा काम अर्णव गोस्वामी के बिना चल जाता है
सत्य को पाने में मुझे अपनी दुर्गति चाहिए —
आइंस्टीन का बिखराव जिसमें बाल भी शामिल हों तो क्या हर्ज
चे का चेहरा और स्टीफन हाकिंग का शरीर
फासबिंडर की आत्मा और ऋत्विक घटक का काला-सफेद

मैं अपने प्रतिभावान होने का सर्वेक्षण कुछ दिनों के लिए टाल रहा हूं—

बचे समय में मैं अपने दुस्साहस से काम चला लूंगा और असहमति से

मैं अपने काव्य-पाठ में खाली हॉल से आश्वस्त हुआ

इस्मत-चुगताई की अंत्येष्टि में तीन लोग थे
रघुवीर सहाय के दाह-संस्कार में कुछ ज्यादा थे
मैं भी था लेकिन मुझे लोग नहीं जानते थे अब भी नहीं जानते
तब फेसबुक नहीं था और अब है तो मुझे उस पर होना नहीं आया

मेरे पास अजीब झुंझलाया चेहरा था
कि जैसे किसी सतत असहमत का आधा अमूर्त चेहरा चारकोल से बनाकर
कलाकार अपनी प्रेमिका के साथ भाग गया हो

जिस समाज में
सनी लियोनी, मोदी और अमिताभ बच्चन के ट्विटर पर सबसे ज्यादा लाइक-फॉलोवर हों
उसमें रात एक बजे खुद के साथ खुद का होना
और इस बात पर नींद का न आना
कि सिंगापुर में रहने वाला आपका भांजा मोदी समर्थक है काफी अजीब और बियाबान विपक्ष है

मैं अंदर-अंदर ही फटती नस से मरूंगा —
यह केवल संकेत है कि कौन किससे मरेगा
मतलब कि संस्कृति मंत्री अपने भीतर के जहर से मरेगा
आइए अब चलते हुए पूछ ही लेते हैं कि लोग शाहरुख खान की फिल्में क्यों देखते हैं
और आईपीएल के बीसियों मैच और उनमें फंसा राजीव शुक्ला का बहुत खाया चेहरा

अगर आपको याद हो तो मैंने कई बार कहा है कि कोई भी प्रेम अवैध नहीं होता
और अत्याचारी से घृणा सबसे रोमांटिक कार्यभार है

पृथ्वी छोड़ने में मुझे देर हो रही है
लेकिन प्रेमिका का बिस्तर छोड़ने में भी मैं कई तरह के बहाने करता रहा हूं

चलिए इस कविता को यहीं खत्म मान लें
और मेरे लिए दिल्ली छोड़ने के टिकट का चंदा इकट्ठा करें

मैं पता नहीं कब से यही सोचे जा रहा हूं
कि एक फासिस्ट का नाम रमाकांत पांडे कैसे हो सकता है.

✍? *देवीप्रसाद मिश्र*

⭕ *दस्तक* के लिए प्रस्तुति : *अनिल करमेले*

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