परसा कोल ब्लॉक जनसुनवाई में अडानी द्वारा धनबल का दुरुपयोग : कम्पनी की रिपोर्ट फ़र्ज़ी भृमात्मक और झूटी

27.10.2017

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29 अक्टूबर को प्रस्तावित परसा कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय जनसुनवाई के पूर्व अडानी कंपनी द्वारा लोगों का समर्थन जुटाने जिस तरह लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है वह न सिर्फ चिंताजनक बल्कि बहुत ही गंभीर मामला भी हैं । धनबल का उपयोग यह भी दर्शाता हैं कि कंपनियां किसी भी कीमत पर खनिज लूट के लिए स्वीकृतियां हासिल करना चाहती हैं ।
किसी भी परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति के पूर्व लोकसुनवाई एक अवसर था जिसमे पर्यावरणीय प्रभाव पर लोग गंभीरता से अपने विचार रखे और पर्यावरणीय सम्वन्धी सभी पहलू सामने आ पाए । अक्सर कंपनियों द्वारा तैयार रिपोर्ट पूर्णतः फर्जी, भ्रमात्मक और गलत जानकारियों पर आधारित होती हैं।
पर्यावरण एक ऐसा विषय हैं जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता हैं परन्तु खनन और उधोगिकरण कि अंधी दौड़ में नियमो और कानूनों का पालन करवाने वाला प्रशासनिक तंत्र स्वयं विधि विरुद्ध तरीके से कार्य करते हुए कंपनियों के साथ खड़ा नजर आता हैं।
चारो तरफ पैसा बांटा ज रहा हैं, कोई पत्रकार या संगठन के लोग जायें तो स्पष्ट दिखेगा .
छतीसगढ़ बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता गॉंव पहुच कर यह सब तथ्य एकत्रित कर रहे है ,।

एक और न्यूज़ पोर्टल जोहर छत्तीसगढ़  ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ,

अडानी के झांसे में नहीं आने वाले है लोग
आसपास के गांव में अडानी द्वारा दी जा रही दारू मुर्गा की पार्टी, ग्रामीणों में आक्रोश
अम्बिकापुर-जोहार छत्तीसगढ़

29 अक्टूबर को प्रस्तावित परसा कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय जनसुनवाई के पूर्व अडानी कंपनी द्वारा लोगों का समर्थन जुटाने जिस तरह लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है वह न सिर्फ चिंताजनक बल्कि बहुत ही गंभीर मामला भी हैं । धनबल का उपयोग यह भी दर्शाता हैं कि कंपनियां किसी भी कीमत पर खनिज लूट के लिए स्वीकृतियां हासिल करना चाहती हैं ।
किसी भी परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति के पूर्व लोकसुनवाई एक अवसर था जिसमे पर्यावरणीय प्रभाव पर लोग गंभीरता से अपने विचार रखे और पर्यावरणीय सम्वन्धी सभी पहलू सामने आ पाए । अक्सर कंपनियों द्वारा तैयार रिपोर्ट पूर्णतः फर्जी, भ्रमात्मक और गलत जानकारियों पर आधारित होती हैं।
पर्यावरण एक ऐसा विषय हैं जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता हैं परन्तु खनन और उधोगिकरण कि अंधी दौड़ में नियमो और कानूनों का पालन करवाने वाला प्रशासनिक तंत्र स्वयं विधि विरुद्ध तरीके से कार्य करते हुए कंपनियों के साथ खड़ा नजर आता हैं।
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