आरीडोंगरी और हाहालद्दी खदान से निकलने वाले लाल पानी के कारण किसानों के खेत बंजर हो रहें है; कांकेर भानुप्रतापुर .

अंकुर तिवारी की रिपोर्ट 

27.10.2017

कांकेर जिलें के भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम पंचायत कच्चे के आरीडोंगरी आयरन ओर माइंस तथा दुर्गूकोंदल तहसील के ग्राम हाहालद्दी चहचहाड़ में लौह-अयस्क की खदान को लीज में लेकर प्रबंधकों के द्वारा उत्खनन का कार्य किया जा रहा है। खदान में लौह पत्थरों को तोड़ने के लिए नियम कायदें को दरकिनार कर बारूदी धमाके किए जा रहे हैं। धमाकों से आदिवासियों के घरों की बुनियाद हिल गई है। दीवारों पर दरारें पड़ गई हैं।

 

यहाँ के खदानों से निकलने वाले आयरन युक्त लाल पानी को खेतों में बहाया जा रहा है। लाल पानी के कारण आदिवासी किसानों के खेत बंजर हो रहे है। खेतों में धान तथा अन्य फसल का उत्पादन दिनों दिन घटता जा रहा है।

प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से लाल पानी को खेतों में बहाये जाने पर रोक लगाने की गुहार लगाई। लेकिन किसी के कान में जू तक नहीं रेंगी।

 

कच्चे गांव के किसान सोनसाय कुमेटी का कहना है कि खदान संचालकों के द्वारा खेतों में आयरनयुक्त लाल पानी को बहाया जा रहा है। इसकी शिकायत कई बार जिला प्रशासन से की गई, फिर भी खदान संचालकों पर कार्रवाई नहीं की गई।

 

सोनसाय कुमेटी कहते हैं, “लाल पानी के कारण खेतों में कुछ पैदा होना ही बंद हो रहा है। जब से इस क्षेत्र में लौह अयस्क का खदान खोला गया है, फसल के उत्पादन में भारी कमी आई है। अब आधे से भी कम उत्पादन हो रहा है।”

अमर सिंह कावड़े कहते हैं, “खदान में हो रहे धमाके के कारण कई घरों की दिवारों पर दरारें पड़ गई है। फसल खराब होने पर पांच-छह सौ रूपए का मुआवजा दिया जाता है। लेकिन मकानों को हो रहे नुकसान पर प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।”

 

सांसद विक्रम उसेंडी कहते हैं, “लोक सभा में मैने मुद्दा उठाया था। आरीडोंगरी और हाहालद्दी खदान से निकलने वाले लाल पानी के कारण किसानों के खेत बंजर हो रहें है। दोनों खदान में हो रहे धमाके से आदिवासी और अन्य लोगों के मकानों में दरारें पड़ गई है। उनके घरों की सुरक्षा के लिए खदान संचालकों को ध्यान देना चाहिए।”

 

उसेंडी कहते हैं, “ग्रामीणों को मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। खदान संचालकों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।”

 

इनके खिलाफ कौन करेगा कार्रवाई

मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य बने 16 साल बीत गए। भाजपा की  सरकार राज्य तथा केंद्र में सत्ता का सुख भोग रहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह किसानों के हितैषी होने का दावा करते रहें है, मग़र इन दावों की जमीनी हक़ीक़त कुछ और है।

 

सांसद विक्रम उसेंडी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत उत्तर बस्तर में लाल पानी से बंजर हो रहे किसानों के खेत के साथ ही उत्खनन के लिए किए जाने वाले ब्लास्ट से आदिवासियों के कच्चे मकानों में पड़ रही दरारों का मुद्दा संसद में उठाया था। लेकिन खदान में हो रहे बारूदी धमाके जारी है।

 

खदान से निकलने वाला आयरनयुक्त लाल पानी अब भी खेतों में फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। जाहिर सी बात है कि खदान में हो रहें धमाके की गूंज बहरी सरकार के कानों तक नहीं सुनाई दे रही है। या फिर जानबूझकर किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सवाल अब भी यहीं है कि इन खदान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा।

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अंकुर तिवारी की रिपोर्ट 

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