डॉक्टर_अम्बेडकर_की_प्रासंगिकता: बादल सरोज 

 

छतीसगढ़ के भिलाई मैं 8 अक्टुम्बर को
डॉक्टर_अम्बेडकर_की_प्रासंगिकता पर जनवादी लेखक संघ की गोष्ठी में मध्यप्रदेश माकपा के राज्यसचिव बादल सरोज ने गोष्टी के बाद अपने एक नोट में जनवादी लेखक संघ छत्तीसगढ़ के संयोजक कपूर वसनिक जी के बारे में कुछ यूँ लिखा .
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“मैं अम्बेडकर साब की ज़िंदगी के बारे में बहुत कुछ बोल सकता हूँ, मगर ऐसा करते में मुझे रोना आ जाता है । इसके बावजूद मै बाबा साहब का अनुयायी हूँ – भक्त नहीं !!”

आज दोपहर से शाम तक भिलाई में डॉ. आंबेडकर की प्रासंगिकता पर हुयी चर्चा में बोलते हुये यह बात रुंधे गले से कपूर वासनिक साब ने कहीं ।
डॉ. आंबेडकर को डब्बे या खांचे में कैद करने की कोशिशों को अनअम्बेडकारी बताते हुये उन्होंने कहा कि बुद्द के शब्दों में मनुष्य हमेशा बदलाव की प्रक्रिया में रहता है, बाबा साब भी अपने अंदर बदलाव करते रहते थे । वे परिपक्व से और परिपक्व होने की सतत निरंतरता में रहे । इस सम्बन्ध में अनेक रोचक और तथ्यात्मक उदाहरण भी उन्होने दिये ।
उन्होंने कहा कि कुछ मसलों को लेकर अम्बेडकर की मार्क्सवाद से असहमति थी किन्तु वे मार्क्सवाद विरोधी नहीं थे । उन्होंने आधुनिक भारत को लेकर अनेक मंचों, आयोगों को लेकर जो नीतियां सुझाई हैं वे कम्युनिस्ट नीतियों के बहुत नजदीक बैठती हैं ।
वासनिक साब जनवादी लेखक संघ और मराठी साहित्यकार संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष हैं । आंबेडकर और दलित साहित्य सम्पदा के गजब के जानकार हैं । बेहद सरल किन्तु अमोघ वक्ता । जानते हम उन्हें बरसों से हैं, सुना आज पहली बार ।
अपने संक्षिप्त संबोधन में ही आज उन्होंने मन्त्रमुग्ध कर दिया । आधी अधूरी जानकारी सुधारी और अनेक धारणाओं के जाले साफ़ किये ।
भिलाई नगर रेलवे स्टेशन के पास कोसानगर में बने बुद्द परिसर में हुयी इस चर्चा में वासनिक साब के साथ इन पंक्तियों के लेखक के अलावा पत्रकार-संपादक उत्तम कुमार भी बोले । संचालन युवा नाट्य कर्मी कुलकर्णी कर रहे थे .
धन्यवाद #जलेसं_भिलाई, शुक्रिया #नासिर_अहमद_सिकन्दर साब

बादल सरोज
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