अदालत अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को नहीं छीन सकती -सुप्रीम कोर्ट – कांचा इलैया

14.10.2017

 

दिल्ली, बहुजन लेखक कांचा इलैया द्वारा लिखित एक पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जो याचिका दायर की गयी थी माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वह याचिका आज खारिज कर दी।

*यह सर्वोच्च न्यायालय का काम नहीं है कि पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे। ये लेखक लेखक के विचार और भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं उस समाज और दुनिया के बारे में जिनमे वह रहता है। न्यायालय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नहीं छीन सकता। सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा उच्चतम स्तर पर मुक्त बोलने का मौलिक अधिकार बनाये रखा है।*

*सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को ख़ारिज किया*

लेखक और कार्यकर्ता प्रोफेसर कांचा इलियाह शेफर्ड द्वारा लिखी गई एक पुस्तक (जिसमें उन्होंने कहा ‘समाजिका स्मगलरुलु कोमातुल्लु’) पर प्रतिबंध लगाने के लिए याचिका को खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अपने दो पृष्ठ के आदेशों में दर्ज किया।

*वकील के.एल.एन.वि. द्वारा दायर की गई याचिका वीरानजयुलु ने ‘हिंदुत्व-मुक्त भारत’ नामक ( ‘पोस्ट-हिंदु इंडिया ‘) एक किताब में एक विशेष अध्याय को अपवाद भी लिया।*

*पुस्तक भारत में प्रचलित जाति व्यवस्था के बारे में महत्वपूर्ण है, खासकर आर्य वैश्य समुदाय के बारे में ।*

*अदालत अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को नहीं छीन सकती -सुप्रीम कोर्ट*

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